ब्राजील और सर्बिया के चुनाव परिणाम मोदी और भाजपा को चेतावनी देने वाले हैं… कौशल किशोर चतुर्वेदी

ब्राजील और सर्बिया के चुनाव परिणाम मोदी और भाजपा को चेतावनी देने वाले हैं…
भारत में हाल ही में हुए जेन-ज़ी के प्रदर्शन और धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्तारूढ़ भाजपा की धड़कनें बढ़ाईं हैं। चुनावों की दृष्टि से अगर इस घटना और 12 साल से सत्तारुढ़ मोदी को लेकर विश्लेषण किया जाए तो ब्राजील और सर्बिया के चुनाव परिणाम एक निष्कर्ष की तरफ ले जाने वाले लगते हैं। ब्राजील के नेता लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने शानदार वापसी करते हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है। इस जीत के साथ वर्कर्स पार्टी के 80 वर्षीय लीडर लूला को चौथी बार राष्ट्रपति बनने का मौक़ा मिला है।
उन्होंने देश के राष्ट्रपति चुनाव में कट्टर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी और लिबरल पार्टी के नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को मामूली अंतर से हराया है। तो दूसरी तरफ सर्बिया में हुए संसदीय चुनाव में लंबे समय से सत्ता पर काबिज पुतिन समर्थक राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर ली है। शुरुआती नतीजों के आधार पर वुसिक ने घोषणा की कि विपक्षी दल ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने संसद में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है और वह अगली सरकार बनाने जा रही है। इस स्टूडेंट लिस्ट की तुलना भारत में कॉकरोच जनता पार्टी से की जा सकती है। भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी भी राजनीतिक दल के रूप में ही अपनी पहचान बनाने वाला है। जिस पर फिलहाल ऐसा लग रहा है कि सरकार ने अंकुश कर लिया है।
तो पहली ख़बर यही है कि ब्राजील में लगभग सभी वोटों की गिनती पूरी होने के बाद, रविवार यानि 25 अक्टूबर 2026 को लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतंत्र में हुए चुनाव के दूसरे दौर में लूला को 51.76 फीसदी वोट मिले, जबकि जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.24 फीसदी वोट मिले। लूला की जीत कई चुनावी सर्वे के अनुमानों के उलट रही। इन सर्वे में बोल्सोनारो को मामूली बढ़त दी गई थी। इस महीने की शुरुआत में पहले दौर के मतदान में 45 वर्षीय सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो ने लगभग दो प्रतिशत अंकों की बढ़त हासिल की थी। हार के बाद पूर्व राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को मानने से इंकार कर दिया है।
फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को ‘असंभव’ बताते हुए ‘समझ से परे’ बताया है। उन्होंने लूला की जीत को स्वीकार करने से इंकार किया और चुनाव नतीजे रद्द करने की मांग की है। यहाँ पर लूला और मोदी की तुलना करें तो बहुत कुछ है समानताएँ नजर आती हैं। अगर मोदी के नेतृत्व में 2029 का लोकसभा चुनाव भाजपा लड़ती है, तब मोदी भी करीब 80 वर्ष के होंगे और वह भी चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए चुनाव जीतने की हर संभव कोशिश करेंगे। और हो सकता है कि ब्राजील की तरह ही भारत में मोदी की जीत मामूली अंतर से संभव हो सकें। क्योंकि तीसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ते हुए भाजपा ने 400 पार का नारा लगाया था लेकिन इसी बार कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिलीं और भाजपा का चार सौ पार का नारा फ्लॉप साबित हुआ था। यह बात और है कि एनडीए गठबंधन ने मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाने में सफलता हासिल की थी। तो चौथी बार की स्थितियाँ कहीं न कहीं ब्राजील के चुनाव परिणामों के रास्ते पर भी जा सकती हैं। क्योंकि भारत में भी विपक्ष लगातार खुद को मजबूत करता नजर आ रहा है। और राहुल गांधी की तुलना भी ब्राजील के विपक्षी दल के नेता फ्लावियो बोल्सोनारो से की जा सकती है। राहुल गांधी ने तो आज तक किसी भी चुनाव परिणाम में मोदी और एनडीए की जीत को स्वीकार नहीं किया है और वोटों की चोरी का लगातार इल्जाम लगाते रहे हैं।
वहीं भारत के लोकसभा चुनाव का आकलन यदि सर्बिया के चुनाव परिणामों की नजर से देखा जाए तो
कॉकरोच जनता पार्टी की तुलना सर्बिया में सत्तारूढ़ होने जा रहे युवाओं के दल स्टूडेंट लिस्ट से की जा सकती है। वोटों की गिनती में ‘स्टूडेंट लिस्ट’ को लगभग 22 लाख (2.2 मिलियन) वोट मिले, यह कुल वोटों का 52 प्रतिशत है। जबकि सत्ताधारी ‘सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी’ को लगभग 17.2 लाख (1.72 मिलियन) वोट मिले, यह कुल डाले गए वोटों का 32.3 प्रतिशत है। लगभग 52 प्रतिशत वोट शेयर और अनुमानित 135 से 140 सीटों के साथ ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने निर्णायक जीत दर्ज की है, जबकि सत्ताधारी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी करीब 105 सीटों पर सिमटती दिख रही है। कड़े मुकाबले वाले इस संसदीय चुनाव में भारी मतदान हुआ और तनाव भी काफी बढ़ गया था। एक तरफ राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक और उनकी दक्षिणपंथी ‘सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी’ थी, तो दूसरी तरफ छात्रों के नेतृत्व वाले समूह ‘स्टूडेंट लिस्ट’ थे।
स्टूडेंट लिस्ट’ को जनता का व्यापक समर्थन मिला है। वह सरकार पर भ्रष्टाचार करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हैं। और कॉकरोच जनता पार्टी भी भारत में सर्बिया के स्टूडेंट लिस्ट की तरह भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाकर ही मोदी सरकार को आईना दिखाने की कोशिश करती रही है। भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन वाले विपक्षी गठबंधन ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ ने संसदीय चुनाव में जीत हासिल की है। इस नतीजे के साथ करीब 14 वर्षों से सत्ता में प्रभावशाली भूमिका निभा रही राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की पार्टी सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया है। भारत के संदर्भ में विपक्ष की जगह कॉकरोच जनता पार्टी को यूपीए गठबंधन में शामिल कर देखा जा सकता है। और यदि चुनाव के वक्त स्थितियां बदलीं तो चुनाव परिणाम सर्बिया की तरह भारत में भी नजर आ सकते हैं।
ब्राजील और सर्बिया में
एक और दिलचस्प पहलू है कि ब्राजील में चीन समर्थक लूला को जीत हासिल हुई है तो सर्बिया में पुतिन समर्थक वुसिक को हार मिली है। सर्बिया में युवाओं का विद्रोह सत्ता पर भारी साबित हुआ है तो ब्राजील में भी लूला बड़ी मुश्किल से जीत की दहलीज पर कदम रख पाए हैं। भारत में 2029 का लोकसभा चुनाव कहीं न कहीं ब्राजील और सर्बिया के इर्द गिर्द परिणामों को समेटे हुए नजर आने वाला है। भारत में मुख्य चुनौती भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिस्से में ही आने वाली है। इसका अहसास भाजपा को भी है और नरेंद्र मोदी को भी है। वास्तव में ब्राजील और सर्बिया के चुनाव परिणाम मोदी और भाजपा को चेतावनी देने वाले हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *