भोपाल:एक मुशायरे में राहत इन्दौरी साहब को कुछ लफ़ंगे हूट कर रहे थे उन्होंने जवाब दिया कि “बरखुरदार मैं भी कभी 19 -20 साल का रहा हूं” मैं भी राहत भाई की तरह कहूंगा कि मैं भी कभी जवान था…मेरे कॉलेज के दिनों में मेरा एक दोस्त था,वो बड़ा दिलफेंक टाइप था..

चलते फिरते किसी को भी लेटर थमा देना (तब ये सोशल मीडिया,मोबाइल नाम का प्राणी नहीं था) मैं जब टोकता था, तो वो एक डायलॉग मारता था… “मुन्ना भाई, माँगो उसी से जो दे दे( इश्क़ ) खुशी से और कहे न किसी से” तकरीबन 35 साल बाद ये डायलॉग याद आया.. पन्ना के इरिगेशन डिपार्टमेंट के EE साहब की मासूमियत देखकर… ये कह रहे हैं ये किसी पर रिश्वत के लिए दवाब नहीं डालते, जो भी खुशी से जितना दे जाए, ले लेते हैं…

इनका नागरिक अभिनंदन प्रशासन एकेडमी भोपाल में करना चाहिए और इनको पदक देने का काम पुलिस मुख्यालय के मुखिया मकवाना साहब को करना चाहिए क्योंकि ये लोकायुक्त और EOW का काम आसान कर रहे हैं.. लोड उन तक ट्रांसफर नहीं करते… इनका नागरिक अभिनंदन जब भी प्रशासन करेगा.. एक माला हम भी पहनाएंगे अपने उसी दोस्त की नसीहत को चरितार्थ होता देखकर कि… मांगो उसी से, जो दे दे खुशी से…