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??जय श्री राम??
?? सुप्रभातम् ? ?
?««« आज का राशिफल एवं पंचांग »»»?
कलियुगाब्द…………………..5122
विक्रम संवत्………………….2077
शक संवत्…………………….1942
रवि……………………….दक्षिणायन
मास………………………….भाद्रपद
पक्ष…………………………….शुक्ल
तिथी…………………………….षष्ठी
दोप 02.34 पर्यंत पश्चात सप्तमी
सूर्योदय……….प्रातः 06.07.15 पर
सूर्यास्त……….संध्या 06.51.52 पर
सूर्य राशि……………………….सिंह
चन्द्र राशि………………………तुला
गुरु राशि………………………..धनु
नक्षत्र………………………….स्वाति
दोप 03.18 पर्यंत पश्चात विशाखा
योग……………………………ब्रह्मा
रात्रि 12.23 पर्यंत पश्चात इंद्र
करण…………………………तैतिल
दोप 02.34 पर्यंत पश्चात गरज
ऋतु…………………………….वर्षा
दिन………………………..सोमवार
?? आंग्ल मतानुसार :-
24 अगस्त सन 2020 ईस्वी ।
⚜ तिथि विशेष –
हल छठ –
हल छठ पुत्रवती माताओं द्वारा भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को किये जाने वाला एक विशेष व्रत है जिसमे महिलाएं हल का हला कुछ नहीं प्राप्त करती है | पुत्र की लम्बी उम्र की कामना से यह व्रत किया जाता है | इस व्रत में हल की पूजा की जाती है और यदि हल उपलब्ध नहीं हो तो लकड़ी के पाटे पर चन्दन से हल बना कर उसकी पूजा भी की जा सकती है | उत्तर भारत में हल छठ का व्रत भगवान बलराम के प्राकट्य दिवस भाद्रपद कृष्ण षष्ठी पर किया जाता है | व्रती महिलाओं को व्रत कर हल छठ की कथा भी सुननी चाहिए |
हल छठ की कथा –
एक नगर में दो स्त्रियां रहती थीं। दोनों एक ही परिवार की थीं और रिश्ते में देवरानी-जेठानी लगती थीं। देवरानी का नाम सलोनी था जो बड़ी ही नेक, सदाचारिणी तथा दयालु थी। जेठानी का नाम तारा था, वह स्वभाव से बड़ी ही दुष्ट थी।
एक बार दोनों ने हल छठ का व्रत किया। विधिवत पूजन इत्यादि के बाद शाम को दोनों भोजन के लिए थालियां परोसकर ठंडी होने के लिए रखकर बाहर जा बैठीं। उस दिन सलोनी ने खीर तथा तारा ने महेरी बनाई थी। अचानक दो कुत्ते उनके घर में घुसे और भोजन खाने लगे।
अंदर से ‘चप-चप’ की आवाज आई तो दोनों अपने-अपने कक्ष के भीतर जाकर देखने लगीं। सलोनी ने कुत्ते को खीर खाते देखा तो कुछ नहीं बोली तथा बर्तन में बची हुई बाकी खीर भी उसके आगे डाल दी। लेकिन तारा थाली में मुंह मारते कुत्ते को देखते ही आग-बबूला हो गई। उसने कमरे का द्वार बंद किया और फिर डंडा लेकर कुत्ते को इतना मारा कि उसकी कमर ही तोड़ डाली। कुत्ता अधमरा होकर जैसे-तैसे जान बचाकर वहां से भागा।
दोनों कुत्ते जब बाहर मिले तो एक-दूसरे का हाल-चाल पूछने लगे। जो कुत्ता सलोनी के यहां गया था, बोला- ‘मैं जिसके कक्ष में गया था, वह स्त्री तो बड़ी भली है। मुझे खीर खाते देखकर भी उसने कुछ नहीं कहा, बल्कि बर्तन में खीर खत्म हो जाने के बाद उसने उसमें और खीर डाल दी ताकि मैं भरपेट खा सकूं। उसने तो मेरी आत्मा ऐसी तृप्त की कि मैं उसे बार-बार आशीर्वाद दे रहा हूं। मेरी तो ईश्वर से यही कामना है कि मरने के बाद मैं उसी का पुत्र बनूं और जीवनभर उसकी सेवा करके इस ऋण को चुकाता रहूं। जिस प्रकार उसने मेरी आत्मा को तृप्त किया है, उसी प्रकार मैं उसकी आत्मा को तृप्त और प्रसन्न करता रहूं। अब तुम बताओ, तुम्हारे साथ क्या बीती? लगता है, तुम्हारी तो वहां खूब पिटाई हुई है।’
दूसरा कुत्ता बड़े ही दुःखी स्वर में बोला- ‘तुम्हारा अनुमान ठीक ही है भाई। आज से पहले मेरी ऐसी दुर्गति कभी नहीं हुई थी। पहले तो थाली में मुंह मारते ही सारा जबड़ा हिल गया। फिर भी भूख से परेशान होकर मैंने दो-चार कौर सटके ही थे कि वह दुष्ट आ गई और कमरा बंद करके डंडे से उसने मुझे इतना मारा कि मेरी कमर ही तोड़ डाली। मैं तो ईश्वर से यही निवेदन करता हूं कि अगले जन्म में मैं उसका पुत्र बनकर उससे बदला चुकाऊं। जैसे उसने मार-मारकर मेरी कमर तोड़ी है, वैसे ही भीतरी मार से मैं भी उसका हृदय और कमर तोड़ डालूं।’
कहते हैं कि बेजुबान की बद्दुआ बहुत बुरी होती है। इसे दैवयोग ही कहा जाएगा कि दूसरा कुत्ता शीघ्र ही मर गया और मरकर उसने तारा के घर में ही पुत्र रूप में जन्म लिया। पुत्र रत्न पाकर तारा बहुत खुश हुई। पुत्र को लेकर उसने अपने मन में बड़े-बड़े मंसूबे बांध लिए।
मगर दूसरे दिन ही जब घर-घर में हल षष्ठी का पूजन हो रहा था, वह लड़का मर गया। तारा की तो जैसे दुनिया ही उजड़ गई। वह दहाड़े मार-मारकर रोने लगी। मगर किया क्या जा सकता था? जैसे-तैसे उसने अपने सीने पर सब्र का पत्थर रख लिया। फिर तो हर वर्ष उसके लड़का होता और हल षष्ठी के दिन मर जाता। जब तीन-चार बार ऐसा हुआ तो तारा को इस पर कुछ संदेह हुआ कि आखिर मेरा लड़का हल षष्ठी को ही क्यों मरता है?
फिर एक रात सपने में उसे वही कुत्ता दिखाई दिया। उसने कहा- ‘मैं ही बार-बार तेरा पुत्र होकर मृत्यु को प्राप्त हो रहा हूं। तूने मेरे साथ जो व्यवहार किया था, मैं उसी का बदला चुका रहा हूं।’
तारा बहुत दुःखी हुई और उसने अपने किए का प्रायश्चित करने का उपाय पूछा। तब उस कुत्ते ने बताया- ‘अब से हल छठ के व्रत में हल से जुता हुआ अन्न तथा गाय का दूध-दही न खाना। होली की भुनी हुई बाल तथा होली की धूल आदि हलछठ-पूजा में चढ़ाना। तब कहीं मैं तेरे घर में आकर जीवित रहूंगा। पूजा के समय यदि तारक गण छिटकें तो तू समझना कि अब मैं यहां जीवित रहूंगा।
तारा ने वैसा ही किया और इस हल षष्ठी के व्रत के प्रभाव से उसकी संतान जीने लगी। तभी से संतान कामना और सुख-सौभाग्य के लिए यह व्रत किया जाता है।
⚜ अभिजीत मुहूर्त :-
प्रातः 12.03 से 12.56 तक ।
?? राहुकाल :-
प्रात: 07.44 से 09.19 तक ।
? उदय लग्न मुहूर्त :-
सिंह
05:37:27 07:49:17
कन्या
07:49:17 09:59:56
तुला
09:59:56 12:14:34
वृश्चिक
12:14:34 14:30:44
धनु
14:30:44 16:36:22
मकर
16:36:22 18:23:31
कुम्भ
18:23:31 19:57:04
मीन
19:57:04 21:28:16
मेष
21:28:16 23:08:59
वृषभ
23:08:59 25:07:36
मिथुन
25:07:36 27:21:17
कर्क
27:21:17 29:37:27
? दिशाशूल :-
पूर्व दिशा- यदि आवश्यक हो तो दर्पण देखकर यात्रा प्रारंभ करें ।
☸ शुभ अंक………………..6
? शुभ रंग………………सफ़ेद
✡ चौघडिया :-
प्रात: 06.09 से 07.44 तक अमृत
प्रात: 09.18 से 10.53 तक शुभ
दोप. 02.02 से 03.37 तक चंचल
अप. 03.३७ से 05.11 तक लाभ
सायं 05.11 से 06.46 तक अमृत
सायं 06.46 से 08.11 तक चंचल ।
? आज का मंत्र :-
।। ॐ गजवक्त्राय नम: ।।
? संस्कृत सुभाषितानि :-
वृत्तं यत्नेन संरक्षेत्वित्तमायाति याति च ।
अक्षीणो वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः ॥
अर्थात :-
चारित्र्य का रक्षण करना चाहिए । धन तो आता है और जाता है । वित्त से क्षीण होनेवाला क्षीण नहीं है, पर शील से क्षीण होनेवाला नष्ट होता है ।
? आरोग्यं :-
पिप्पली के विभिन्न औषधीय गुण –
१- पिप्पली को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है |
२- पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर ३ ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द ठीक होता है |
३- पिप्पली के १-२ ग्राम चूर्ण में सेंधानमक,हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांत पर लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है |
४- पिप्पली,पीपल मूल,काली मिर्च और सौंठ के समभाग चूर्ण को २ ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ चाटने से जुकाम में लाभ होता है |
५- पिप्पली चूर्ण में शहद मिलाकर प्रातः सेवन करने से,कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियमित होती है तथा हृदय रोगों में लाभ होता है |
⚜ आज का राशिफल :-
? राशि फलादेश मेष :-
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
मन में उत्साह रहेगा, जिससे कार्य की गति बढ़ेगी। आपके कार्यों को समाज में प्रशंसा मिलेगी। भागीदारी में आपके द्वारा लिए गए निर्णयों से लाभ होगा। पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी।
? राशि फलादेश वृष :-
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
यात्रा का शुभ योग होने के साथ ही कठिन कार्य में भी सफलता मिल सकेगी। रिश्तेदारों से संपत्ति संबंधी विवाद हो सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। व्यापार-नौकरी में लाभ होगा।
?? राशि फलादेश मिथुन :-
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
किसी के भरोसे न रहकर अपना कार्य स्वयं करें। महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप से नुकसान की आशंका है। कष्ट, भय, चिंता व बेचैनी का माहौल बन सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। परिवार में तनाव रहेगा। व्यापार-व्यवसाय मध्यम रहेगा।
? राशि फलादेश कर्क :-
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
व्यवसाय ठीक चलेगा। अच्छे लोगों से भेंट होगी जो आपके हितचिंतक रहेंगे। योजनाएं फलीभूत होंगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। नौकरी में पदोन्नाति के योग हैं। आलस्य से बचकर रहें। परिवार की मदद मिलेगी।
? राशि फलादेश सिंह :-
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
अर्थ संबंधी कार्यों में सफलता से हर्ष होगा। सुखद भविष्य का स्वप्न साकार होगा। विचारों से सकारात्मकता बढ़ेगी। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। दुस्साहस न करें। व्यापार में इच्छित लाभ होगा।
??♀️ राशि फलादेश कन्या :-
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हल हो सकेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। भ्रम की स्थिति बन सकती है। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। रुका धन मिलेगा।
⚖ राशि फलादेश तुला :-
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
मितव्ययिता को ध्यान में रखें। कुटुंबियों से संबंध सुधरेंगे। शत्रुओं से सावधान रहें। व्यापार लाभप्रद रहेगा। खर्चों में कमी करें। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। सश्रम किए गए कार्य पूर्ण होंगे।
? राशि फलादेश वृश्चिक :-
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बचें। कार्य-व्यवसाय में लाभ होने की संभावना है। दांपत्य जीवन में अनुकूलता रहेगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य बनेंगे। सामाजिक समारोहों में भाग लेंगे। सुकर्मों के लाभकारी परिणाम मिलेंगे।
? राशि फलादेश धनु :-
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
नेत्र पीड़ा हो सकती है। अधिकारी वर्ग विशेष सहयोग नहीं करेंगे। ऋण लेना पड़ सकता है। यात्रा आज नहीं करें। परिवार के कार्यों को प्राथमिकता दें। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। आपकी बुद्धिमत्ता सामाजिक सम्मान दिलाएगी।
? राशि फलादेश मकर :-
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
अपने व्यसनों पर नियंत्रण रखें। पत्नी के बतलाए रास्ते पर चलने से लाभ की संभावना बनती है। यात्रा से लाभ। वाहन-मशीनरी खरीदी के योग हैं। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। जोखिम न लें। व्यवसाय में अड़चनें आएंगी।
? राशि फलादेश कुंभ :-
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
व्यावसायिक योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा। परिवार की चिंता रहेगी। आय से व्यय अधिक होंगे। फालतू खर्च होगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। अजनबियों पर विश्वास से हानि हो सकती है।
? राशि फलादेश मीन :-
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। गर्व-अहंकार को दूर करें। राजनीतिक व्यक्तियों से लाभकारी योग बनेंगे। रोजगार में वृद्धि होगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। मनोबल बढ़ने से तनाव कम होगा। साझेदारी में नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकेंगे।
☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।
।। ? शुभम भवतु ? ।।
???? भारत माता की जय ??