शूटिंग शुरू होते ही विवादों में घिरी अक्षय कुमार की फिल्म Jolly LLB 3, जानिए वजह

नई दिल्ली (New Delhi)। अक्षय कुमार (Akshay Kumar)-अरशद वारसी (Arshad Warsi ) स्टारर जॉली एलएलबी 3 फिल्म (Jolly LLB 3 film) की शूटिंग शुरू होने के साथ ही विवादों में फंस गई है. फिल्म के खिलाफ अजमेर अदालत में शिकायत (Complaint in Ajmer court) दर्ज कराई गई है. शिकायत में लिखा गया है कि जॉली एलएलबी 3 फिल्म में न्यायिक गरिमा को धूमिल करने की कोशिश की गई है. ये शिकायत जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष चंद्रभान की ओर से दायर की गई है. इस पर कल यानी मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई होनी है।

जॉली एलएलबी 3 के खिलाफ दर्ज शिकायत

अजमेर जिला बार एसोसिएशन ने सिविल न्यायाधीश अजमेर उत्तर की अदालत में बॉलीवुड फिल्म जॉली एलएलबी—3 की शूटिंग को रोकने की अर्जी लगाई है. साथ ही बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने निर्माता, निर्देशक और एक्टर्स को वकील और जजों का मजाक उड़ाने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायतकर्ताओं का चाहते हैं कि मेकर्स इसे बनाना बंद करें, इसके लिए कोर्ट से नोटिस जारी करने का अनुरोध किया गया है. बताया जा रहा है कि मामले में कल सुनवाई होगी।

जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राठौड़ ने बताया कि जॉली एलएलबी के पहले और दूसरे पार्ट को देखते हुए उन्होंने ये फैसला लिया है. ऐसा लगता है कि फिल्म निर्माता और निर्देशक समेत खुद एक्टर्स और बाकी कलाकार भी देश के संविधान के प्रमुख स्तंभ न्यायपालिका की गरिमा और प्रतिष्ठा का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करते. राठौड़ ने कहा कि वर्तमान में अजमेर के डीआरएम ऑफिस सहित आस पास के गांवों और क्षेत्रों में जॉली एलएलबी 3 की शूटिंग चल रही है, जो कि आगे कई दिनों तक जारी रहने वाली है. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान भी निर्माता निर्देशक वकीलों और जजों सहित न्यायपालिका की छवि, प्रतिष्ठा, गरिमा के प्रति जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे है।

वकीलों की गरिमा के खिलाफ है फिल्म

बार अध्यक्ष ने कहा कि अभिनेता समाज के लिए आइडल होते हैं. उनके किए कामों को समाज ज्यों का त्यों स्वीकार करता है यहां तक कि अपना विचार भी उन फिल्मों को देखकर उनके किरदारों में स्वयं को कहीं खोजने लगता है. बार अध्यक्ष के मुताबिक शूटिंग के दौरान वकीलों और जजों को इस तरह से दिखाया जा रहा है, जो आमतौर पर कहीं भी नहीं होता है. ऐसा मजाकिया ही नहीं बल्कि अशोभनीय और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा, जज और वकीलों की गरिमा और छवि को धूमिल करने वाला है।

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