फेयरवेल स्पीच में भावुक हुईं जस्टिस इंदु मल्होत्रा, नहीं पूरा कर पाईं भाषण, CJI बोले- फिर कभी सुनना चाहेंगे

सुप्रीम कोर्ट की जज इंदु मल्होत्रा शुक्रवार को अदालत में अपने आखिरी दिन बेहद भावुक हो गईं और वेयरफेल स्पीच पूरी नहीं कर पाईं। इसके चलते चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि वह चाहेंगे कि इंदु मल्होत्रा किसी और मौके पर अपने भाषण को पूरा करें। कोर्ट में अपने आखिरी दिन इंदु मल्होत्रा चीफ जस्टिस एसए बोबडे के साथ बेंच पर बैठी थीं। अटॉर्नी जनरल समेत देश के अन्य तमाम सीनियर अधिवक्ता भी उन्हें विदाई देने के लिए मौजूद थे।

इंदु मल्होत्रा 27 अप्रैल, 2018 को सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनी थीं। वह पहली ऐसी महिला अधिवक्ता थीं जो वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनींं। करीब तीन साल की सेवा के बाद वे शुक्रवार को रिटायर हो गईं। उनके पिता ओमप्रकाश मल्होत्रा भी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील थे। अंतिम दिन वह चीफ जस्टिस बोबड़े की पीठ में बैठीं। उन्हें विदाई देने के लिए अटॉर्नी जनरल समेत सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ  वकील मौजूद थे।

वेणुगोपाल बोले-अच्छे जज जल्दी रिटायर हो जाते हैं
इस मौके पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, यह एक विडंबना है कि अच्छे जज बहुत जल्दी रिटायर हो जाते हैं। न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 70 साल की जाना चाहिए। जस्टिस इंदु मल्होत्रा को यहां कम से कम 10 साल और काम करना चाहिए था। यह दुखद है कि शीर्ष कोर्ट में जज 65 साल की उम्र में ही रिटायर हो जाते हैं।

सबरीमाला केस में दिया था अलग फैसला
वेणुगोपाल ने केरल के चर्चित सबरीमाला मामले की सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जस्टिस इंदु मल्होत्रा ही वह जज थीं, जिन्होंने चार पुरुष न्यायाधीशों से अलग राय जाहिर की थी। बता दें, इस मामले में चारों पुरूष न्यायाधीशों ने महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश देने की बात कही थी, जबकि इंदु मल्होत्रा ने इसके खिलाफ राय दी थी।

रोहतगी समेत तमाम जजों ने की तारीफ
जस्टिस इंदु मल्होत्रा की मुकुल रोहतगी समेत वरिष्ठ वकीलों ने तारीफ की। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने कहा, वह हमेशा से वकीलों के लिए एक प्रेरणादायी रही हैं।

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