WHO के चीफ़ ने फिर किया चीन का बचाव कहा ……..

इस बात से हर कोई वाकिफ है कि कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई है. अमेरिकी सहित कई देश इसके लिए चीन को ही जिम्मेदार ठहराते हैं. लेकिन चीन हमेशा इससे बात से इंकार करता रहा है कि कोरोना उनकी वजह से फैला है. यही नहीं, चीन का साथ कहीं ना कहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी देता रहा है. दरअसल, इस बारे में जब भारत के एक पत्रकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) चीफ टेड्रोस ऐडनम से सवाल किया कि क्या कोरोना वायरस चीन से आया है, तो उन्होंने एक बार फिर चीन का बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से आया है.

प्राकृतिक रूप से आया वायरस’
WHO चीफ शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान भारत के पत्रकार ने उनसे उन दावों के बारे में सवाल किया कि कोरोना वायरस चीन के वुहान की वायरॉलजी लैब में पैदा हुआ है। इस पर उन्होंने कहा, ‘WHO विज्ञान और सबूतों में विश्वास करता है। मीडिया इंटरव्यू में किसी ने कहा कि वायरस लैब से आया है लेकिन जहां तक हमारी बात है, जितने प्रकाशन हमने देखे हैं उनमें कहा गया है कि वायरस प्राकृतिक रूप से आया है।’

 

‘विज्ञान का पालन करें’
ऐडनम ने आगे कहा, ‘अगर कोई चीज इसे बदलने वाली है तो वह साइंटिफिक प्रक्रिया के जरिए आएगी। जो भी मीडिया में आकर कुछ कहता है, हम कुछ नहीं कह सकते। हम उनसे कहेंगे कि साइंटिफिक प्रक्रिया का पालन करें।’ बता दें कि चीन से जान बचाकर भागीं वैज्ञानिक ली-वेंग यान ने दावा किया है कि वायरस चीन की लैब में ही पैदा हुआ और वहीं से फैला।

 

चीन से भागीं वैज्ञानिक का दावा
डॉ. यान ने कहा था, ‘पहली बात तो यह है कि वुहान के मीट मार्केट को पर्दे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और वायरस प्राकृतिक नहीं है।’ जब उनसे पूछा गया कि वायरस कहां से आया तो उन्होंने कहा कि वुहान के लैब से। उन्होंने कहा, ‘जीनोम सीक्वेंस इंसानी फिंगर प्रिंट जैसा है। इस आधार पर इसकी पहचान की जा सकती है।’ यान ने कहा था कि वह सबूतों के आधार पर बता सकती हैं कि कैसे यह चीन की लैब से आया है।

वैक्सीन पर भी WHO का चीन को सपॉर्ट
वहीं, चीन के स्वास्थ्य अधिकारी ने दावा किया है कि देश की कोरोना वैक्सीनों को तीसरे चरण का ट्रायल खत्म होने से पहले लोगों को देने के फैसले का WHO ने समर्थन किया था। अधिकारी के मुताबिक इमर्जेंसी प्रोग्राम के तहत एक्सपेरिमेंटल वैक्सीनें ऐसे लोगों को दिए जाने का फैसला किया गया था जिन्हें वायरस से इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा था। इसके बारे में जब WHO को जानकारी दी गई तो उसने सपॉर्ट किया था।

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