
अपने खर्च में कमी लाने के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना (वीआरएस) लाने पर विचार कर रहा है। इसके योजना के लिए 30,190 कर्मचारी योग्य हैं। देश के सबसे बड़े बैंक में वर्तमान में 2.49 लाख कर्मचारी हैं जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.57 लाख था।
सूत्रों के अनुसार, वीआरएस के लिए एक मसौदा योजना तैयार की गई है और बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है। यह प्रस्तावित योजना नई वीआरएस योजना है, जिसका उद्देश्य मानव संसाधन व लागतों का अनुकूलन करना है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई द्वारा देखी गई मसौदा योजना के अनुसार, यह योजना अपने करियर में संतृप्ति के स्तर तक पहुंच चुके कर्मचारियों को एक विकल्प और एक सम्मानजनक निकास मार्ग प्रदान करेगा। इसमें ऐसे कर्मचारी हो सकते हैं, जो अपनी परफॉर्मेंस के चरम पर ना हों, या कोई व्यक्तिगत मुद्दा हो या वे बैंक के बाहर अपने पेशेवर या व्यक्तिगत जीवन को आगे बढ़ाना चाहते हों।
सूत्रों के अनुसार, यह योजना उन सभी स्थायी अधिकारियों व स्टाफ के लिए है, जिन्होंने सेवा के 25 वर्ष पूरे कर लिये हैं या 55 साल की आयु पूरी कर ली है। यह योजाना एक दिसंबर को खुलेगी और फरवरी के आखिर तक जारी रहेगी। वीआरएस के लिए आवदेन केवल इस अवधि के दौरान ही लिये जाएंगे। प्रस्तावित पात्रता मानदंड के अनुसार, कुल 11,565 अधिकारी और 18,625 कर्मचारी सदस्य योजना के लिए पात्र होंगे।
सूत्रों ने बताया कि योजना के तहत अगर 30 फीसद योग्य कर्मचारी रिटायरमेंट को चुनते हैं, तो बैंक को इससे कुल 1,662.86 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह अनुमान जुलाई 2020 के वेतन पर आधारित है।
सूत्रों ने बताया, ‘वह स्टाफ सदस्य जिसका विआरएस के तहत रिटायरमेंट का निवेदन स्वीकार किया जाएगा, उसे सेवा की शेष अवधि के लिए वेतन की 50 फीसद राशि अनुग्रह राशि के रूप में प्रदान की जाएगी। इसमें शर्त लागू रहेगी।’ वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, पेंशन, प्रोविडेंट और मेडिकल बेनिफिट्स जैसे अन्य लाभ भी दिए जाएंगे।