महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर ने 4 तरीकों से जुटाई ब्लैकमनी! डेढ़ महीने की सीक्रेट जांच के बाद लोकायुक्त का छापा, आय से 241% अधिक संपत्ति; जिम में ग्राहक बनकर पहुंचे थे अफसर

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक (जॉइंट डायरेक्टर) लक्ष्मी नारायण कंडवाल पर मिड-डे मील, आंगनवाड़ी मरम्मत, ठेकेदारों के भुगतान और विभागीय मामलों में भ्रष्टाचार कर करोड़ों रुपए की अवैध संपत्ति जुटाने के आरोप हैं। इंदौर लोकायुक्त टीम ने 10 जून को उनके घर और कारोबारी ठिकानों पर छापा मारा, जहां आधुनिक जिम और सुपर मार्केट मिला।

जांच में उनकी आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने का दावा किया गया है। लोकायुक्त ने करीब डेढ़ महीने तक जांच के बाद यह कार्रवाई की।

पद के प्रभाव का इस्तेमाल कर बनाई संपत्ति महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक का पद संभाग स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है। संभाग के सभी जिलों में महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और पोषण से जुड़ी योजनाओं की निगरानी और संचालन इसी पद के जरिए होता है।

इस पद के तहत सरकारी फंड का वितरण, टेंडर मंजूरी, ठेकेदारों का भुगतान, आंगनवाड़ी भोजन व्यवस्था, पोषण योजनाओं की निगरानी, महिला सुरक्षा कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटर संचालन और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी होती है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंडवाल ने इन्हीं अधिकारों का इस्तेमाल अवैध संपत्ति जुटाने में किया।

कंडवाल ने अपने सेवाकाल का बड़ा हिस्सा संभाग स्तर के पदों पर बिताया। लोकायुक्त का मानना है कि इसी दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई। फिलहाल, संपत्ति का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके बाद जांच के दूसरे चरण में आय के स्रोतों की पड़ताल होगी।

जांच में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के चार तरीके

लोकायुक्त जांच में कथित अनियमितताओं के चार प्रमुख पहलुओं का जिक्र किया गया है…

  1. बच्चों के भोजन से जुड़ी अनियमितताएं: जांच में आशंका जताई गई है कि आंगनवाड़ी भोजन की गुणवत्ता रिपोर्ट में हेरफेर की गई। स्वयं सहायता समूहों को भुगतान संयुक्त संचालक स्तर से मंजूर होता था। आरोप है कि खराब गुणवत्ता वाले भोजन की शिकायतों पर कार्रवाई के बजाय सांठगांठ की गई।
  2. निर्माण और मरम्मत कार्यों में गड़बड़ी: जांच एजेंसियों के अनुसार आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण, मरम्मत और किराया निर्धारण से जुड़े कामों में ठेकेदारों से कथित कमीशन लिया गया और बिल पास करने के बदले रकम वसूली गई।
  3. विभागीय जांचों में लेन-देन के आरोप: संयुक्त संचालक स्तर पर विभागीय शिकायतों और जांचों का निपटारा किया जाता है। आरोप है कि जांच मामलों में राहत देने और कार्रवाई प्रभावित करने के बदले लेन-देन किया गया।
  4. छात्रावास और वन स्टॉप सेंटर संचालन में अनियमितताएं: लोकायुक्त को आशंका है कि छात्रावासों और वन स्टॉप सेंटर में नियुक्तियों और संचालन संबंधी फैसलों में नियमों का पालन नहीं किया गया और व्यक्तिगत हित साधे गए।

डेढ़ महीने तक चली गोपनीय जांच लोकायुक्त को करीब दो महीने पहले शिकायत मिली थी कि संयुक्त संचालक कंडवाल ने पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति अर्जित की है। एसपी राजेश सहाय के निर्देशन में निरीक्षक आशुतोष मिठास ने सीमित टीम के साथ गोपनीय जांच शुरू की। जांच के दौरान विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाई गई।

संदेह से बचने के लिए अन्य अधिकारियों की जानकारी भी मांगी गई। इसके बाद परिवार और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई।

कंडवाल के सुपर मार्केट में जांच करती लोकायुक्त की टीम।

ग्राहक बनकर जिम पहुंची जांच टीम जांच के दौरान लोकायुक्त को कंडवाल के घर में दो मंजिला जिम और सुपर मार्केट की जानकारी मिली। वहां लगे उपकरणों और निवेश का आकलन करने के लिए अधिकारियों ने अलग तरीके से जानकारी जुटाई। जांच अधिकारी ग्राहक बनकर जिम पहुंचे और सदस्यता व सुविधाओं की जानकारी ली।जांच में अधिकारियों ने पाया कि जिम में आधुनिक मशीनें लगी थीं और भवन के निचले हिस्से में सुपर मार्केट चल रहा था। प्रारंभिक आकलन में मशीनों की कीमत 40 लाख रुपए से अधिक बताई गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *