सुशांत सुसाइड केस -होती राजनीति

सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड का मामला एक मिस्ट्री के साथ-साथ राजनीति का अहम मुद्दा भी बन चुका है. इसी को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी मुखपत्र सामना में कई आरोप लगाए हैं. संजय राउत ने बिहार पुलिस और केंद्र पर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रचने का इल्जाम लगाया है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे बीजेपी के आदमी हैं।
वह डीआईजी रहते हुए पुलिस सेवा से वीआरएस लेकर सीधे राजनीति में कूद गए। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर बक्सर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए खड़े हो गए लेकिन भाजपा के सांसद लालमुनि चौबे की बगावत करने की धमकी दिए जाने के साथ ही चौबे की उम्मीदवारी फिर बरकरार कर दी गई। इससे गुप्तेश्वर पांडे बीच में ही लटक गए. उनकी अवस्था ‘न घर के न घाट के’ जैसी हो गई। इस तरह से राजनीति में घुसने का उनका मिशन फेल हो गया। उसके बाद उन्होंने सेवा में लौटने के लिए फिर आवेदन किया। अब वह आगामी विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाने की तैयारी कर रहे हैं।
पहले ही लिखी गई सुशांत की पटकथा’
संजय राउत ने कहा कि मुंबई पुलिस पर आरोप लगाकर बिहार सरकार ने केंद्र से सीबीआई जांच की मांग की। 24 घंटे के अंदर यह मांग मान भी ली गई। यह राज्य की स्वायत्ता पर सीधा हमला है। सुशांत का मामला कुछ और समय मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो आसमान नहीं टूट जाता लेकिन यह राजनीतिक निवेश और दबाव की राजनीति है। उन्होंने यहां तक कहा कि सुशांत प्रकरण की ‘पटकथा’ पहले ही लिखी गई थी।

‘मुंबई पुलिस का अपमान’
शिवसेना सांसद ने कहा कि मुंबई पुलिस दुनिया का सर्वोच्च जांच तंत्र है। मुंबई पुलिस दबाव का शिकार नहीं होती। यह पूरी तरह प्रफेशनल है। शीना बोरा हत्याकांड से लेकर 26/11 आतंकवादी हमले का जवाब मुंबई पुलिस ने ही दिया। सशक्त सबूत इकट्ठा करके कसाब को फांसी पर पहुंचाया। सुशांत जैसे मामले में केंद्र का हस्तक्षेप करना मुंबई पुलिस का अपमान है।

सुप्रीम कोर्ट पर भी उठाए सवाल
संजय राउत ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि सीबीआई स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है। जिनकी सरकार केंद्र में होती है, सीबीआई उनकी ताल पर काम करती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाओं पर बीते कुछ वर्षों में सवालिया निशान लग चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बीजेपी उद्धव ठाकरे की सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है। सरकार नहीं गिरा पा रहे हैं तो बदनाम किया जा रहा है।

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