सिंधिया पहुंचे नागपुर

 

 

कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मुख्यालय नागपुर पहुंचे। बीजेपी ज्वाइन करने के करीब 5 महीने बाद सिंधिया पहली बार संघ कार्यालय नागपुर पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ बलिराम केशव हेडगेवार के निवास स्थान पर गए। वहाँ से वे रेशमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर पहुंचे। हेडगेवार स्मृति मंदिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ बलिराम केशव हेडगेवार और गुरु गोलवलकर का समाधि स्थल है। यहां आकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक निवास स्थान नहीं बल्कि प्रेरणा स्थल है, यह स्थान देश सेवा के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। यहां आकर राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरणा मिलती है।

कहते हैं नागपुर संघ के गढ़ में नतमस्तक हुए बिना किसी भी नेता का बीजेपी में आना पूरा नहीं होता। सिंधिया का नागपुर जाना और हेगड़ेवार समेत संघ के नेताओं को धोक देना इस बात का सबूत है कि उन्होंने बीजेपी को मन मस्तिष्क में बिठाने का भरपूर प्रयास किया है। वैसे उनकी दादी मां यानी राजमाता विजयाराजे सिंधिया का संघ से गहरा नाता रहा। संघ उनके इस योगदान को हमेशा याद भी करता रहा है। लेकिन माधवराव सिंधिया का कांग्रेस से जुड़ाव और अब उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अरसे बाद पुन: संघ की शरण में लौटना, माना जा रहा है कि अपनी खोयी जमीन वापस पाने का प्रयास है। जड़ों की तरफ लौटने का प्रयास है।

स्थानीय समाचारपत्र, लोकमत के अनुसार सिंधिया नागपुर में एक दिन के दौरे पर हैं। इस दौरान जब उनसे कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर जारी विवाद पर प्रश्न हुआ तो उन्होंने कि, मैं बीजेपी कार्यकर्ता हूं, किसी दूसरी पार्टी के अंदरूनी मसले पर बोलना ठीक नहीं है। गौरतलब है कि जब उन्होंने पार्टी छोड़ी थी तब भी कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठे थे और राहुल गांधी ने कहा था कि सिंधिया एकमात्र ऐसे कांग्रेस नेता थे जो उनके घर में बेरोकटोक आ जा सकते थे। 11 मार्च को सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।

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