
पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने की खातिर आखिरकार 88 प्रतिबंधित आतंकी समूहों और हाफिज सईद, मसूद अजहर तथा दाऊद इब्राहिम जैसे समूहों के आकाओं पर कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं. साथ ही उनकी सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया है.
मीडिया रिपोर्ट ने शनिवार को दावा किया कि पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल दिया और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक आतंकियों पर लगाम कसने के लिए कार्ययोजना लागू करने के लिए कहा था, लेकिन बाद में कोरोना महामारी के कारण इसकी समयसीमा बढ़ा दी गई.
संपत्तियां जब्त करने का आदेश
जानकारी के मुताबिक इन आतंकी संगठनों और उनके आकाओं की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश दिए गए है। पेरिस स्थित FATF ने जून, 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक कार्ययोजना लागू करने को कहा था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इस समय सीमा बढ़ा दी गई थी।
सरकार ने 18 अगस्त को दो अधिसूचनाएं जारी करते हुए 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ता और जमात-उद-दावा के सरगना सईद, जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर और अंडरवर्ल्ड डॉन इब्राहिम पर प्रतिबंधों की घोषणा की थी। इब्राहिम 1993 मुंबई बम विस्फोटों के बाद भारत के लिए सबसे वांछित आतंकवादी बन कर उभरा है।
UNSC की लिस्ट के मुताबिक प्रतिबंध
पाकिस्तानी समाचार पत्र ‘द न्यूज’ की खबर के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा जारी नई सूची के अनुपालन में आतंकवादी समूहों के 88 आकाओं और सदस्यों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अधिसूचनाओं में घोषित प्रतिबंध जमात-उद-दावा, जैश-ए-मोहम्मद, तालिबान, दाएश, हक्कानी समूह, अलकायदा और अन्य पर लगाए गए हैं।
इन आतंकवादियों पर ऐक्शन
खबर के अनुसार सरकार ने इन संगठनों और आकाओं की सभी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने और उनके बैंक खातों को सील करने के आदेश दिए है। सईद, अजहर, मुल्ला फजलुल्ला (उर्फ मुल्ला रेडियो), जकीउर रहमान लखवी, मुहम्मद यह्या मुजाहिद, अब्दुल हकीम मुराद, नूर वली महसूद, उजबेकिस्तान लिबरेशन मूवमेंट के फजल रहीम शाह, तालिबान नेताओं जलालुद्दीन हक्कानी, खलील अहमद हक्कानी, यह्या हक्कानी और इब्राहिम और उनके सहयोगी सूची में हैं।
तालिबान पर भी लगे प्रतिबंध
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के तालिबान पर भी कई वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। उसने ऐसे समय में तालिबान पर यह प्रतिबंध लगाए हैं जब अमेरिका के नेतृत्व में पड़ोसी राष्ट्र में आतंकवादी समूह के साथ शांति प्रक्रिया जारी है। प्रतिबंध में शामिल लोगों में तालिबान के मुख्य शांति वार्ताकार अब्दुल गनी बारादर और हक्कानी परिवार के कई सदस्य शामिल हैं। इनमें हक्कानी परिवार का सिराजुद्दीन भी शामिल है जो वर्तमान में हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख है और तालिबान का उप प्रमुख है।
अमेरिका ने भी पाकिस्तान को बताया था जिम्मेदार
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की ‘कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म’ में साल 2019 में पाकिस्तान की भूमिका पर खरी-खरी कही गई है। इसमें कहा गया है कि भारत को निशाना बना रहे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पाकिस्तान ने अपनी जमीन से ऑपरेट करने दिया। पाकिस्तान ने जैश के संस्थापक और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित किए जा चुके मसूद अजहर और 2008 के मुंबई धमाकों के ‘प्रॉजेक्ट मैनेजर’ साजिद मीर जैसे किसी आतंकी के खिलाफ ऐक्शन नहीं लिया। ये दोनों कथित रूप से पाकिस्तान में आजाद घूम रहे हैं।
पिछले महीने शुरू किए थे बैंक अकाउंट
इससे पहले पिछले महीने पाकिस्तान ने हाफिज सईद, जमात-उद-दवा, लश्कर-ए-तैयबा के अब्दुल सलाम भुट्टवी, हाजी अशरफ, याह्या मुजाहिद और जफर इकबाल के बंद पड़े बैंक अकाउंट वापस शुरू कर दिए थे। ये सभी UNSC की आतंकियों की लिस्ट में शामिल हैं और आतंकी फंडिंग के केस में 1-5 साल जेल की सजा काट रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक हर आतंकी ने UNSC से अपील की थी कि उसके बैंक अकाउंट खोल दिए जाएं ताकि उनके परिवारों का खर्च चल सके।