इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में अब ऊंची इमारतों के निर्माण का रास्ता खुल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में शहरीकरण की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए भवन निर्माण के नियमों में छूट दी जा रही है।
पर्याप्त चौड़ी सड़क उपलब्ध होने पर 100 मंजिल तक की इमारत बनाने की अनुमति देने की व्यवस्था भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री बुधवार को इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल को छह-छह जिलों को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर को भी इस योजना में शामिल करने की दिशा में काम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी विकास को केवल इंदौर-उज्जैन या इंदौर-भोपाल तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इंटीग्रेटेड पॉलिसी के तहत बड़े शहरी क्षेत्रों के विस्तार और इकोनॉमिक कॉरिडोर को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
बढ़ती आबादी और शहरी जरूरतों के बीच शहरों का विकास योजनाबद्ध तरीके से करना जरूरी है। प्रदेश बड़े महानगरों और दूसरे राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए शहरी विकास की नई संभावनाओं पर काम कर रहा है।

6 एमओयू पर हस्ताक्षर, जल प्रबंधन और आवास पर जोर
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में शहरी विकास, जल प्रबंधन, किफायती आवास और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए छह एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इनमें इंदौर की जल प्रदाय और सीवरेज परियोजना के लिए बैंक ऑफ इंडिया के साथ समझौता भी शामिल है। उज्जैन के मंदिर सर्किट को आधुनिक बनाने, रीवा की जल प्रदाय योजना और उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।
कॉन्क्लेव में नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराने और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण एवं पुन: उपयोग के लिए दो राज्यस्तरीय नीतियों के प्रारूप भी प्रस्तुत किए गए। इन पहलों का उद्देश्य शहरी सुविधाओं का विस्तार, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और शहरों का व्यवस्थित विकास करना है।

कैलाश विजयवर्गीय बोले- रिटायरमेंट के बाद अच्छे नेता बन सकते हैं संजय दुबे
कार्यक्रम के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से एसीएस संजय दुबे के भाषण की तारीफ करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उन्होंने इतना अच्छा भाषण दिया कि उनका भार हल्का कर दिया।
इसके बाद अंग्रेजी में उन्होंने कहा, “रिटायरमेंट के बाद आप बहुत अच्छे नेता बन सकते हैं, क्योंकि आपका भाषण आत्मविश्वास से भरा और शानदार था।” इस टिप्पणी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत मंच पर मौजूद नेता हंसने लगे।

किफायती आवास और जल पुन: उपयोग की नीति के प्रारूप पेश
कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश शहरी किफायती आवास नीति का प्रारूप प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लोगों को किफायती, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है। इसके साथ ही ‘मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण एवं पुन: उपयोग की राज्यस्तरीय नीति, 2026’ का प्रारूप भी सामने रखा गया।
इसके तहत शोधित अपशिष्ट जल के दोबारा उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर है। औद्योगिक जरूरतों के लिए ऐसे जल की आपूर्ति और उपयोग को लेकर किया गया समझौता भी इसी पहल का हिस्सा है।
नियोजित विकास और इकोनॉमिक कॉरिडोर पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शहरी विकास की एकीकृत नीति के तहत इकोनॉमिक कॉरिडोर, बड़े शहरी क्षेत्रों के विस्तार और आधुनिक निर्माण की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।
100 मंजिल तक की इमारतों की अनुमति इसी दिशा में प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, ऐसी इमारतों के निर्माण के लिए लागू होने वाली विस्तृत शर्तों, सड़क की आवश्यक चौड़ाई और अन्य तकनीकी मानकों की जानकारी नियमों के स्पष्ट होने के बाद सामने आएगी।इसी तरह कॉन्क्लेव में हुए समझौतों के तहत परियोजनाओं की लागत, वित्तीय सहयोग और क्रियान्वयन की समयसीमा स्पष्ट होने पर उनकी प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।