वह होली काली थी तो यह दीवाली काली हो गई… कौशल किशोर चतुर्वेदी

वह होली काली थी तो यह दीवाली काली हो गई…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्य प्रदेश पुलिस के लिए 2 नवंबर 2026 की तारीख हमेशा-हमेशा के लिए काले अक्षरों में दर्ज हो गई है। शराब माफिया की मुसीबत बने खातेगांव टीआई दिलीप पुरी की शराब का अवैध परिवहन कर रहे ड्राइवर ने ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी। तेज तर्रार आईपीएस आदित्य मिश्रा ने दो दिन पहले ही देवास जिले में आमद दी थी। और उनके निर्देश पर शराब की तस्करी को रोकने के लिए यह प्रभावी कार्रवाई की जा रही थी। लेकिन जब टीआई ने ड्राइवर को ट्रक से बाहर आने की चेतावनी दी, तब उसने डिवाइडर पर ट्रक चढ़ाकर दीपक पुरी की जान ले ली। इस घटना ने मध्य प्रदेश में 2012 में मुरैना जिले में रेत माफिया के आतंक की याद दिला दी। तब होली के दिन ही आईपीएस नरेंद्र कुमार की रेत माफिया के ट्रैक्टर ने कुचलकर हत्या कर दी थी। और तब इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की वजह से वह होली काली हो गई थी। और यदि देखा जाए तो 14 साल बाद भी प्रदेश में माफियाओं के आतंक में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। तब एक आईपीएस की नृशंस हत्या हुई थी, तो अब ठीक उसी तर्ज पर टीआई दीपक पुरी की हत्या बड़ी अफसोसजनक और चिंता में डालने वाली है। तब मुरैना जिले का रेत माफिया खलनायक बनकर सामने था तो अब देवास जिले में वही काम शराब माफिया ने किया है। अगर वह होली काली हुई थी, तो अब 2026 में दिवाली काली हुई है।
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में 8 मार्च 2012 को अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान युवा आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र कुमार की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना 8 मार्च 2012 को धुलेंडी (होली) के दिन मुरैना जिले के बामोर इलाके में हुई थी। नरेन्द्र कुमार 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और उस समय बामोर में अनुमंडल पुलिस अधिकारी के पद पर तैनात थे। उनकी उम्र करीब 30 वर्ष थी। वे अवैध रूप से बलुआ पत्थर और रेत लेकर जा रहे एक ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी ट्रैक्टर चालक मनोज गुर्जर ने उन्हें टक्कर मार दी और उनके ऊपर से ट्रैक्टर चढ़ा दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। और तब लगा था कि मुरैना में अवैध रेत परिवहन पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। मुरैना और पूरे मध्य प्रदेश में तब और अब में बहुत ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिल रहा है। यहां तक कि चम्बल के ही एक और जिले भिंड में अवैध रेत के खिलाफ सख्ती की वजह से हाल ही में एक कलेक्टर को माफिया के आँखों की किरकिरी बनना पड़ा था। और उन्हें भिंड से हटाया गया था।
और अब देवास जिले में अवैध शराब परिवहन रोकने पहुंचे टीआई की ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी गई। मामले ने प्रदेश के मुरैना, शहडोल समेत इस तरह के अन्य पुराने मामलों को फिर चर्चा में ला दिया है। मध्य प्रदेश में शराब और रेत माफिया के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। इनके हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि ये पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जान लेने से भी नहीं कतरा रहे हैं। ताजा मामला देवास का है, जहां शराब परिवहन कर रहे एक ट्रक की चेकिंग के दौरान टीआई दिलीप पुरी को कुचल दिया गया। आरोप है कि टीआई द्वारा ट्रक को रोकने के दौरान ड्राइवर ने ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी, जिससे टीआई उसकी चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। वैसे यह पहला मामला नहीं है, जब रेत या शराब के अवैध परिवहन पर कार्रवाई करने पहुंचे पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी की इस तरह से जान गई हो। आईपीएस नरेन्द्र कुमार की हत्या के बाद भी मध्य प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें रेत या शराब माफिया पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की हत्याएं या उन पर जानलेवा हमले किए गए हैं। हाल की इस घटना ने अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले मैदानी अमले की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।

मध्य प्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलने से मौत हो गई। घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 1 से 1:30 बजे इंदौर-बैतूल हाईवे पर खातेगांव और संदलपुर के बीच हुई। टीआई पुलिस टीम के साथ अवैध शराब से भरे आयशर वाहन को पकड़ने पहुंचे थे। इसी दौरान चालक ने ट्रक आगे बढ़ा दिया और उसका पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीआई के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को सब इंस्पेक्टर के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने की घोषणा की है। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को भोपाल से घटनास्थल भेजा गया। उन्होंने उज्जैन रेंज के एडीजी राकेश गुप्ता और अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। टीआई दिलीप पुरी साल 2007 बैच के सब इंस्पेक्टर थे। वे मूल रूप से धार जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम बरमंडल के निवासी थे। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने खंडवा, आलीराजपुर, बालाघाट, सतना, इंदौर और बड़वानी में सेवाएं दी थीं। कुछ महीने पहले ही उनका बड़वानी से देवास तबादला हुआ था।
उनके परिवार में पत्नी कविता, एक बेटी और एक बेटा हैं।
चिन्ता की अहम बात यही है कि क्या माफियाओं द्वारा अफसरों और कर्मचारियों की हत्याओं का दौर इसी तरह जारी रहेगा? मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता शहीद परिवार की मदद करने में दिखाई दे रही है। लेकिन क्या किसी परिवार को सरकार की ऐसी संवेदनशीलता की दरकार है? एक ही जवाब मिलेगा कि ऐसी संवेदनशीलता नहीं चाहिए सरकार, जिसमें परिवार को अपने सदस्य को खोकर अनुकंपा नियुक्ति या एक करोड़ रुपये पाना पड़े।
मुख्यमंत्री के संकल्पों और नागरिकों की उम्मीदों का मध्यप्रदेश तभी बनेगा जब इसे हर तरह के माफियाओं से मुक्ति मिलेगी और तब न किसी की होली काली होगी… और न किसी की दीवाली काली होगी।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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