सरकार की ठसक और जनता की लाचारी का फर्क समझिए.. सिर्फ 10 सेकंड में – देखे VIDEO

इस बेचारे ने VIP के काफिले के बीच में आने की हिम्मत कर दी –सरकार की ठसक और जनता की लाचारी का फर्क समझिए  .क्या यह हर उस आदमी की कहानी नहीं है जो VIP कल्चर का शिकार बनता है और उस समय जब कोई VIP,यानी मंत्री ,मुख्यमंत्री ,कोई नेता शहर के किसी मार्ग से गुजरने वाले होते है .यहाँ गुजरने का अर्थ कुछ और मत लगा लीजियेगा यहाँ मतलब यह है कि हम जिस सड़क का टेक्स देते है ,जो सबके लिए बनी होती है उस पर जब कोई बड़ा नेता एक बेवजह के बड़े काफिले के बीच में सुपरफास्ट भागती चमचमाती कार में भागने वाला मतलब निकलने वाला होता है ,तब आम आदमी कीड़े मकोड़े की तरह दिखाई देता है ड्युटी पर तैनात पुलिसवाले को .वह इतना खौफजदा दिखाई देता है कि उसका बस चले तो वह बीच में आनेवाले को हंटर से धो डाले .या पैरों से कुचल मसल कर रास्ते से हटा दे ,अक्सर एक काफिले के गुजरने के लगभग पंद्रह मिनिट पहले से दोनों तरफ के रास्ते रोक दिए जाते है .टैफिक में फिर कोई बीमार हो .कोई प्रसूता हो ,कोई डिलीवरी के लिए दर्द से पीड़ित प्रेग्नेंट महिला हो .स्कूल बस में गर्मी से बेहाल छोटे छोटे बच्चे हो .किसी की जान कीमती नहीं होती भारत में उस VIP के काफिले के आगे .ये बेचारा साइकल वाला किस खेत की मूली है जो पुलिस वाला ससम्मान उसे साइड करता .उसके ऊपर जरुर को बंदूक तनी होती होगी अप्रत्यक्ष और वो उस तनाव में जनता को अपना शिकार बना बैठता है .एक व्यक्ति जो हमारे ही वोट से उस पद तक जाता है जहाँ वह VIP हो जाता है और कुछ देर के लिए हम जैसे संदिग्ध .हमारे सम्मान की भी कई बार पुलिसिया भाषा में धज्जियाँ उड़ जाती है “हटा गाडी ,चल साइड हो .ये बीच में कहाँ से आ गया , हटाओ इसको “बेइज्जत होता आम आदमी सोचता है क्या करूँ ?कहाँ छुप जाऊं .यह सब केवल भारत में ही होता है .विदेशों में नहीं .ना मुख्यमंत्री ,ना प्रधान मंत्री वहां सब सामान्य चलते है सड़क पर लब्बोलुआब यह कि इस वीडियो को देखिये और अपनी लाचारी को कोसिये ?कभी हम उस काफिले को और कभी हम अपनी ओकात तोलते है .?

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