अमेरिका, जापान, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में सरकारें लोगों को घर में इमरजेंसी राशन, पावर बैंक, पीने का पानी वगैरह जमा करने को कह रही हैं। ब्रिटेन का कहना है कि रूस उस पर बड़ा हमला करने की तैयारी में है। अमेरिका अपने सैन्य अड्डों में 90 दिन तक का खाना, हथियार और ईंधन जुटा रहा है। ट्रम्प कह चुके हैं कि तीसरा विश्व युद्ध नजदीक है।
ब्रिटेन, अमेरिका, जापान और यूरोप के कई देशों में सामान स्टॉक करने को कहा गया है…
ब्रिटेन का ‘बी रेडी’ कैंपेन: 3 दिन का राशन स्टोर करने को कहा गया
ब्रिटेन की सरकार ने 22 अक्टूबर से ‘बी रेडी’ कैंपेन शुरू किया है। इसकी वेबसाइट पर लिखा है कि जब तक रेस्क्यू टीम न पहुंचे, तब तक जरूरी चीजें कम नहीं पड़नी चाहिए। इसके लिए 3 दिन काफी हैं।
लोगों से कहा गया है कि 9 लीटर पानी, 3 दिन का खाना, टॉर्च, बैटरी, फर्स्ट-एड किट, कैश, पावर बैंक, बाथरूम प्रोडक्ट, कंबल, ID प्रूव की फोटोकॉपी और रेडियो जुटा लें।
कहा गया है कि इसका मकसद प्राकृतिक आपदा, जंग, आतंकी हमलों और जंग जैसी इमरजेंसी के लिए तैयारी करना है। रेसक्यू टीम एक साथ हर जगह नहीं पहुंच सकती। तब तक ये इंतजाम लोगों को जिंदा रखेंगे।
डिफेंस सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग ने कहा है, ‘दुश्मन के हमले हमारे रोजमर्रा के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हे खतरे अब मनगढ़ंत नहीं, असली हैं।
अमेरिका का ‘किला’: 90 दिन बिना बाहरी मदद काम करेंगे सैन्य बेस
अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन मुख्य सैन्य अड्डों को बिना बाहरी मदद के 90 दिन तक काम करने के लिए तैयार कर रहा है। अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स के मुताबिक, 30 सितंबर को रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ‘फोर्ट्रेस’, यानी किला नाम की ये योजना लॉन्च की।
इसके तहत सैन्य ठिकाने अपने लिए बिजली बनाएंगे। जंग के हालात में अगर शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो जाए, तो भी ये बाहरी बिजली और ईंधन के बिना ये सैन्य अड्डे काम करते रहेंगे।
सैन्य अड्डों पर पानी, बिना बिजली और इंटरनेट के कम्युनिकेशन के भी इंतजाम किए जा रहे हैं। गोला-बारूद, जरूरी मिनरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्पेयर पार्ट्स और मेडिकल सप्लाई के स्ट्रेटेजिक रिजर्व तैयार किया जा रहे हैं।मिलिट्री की जरूरी चीजों के लिए, दो सप्लायर या प्रोड्यूसर होंगे, ताकि किसी एक को खोने पर ऑपरेशन न रुके।अमेरिका 17 नवंबर को अपने इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम (EAS) को पूरे देश में टेस्ट करने वाला है।

जापान की अर्जेंट रिक्वेस्ट: 3 से 7 दिन का खाना-पानी स्टोर करें
जापान की सरकार ने भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की तैयारी के नाम पर लोगों से कम-से-कम 3 से 7 दिन तक का खाना-पानी जमा करने के लिए कहा है। 2 नवंबर को ये एलान होगा।
डिजास्टर मैनेजमेंट मंत्री गोशी होसोनो ने कहा है, ‘घर पर खाना, टॉयलेट का सामान, जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सामान और पानी स्टोर करें, ताकि सरकार के सपोर्ट के बिना काम चल सके।’
कई यूरोपीय देशों ने भी एक्शन लिया है…
- यूरोपियन यूनियन ने पिछले साल ‘प्रिपेयर्डनेस यूनियन स्ट्रैटेजी’ अपनाई। इसके मुताबिक, इमरजेंसी में लोगों को 72 घंटों तक बिना मदद के रहने के लिए तैयार होना चाहिए।
- फिनलैंड ने 9 महीने का अनाज भंडार किया है। स्वीडन ने डिफेंस सिस्टम अपग्रेड किए हैं।
- पोलैंड, फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने शेल्टर होम्स को सुधारा है। नागरिकों को रेस्क्यू ट्रेनिंग दी है।
- आयरलैंड ने अगस्त 2026 में शुरू हुए ‘बी इमरजेंसी रेडी’ कैंपेन के तहत लोगों से घर में पानी और खाना वगैरह रखने को कहा है। सलाह दी गई है कि लाइट और गैस बंद करने की तैयारी रखें। माचिस और लाइटर खरीदें। कीमती सामान के लिए मजबूत प्लास्टिक बैग रखें।

भूकंप प्रभावित होने के चलते जापान के स्टोर्स में डिजास्टर रेडी किट्स रखी जाती हैं।
हां, 2 तरह के खतरे बताए जा रहे हैं..
1. दुनिया में बड़ी जंग छिड़ सकती है
- 24 अक्टूबर को ब्रिटेन के डिफेंस सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग ने कहा, ‘रूस, NATO के खिलाफ ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ तेज कर रहा है। 2030 तक दुश्मनों की ताकत और इकॉनमी उन्हें हमला करने लायक बना देगी। हमें जंग लड़ने और जीतने के लिए तैयार होना चाहिए। हमारे पास 1000 दिन हैं।’
- ब्रिटेन के पूर्व आर्मी चीफ जनरल सर पैट्रिक सैंडर्स ने कहा, ‘दुनिया कोल्ड वॉर के दौर से ज्यादा खतरनाक हो गई है। मुझे हमारी ताकत और आम लोगों की सुरक्षा की चिंता है।’
- जुलाई 2025 में भी सैंडर्स ने कहा था कि ब्रिटेन के पास रूस से जंग की तैयारी के लिए 5 साल से भी कम समय है। बंकर बनाने और एयर डिफेंस में इन्वेस्ट करने की जरूरत है।
- रूस-यूक्रेन जंग को लेकर ट्रम्प कह चुके हैं कि अगर यह नहीं रुका, तो तीसरे वर्ल्ड वॉर में बदल सकता है।
- पिछले महीने NATO महासचिव मार्क रुट्टे ने भी कहा कि रूस का अगला टारगेट यूरोप हो सकता है। हमें पुराने दौर जैसी जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।
- ट्रम्प कई बार ये संकेत भी दे चुके हैं कि इलेक्शन के बाद ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए जाएंगे। अमेरिकी सेना इसकी तैयारी कर रही है। दरअसल, अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म इलेक्शन हैं।
- अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, अमेरिका ने डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनलों के जरिए खाड़ी देशों से कहा है कि वे ईरान के खिलाफ छोटे, लेकिन तेज मिलिट्री कैंपेन के लिए तैयार रहें।
- अमेरिका खाड़ी देशों के सैन्य अड्डों पर सैनिक, हथियार, 20 अमेरिकी वॉरशिप, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट्स तैनात कर रहा है। ये जंग मिडिल-ईस्ट के बड़े इलाके में फैल सकती है।
- वहीं जापान की चिंता ताइवान-चीन तनाव को लेकर है। जापान के डिफेंस मिनिस्टर शिन्जिरो कोइजुमी ने कहा कि जापान के आसपास का माहौल दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर है। चीन सबसे बड़ी चुनौती है। वेस्ट एशिया में यूक्रेन जैसा संकट हो सकता है। उन्होंने रूस और चीन की साझेदारी पर भी चिंता जताई।
2. पूरी दुनिया में बड़ा साइबर अटैक
- चीन, अमेरिका और रूस जैसे देशों में AI पावर्ड ड्रोन, मिसाइल और बाकी हाथियार, AI टेक्नोलॉजी से लैस डिफेंस सिस्टम और नई साइबर तकनीक की होड़ बढ़ रही है।
- अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी ने चेतावनियां जारी की हैं। जापान और यूरोपीय देशों के नेताओं ने भी गंभीर साइबर और हाइब्रिड खतरों का डर जताया है।
- ब्रिटेन के अलावा फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने अपने नागरिकों को साइबर अटैक के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूरोप और फ्रांस के खिलाफ रूस के हाइब्रिड अटैक का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने इन्फॉर्मेशन सिस्टम और एयरस्पेस में घुसपैठ और निगरानी जैसी बातें भी कहीं।
कई अंग्रेजी अखबारों में AI और तकनीक से जुड़ी 3 हालिया घटनाओं का जिक्र है…
प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में खामी, सरकारी वेबसाइट बंद करनी पड़ीं: इसी महीने PHP प्रोग्रामिंग भाषा में सुरक्षा खामी का पता चला। इसके चलते ब्रिटेन में 32 ऑनलाइन सरकारी वेबसाइट बंद करनी पड़ीं। नीदरलैंड्स, फिनलैंड, फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों में भी यही हुआ। PHP दुनिया की 70% वेबसाइट्स में इस्तेमाल होती है।
रूस ने समुद्र में इंटरनेट केबल काटने की कोशिश की: रॉयटर्स के मुताबिक, 2026 में ब्रिटेन, नॉर्वे और अमेरिका ने आर्कटिक के समुद्री इलाके में रूस की एक ड्रिल रोकी। रूसी पनडुब्बियां चुपचाप समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल डीएक्टिवेट कर रही थीं। इन केबल के जरिए दुनिया भर में इंटरनेट चलता है।
फ्रांस में हैकर्स ने तापमान बढ़ाकर फ्रीजर में आग लगा दी: 12 अक्टूबर को हैकर्स ने फ्रांस की सैकड़ों सुपरमार्केट के फ्रीजर को रिमोट से कंट्रोल करके तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा दिया।

हैकर्स के अटैक के चलते फ्रांस में फ्रीजरों का तापमान बढ़ने से कहीं खाना खराब हो गया, तो कहीं आग लग गई। करोड़ों यूरो का नुकसान हुआ।