
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक विदेशी अखबार के लेख का हवाला देते हुए रविवार को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा. उन्होंने आरएसएस और बीजेपी पर भारत में फेसबुक और व्हॉट्सएप पर नियंत्रण या कब्जा करने का आरोप लगाया है. बता दें कि राहुल गांधी पिछले कुछ समय से बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं. वह कोरोना वायररस, चीनी घुसपैठ और बेरोजगारी समेत विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार को आड़े हाथ ले चुके हैं. राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत में फेसबुक और व्हॉट्सएप पर बीजेपी और आरएसएस का कब्जा है. ये इसके जरिये फेक न्यूज और नफरत फैलाते हैं. वे चुनाव को प्रभावित करने में भी इनका इस्तेमाल करते हैं. आखिरकार, अमेरिकी मीडिया में फेसबुक के बारे में सच बाहर आ गया.”
राहुल गांधी ने ट्वीट कर किया हमला
इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने ट्वीट में लिखा है कि भाजपा और आरएसएस भारत में फेसबुक और व्हाट्सएप को नियंत्रित करते हैं। वे इसके माध्यम से फर्जी खबरें और नफरत फैलाते हैं और इसका इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करते हैं। आखिरकार, अमेरिकी मीडिया फेसबुक के बारे में सच्चाई के साथ सामने आया है।’
रिपोर्ट में फेसबुक पर विस्फोटक दावे
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अनखी दास ने स्टाफ से कहा कि ‘बीजेपी नेताओं की पोस्ट्स हटाने से देश में कंपनी के कारोबार पर असर पड़ेगा।’ फेसबुक के लिए यूजर्स के लिहाज से भारत सबसे बड़ा बाजार है। रिपोर्ट में टी राजा सिंह की एक पोस्ट का हवाला दिया गया था जिसमें कथित रूप से अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की वकालत की गई थी। WSJ रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक के इंटरनल स्टाफ ने तय किया था कि ‘खतरनाक व्यक्तियों और संस्थाओं’ वाली पॉलिसी के तहत राजा को बैन कर देना चाहिए।
फेसबुक ने आरोपों पर क्या कहा?
फेसबुक के प्रवक्ता एंटी स्टोन ने कहा कि दास ने राजनीतिक अस्थिरता को लेकर चिंता जाहिर की थी। हाालांकि स्टोन के मुताबिक, राजा को फेसबुक पर रहने देने के पीछे सिर्फ यही एक वजह नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, WSJ के सवाल करने के बाद राजा की कुछ पोस्ट्स को डिलीट कर दिया गया। उन्हें अब फेसबुक पर आधिकारिक अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं है। एक ईमेल में कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “हम हेट स्पीच या हिंसा केा बढ़ावा देने वाले कॉन्टेंट को प्रतिबंधित करते हैं और इस तरह की नीतियों को पूरी दुनिया में किसी की राजनीतिक स्थिति से इतर लागू करते हैं।”