किसानों के मामले में कृषि मंत्री को बताया, समाधान नहीं हुआ, सिंधिया खेमे के सिलावट ने CM को लिखा पत्र

सिंधिया खेमे के सबसे खास मंत्री तुलसीराम सिलावट की भी सुनवाई नहीं हो रही है। मंत्री ने अब सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी है। मामला सांवेर सहित इंदौर के 180 से ज्यादा किसानों के बकाया करीब ढाई करोड़ के भुगतान से जुड़ा है। मंत्री ने चिट्‌ठी कहा है कि कृषि मंत्री कमल पटेल को भी पत्र लिख चुका हूं, पर किसानों का भुगतान अभी नहीं हुआ है।

चिट्‌ठी सामने आने पर मंत्री सिलावट ने कहा कि जल्द ही किसानों को साथ ले जाकर मुख्यमंत्री से भी मिलूंगा। इधर, कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि ऐसे किसी पत्र की जानकारी उन्हें नहीं है। इस मामले को जल्द ही दिखवाता हूं। किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों को पैसा दिलाया जाएगा। दरअसल, चार साल पुराना मामला चुनावी साल में नेताओं के लिए सिरदर्द बन रहा है।

चार साल से अटका हुआ है किसानों का पेमेंट

सांवेर विधानसभा सहित जिले के 186 किसानों का मंडी व्यापारियों पर करीब पौने तीन करोड़ रुपए बकाया है। लक्ष्मीबाई नगर अनाज मंडी इंदौर में एक व्यापारी परिवार ने चार साल पहले किसानों से हजारों क्विंटल गेहूं खरीदा था, लेकिन भुगतान किए बिना ही भाग गए। एफआईआर हुई, लेकिन रिकवरी नहीं हो सकी। संपत्ति नीलामी के जरिए मात्र 74 लाख रुपए मिले, बाकी दो करोड़ किसानों को आज तक नहीं मिल सका है।

किसान चाहते हैं कि मंडी व्यापारी लाइसेंसी होते हैं तो मंडी निधि से उनका भुगतान कराया जाए। बाद में उसका एडजस्ट व्यापारियों से वसूलकर करते रहें। ऐसा हरदा में हो चुका है, लेकिन सरकार और मंडी बोर्ड ने चार साल में भी इस पर कोई फैसला नहीं किया है। अब सिलावट ने एक बार फिर चुनावी साल में यह बात उठाई है। पीड़ित किसानों का कहना है कि तुलसी सिलावट इससे पहले भी 2019 में कांग्रेस की सरकार में मंत्री रहते हुए यह पत्र लिख चुके हैं, लेकिन न तब कुछ हुआ, न अब हो रहा है।

हालांकि, सूत्रों का दावा है कि ये अकेले इंदौर जिले का मामला नहीं है। प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में किसानों का पैसा इसी तरह से व्यापारियों ने अटका रखा है। और सरकार सभी जगह किसानों को मंडी निधि से पैसा देने की तैयारी में है।

कृषि मंत्री बोले- मैं खुद दिखवाऊंगा ये मामला

कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ है। मुझे किसी पत्र की जानकारी नहीं है, लेकिन फिर भी पूरे को मामले खुद ही समझ कर जल्द ही दिखवाता हूं। व्यापारियों ने अगर किसानों के साथ धोखाधड़ी की है तो जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई करवाएंगे और किसानों को पूरा पैसा दिलवाएंगे।

क्या बिगड़ गई है दोनों सीनियर मंत्रियों की जुगलबंदी?

सिंधिया खेमे के मंत्री सिलावट को कृषि मंत्री कमल पटेल के विभाग से जुड़े मामले में सीधे शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखना कई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। दरअसल, दोनों ही शिवराज सरकार के सीनियर मंत्री माने जाते हैं। यह भी बता दें कि मंत्री सिलावट हरदा के प्रभारी मंत्री हैं, जहां से कमल पटेल आते हैं। और तो और, जब कमलनाथ सरकार के तख्ता पलट के बाद शिवराज सिंह चौहान सत्ता में आए तो गिनती के पांच मंत्रियों को अपने साथ शपथ दिलाई थी। इनमें ये दोनों मंत्री पटेल और सिलावट शामिल थे। भाजपा के सूत्रों का तो यह भी दावा है कि अपने गृह जिले हरदा का प्रभारी मंत्री बनाने के लिए कमेल पटेल ने ही मंत्री तुलसी सिलावट का नाम सुझाया था।

कैलाश विजयवर्गीय भी लिख चुके हैं मुख्यमंत्री को चिट्ठी

इस पूरे मामले को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी 6 जून 2023 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसानों के पैसे मंडी निधि से देने से की बात कह चुके हैं। विजयवर्गीय ने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि इस मामले को मुख्यालय स्तर पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे किसानों में भारी असंतोष और आक्रोश है। वहीं मेधा पाटकर ने भी 9 मई 2022 को भी मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र लिखा था।

जीतू पटवारी ने भी लिखा था पत्र, लेकिन फिर सरकार ही गिर गई

पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने भी 9 जून 2019 को तब के कांग्रेस सरकार के कृषि मंत्री सचिन यादव को पत्र लिखकर किसानों को भुगतान देने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि उस समय भुगतान देने संबंधी सभी कार्रवाई हो चुकी थी, लेकिन किसानों को पैसा मिलता इससे पहले ही कांग्रेस की सरकार गिर गई।

कांग्रेस बोली- श्रीमंत के खिलाफ भाजपा लामबंद हो गई

मंत्री सिलावट के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अमित चौरसिया ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, शिवराज जी क्या सिंधिया समर्थक मंत्रियों की आपकी सरकार में पूछ परख खत्म हो गई है या फिर किसानों के प्रति आपकी हमदर्दी महज दिखावा है। तुलसी सिलावट अपनी विधानसभा के पीड़ित किसानों के मुआवजे के लिए कमल पटेल सहित आप से विगत एक वर्ष से गुहार लगा रहे हैं। यह पत्र बता रहा है कि सरकार और संगठन में अंतर्कलह का भीषण द्वंद्व छिड़ा हुआ है। श्रीमंत के खिलाफ भाजपा लामबंद हो गई है।

पांच व्यापारियों पर दर्ज हुई थी FIR, सभी फरार थे

2019 में इंदौर की लक्ष्मीबाई नगर कृषि उपज मंडी में व्यापारी हरिनारायण खंडेलवाल, राजू खंडेलवाल, माणक खंडेलवाल, गिरधर खंडेलवाल और संजू खंडेलवाल ने पांच व्यापारिक फर्म बनाई। इन फर्मों में भागीरथ धन्नालाल, हरि पल्सेस, अपूर्व ट्रेडिंग, हिंदुस्तान आर्गैनिक और हजारीलाल एंड कंपनी शामिल हैं।

व्यापारी परिवार ने इन फर्मों के अलावा अपने नौकर के नाम से एक और फर्म राधेश्याम ट्रेडिंग कंपनी बना रखी थी। इस फर्म के जरिए वह सांवेर क्षेत्र के किसानों से हजारों क्विंटल गेहूं खरीदा गया था। कुछ किसानों को मंडी के प्रवेश-पत्र दिए गए तो कुछ को राशि के चेक बनाकर दिए। मंडी के बड़े व्यापारी होने के कारण किसान इस उम्मीद में रहे कि उपज का भुगतान हो जाएगा, लेकिन जब दिन के बाद महीने-दो महीने होने लगे तो किसान घबराए। बार-बार व्यापारियों के पास जाने के बाद भी केवल आश्वासन ही मिले तो किसानों ने मंडी समिति और कलेक्टर को शिकायत की।

अपर कलेक्टर, एसडीएम और मंडी अधिकारियों ने व्यापारियों और किसानों की कई बैठकें कराई, लेकिन व्यापारी हर बार आश्वासन देकर राशि देने से पीछे हट जाते। आखिर मंडी अधिकारियों ने व्यापारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR दर्ज होते ही व्यापारी घर छोड़कर फरार हो गए।

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