हैदराबाद के टोलीचौकी में बने दो मंजिला आलीशान मकान के गेट पर ताला लटका है। तेलंगाना ATS की टीम घर के आसपास मौजूद है। पड़ोसी खामोश हैं और गली में सन्नाटा पसरा है। इस घर में साजिद अकरम का परिवार रहता है। साजिद और उसके बेटे नवीद ने 14 दिसंबर को ऑस्ट्रेलिया की राजधानी सिडनी में बॉन्डी बीच पर फेस्टिवल मना रहे 15 यहूदियों की हत्या कर दी थी।
खबरें आई थीं कि साजिद पाकिस्तानी मूल का है, लेकिन 16 दिसंबर को तेलंगाना पुलिस ने बताया कि वो हैदराबाद का रहने वाला है और 27 साल पहले ऑस्ट्रेलिया चला गया था। हैदराबाद में साजिद के घर पहुंचा।

साजिद का परिवार इसी घर में रहता है। फिलहाल परिवार ने घर छोड़ दिया है।
साजिद का भारतीय कनेक्शन
साजिद ने हैदराबाद से बी. कॉम की पढ़ाई की थी। नवंबर 1998 में स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया चला गया। वहां उसने इटली मूल की वेनेरा ग्रोसो से शादी की और वहीं बस गया। उसके बेटे नवीद का जन्म ऑस्ट्रेलिया में ही हुआ। साजिद ने 2001 में पार्टनर वीजा में ट्रांसफर करा लिया था।
साजिद के पिता सऊदी अरब में रहते थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने हैदराबाद में एक अपार्टमेंट खरीदा था। इसी दौरान साजिद ऑस्ट्रेलिया चला गया। जांच में पता चला है कि साजिद कुछ साल पहले हैदराबाद आया था। तब उसका भाई से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हुआ था।
बॉन्डी बीच पर हमले के बाद साजिद के भाई सामने नहीं आ रहे हैं। उनके मुताबिक, कई साल से हमारा उससे संपर्क नहीं था। वो 27 साल पहले हैदराबाद छोड़कर ऑस्ट्रेलिया चला गया था। वहां उसने एक ईसाई महिला से शादी कर ली। इसके बाद परिवार ने उससे रिश्ता तोड़ लिया था। अम्मी की उम्र 80 साल हो गई है। वो बीमार रहती हैं। साजिद ने कभी उनका हाल-चाल नहीं पूछा।
वहीं, साजिद के रिश्तेदार बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद वह छह बार भारत आया है। ज्यादातर प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों या बुजुर्ग अब्बू-अम्मी से मिलने ही आया। अब्बू के इंतकाल के वक्त भी वह भारत नहीं आया था। परिवार को साजिद या उसके बेटे की कट्टरपंथी सोच के बारे में पता नहीं था। तेलंगाना पुलिस के मुताबिक, भारत छोड़ने से पहले साजिद का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड भी नहीं था।
टोलीचौकी में रहने वाले एक शख्स खुद को साजिद के परिवार का करीबी बताते हैं। वे भी कहते हैं, ‘विवाद की वजह से साजिद ने घरवालों से कई साल पहले ही रिश्ता तोड़ लिया था।’
साजिद और नवीद का IS कनेक्शन
1 नवंबर, 2025 को साजिद और नवीद सिडनी से फिलीपींस गए थे। ऑस्ट्रेलिया की पुलिस के मुताबिक, वे फिलीपींस में 28 दिन रुके। उन्होंने बताया था कि वे दावो जा रहे हैं। फिलीपींस के इमिग्रेशन अफसरों के मुताबिक, साजिद ने भारतीय पासपोर्ट और नवीद ने ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट पर यात्रा की थी। 28 नवंबर को दोनों दावो से राजधानी मनीला की कनेक्टिंग फ्लाइट से सिडनी चले गए।
दावो शहर साउथ फिलीपींस के मिंडानाओ द्वीप में है। यहां करीब 4% आबादी मुस्लिम है। फिलीपींस की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी यहीं है। दावो और इससे करीब 400 किमी दूर मरावी शहर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी IS का गढ़ माना जाता था। IS 8 साल पहले खत्म हो चुका है, लेकिन इसके समर्थक अब भी मौजूद हैं। जांच एजेंसियों को पता चला है कि साजिद और नवीद हमले की ट्रेनिंग लेने दावो गए थे

ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में इस्लामिक स्टेट पर प्रतिबंध लगा दिया था। ऑस्ट्रेलिया के जांच अधिकारी ने बताया, ‘बाप-बेटे फिलीपींस क्यों गए थे, इसकी जांच की जा रही है। हमने फिलीपींस अथॉरिटी से कहा है कि दोनों कहां-कहां गए और क्या किया, इसकी जानकारी दें।
साउथ फिलीपींस में इस्लामिक स्टेट से जुड़े कुछ गुट एक्टिव हैं। अंदेशा है कि बाप-बेटे ने हमले से एक महीने पहले फिलीपींस में ट्रेनिंग ली थी।’
एक वीडियो, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आया नवीद
साजिद के बेटे नवीद अकरम का एक वीडियो सामने आया है। ये वीडियो सिडनी की सड़क पर 6 साल पहले शूट किया गया था। तब नवीद की उम्र करीब 18 साल थी। नवीद ने 12वीं तक ही पढ़ाई की है। वो सिडनी में कंस्ट्रक्शन साइट पर मिस्त्री का काम करता था।
वीडियो में नवीद कह रहा है ‘अल्लाह एक है और मोहम्मद अल्लाह के मैसेंजर हैं। ये मैसेज हर किसी तक पहुंचाओ। अल्लाह का कानून, किसी भी दूसरे काम या पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है। मैं ये जितना कहूं, उतना कम

नवीद के इसी वीडियो के बाद सुरक्षा एजेंसियां उस पर नजर रख रही थीं।
स्पोर्ट्स क्लब का बहाना बनाकर 6 लाइसेंसी राइफल लीं एजेंसियों को करीब 7-8 साल पहले नवीद के ISIS से रिश्तों के बारे में जानकारी मिली थी। इनपुट होने के बावजूद उसके अब्बू साजिद को 6 राइफल के लाइसेंस दे दिए गए। 2023 में इन्हें रिन्यू भी किया गया। साजिद ने स्पोर्ट्स क्लब का बहाना बनाकर लाइसेंस लिए। राइफल खराब होने का बहाना बनाकर वो एक के बाद एक नया लाइसेंस लेता रहा।
ऑस्ट्रेलिया टुडे के एडिटर अमित सरवाल कहते हैं, ‘जांच एजेंसियों की तरफ से कमी रही है कि शक के दायरे में होने के बावजूद साजिद के परिवार पर कार्रवाई नहीं हुई। मुझे लगता है कि इस्लामोफोबिया (इस्लाम के खिलाफ नफरत का भाव) का आरोप न लग जाए, इसलिए कार्रवाई नहीं की गई।’
अमित सरवाल बताते हैं, ‘बॉन्डी बीच पर हमले में 3 भारतीय नौजवान भी घायल हुए हैं। हालांकि अब तक हॉस्पिटल ने उनके बारे में जानकारी नहीं दी है।’

नवीद कोमा से बाहर आया, पूछताछ शुरू हमले के बाद पुलिस ने साजिद को मौके पर ही मार गिराया था। नवीद को गोली लगी थी। सिडनी हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा था। हॉस्पिटल से जुड़े सोर्स बताते हैं कि नवीद कोमा से बाहर आ गया है। जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।
वहीं, नवीद की मां बताती हैं, ‘वह अच्छा लड़का था। उसे तो बंदूक चलाना भी नहीं आता था। नवीद अपने वालिद के साथ फिशिंग करने गया था। वो बीच पर कैसे पहुंचा, समझ ही नहीं आ रहा।’
अमित सरवाल बताते हैं, ‘अब तक इस टेरर मॉड्यूल के दो लोग सामने आए हैं। पता नहीं ऑस्ट्रेलिया से कितने लोग फिलीपींस में छुट्टियां मनाने का बहाना बनाकर गए और ट्रेनिंग लेकर आए। अब ऑस्ट्रेलिया पुलिस ऐसे लोगों का पता लगा रही है, जो हाल में फिलीपींस होकर आए हैं। या फिर वे लोग जो पहले मॉड्यूल का हिस्सा थे, लेकिन एक्टिव नहीं थे।’
एरिन कहती हैं कि अक्टूबर 2023 में हमास के इजराइल पर हमले के बाद से ऑस्ट्रेलिया में हालात बदल गए हैं। हमास के हमले के दो दिन बाद हमने ऑस्ट्रेलिया में लोगों को जश्न मनाते देखा। तब लोग नारेबाजी, आतिशबाजी कर रहे थे। यहूदियों की मौत का जश्न मना रहे थे। ये फ्री स्पीच नहीं है, बल्कि हेट स्पीच है। इसके बाद भी किसी पर कार्रवाई नहीं की गई।
‘ऑस्ट्रेलिया में हिजबुल्ला और तालिबान के झंडे फहराए गए, तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहूदियों के पूजा स्थल सिनागॉग पर हमले हुए, उनके बच्चों को निशाना बनाया गया। ऑस्ट्रेलिया में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर सरकार चुप रही। उल्टा सरकार ने फिलिस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देने का ऐलान कर दिया।’
एरिन आगे कहती हैं, ‘भारत के लोग अच्छी तरह से आतंकवाद को समझते हैं। भारतीय आतंकवाद के शिकार रहे हैं। हमें समझना होगा कि हम सभी एक ही खतरे के शिकार हैं।’

बॉन्डी बीच पर हुआ हमला भारत के लिए सबक’
एंटी टेररिज्म एक्सपर्ट और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘IS की ट्रेनिंग दो स्तर पर होती है। पहला ब्रेनवॉश और दूसरा मिलिट्री ट्रेनिंग। ब्रेनवॉश के तहत ये ट्रेनिंग दी जाती है कि मजहब का रास्ता ही सही है। फिर हथियारों की ट्रेनिंग दी गई होगी।’
‘इस्लामिक स्टेट ईरान और सीरिया तक सीमित नहीं है। उसका मकसद दुनिया में इस्लामिक खलीफा राज्य की स्थापना करना है। ISIS ने बॉन्डी बीच पर अटैक की भी पूरी प्लानिंग की होगी। कैसे चुन-चुनकर यहूदियों को मारना है, इसकी पूरी ब्रीफिंग दी गई होगी। ISIS इंटरनेट पर अच्छी ट्रेनिंग देने के लिए जाना जाता है। सारी प्लानिंग ऑनलाइन भी हुई होगी। अब सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच करेंगी।’
संजय कुलकर्णी आगे बताते हैं, ‘हमने भारत में पहलगाम हमला देखा है। ऑस्ट्रेलिया में आम लोगों को चुन-चुनकर मारा, वैसे ही पहलगाम में टूरिस्ट को मारा गया था। भारत से हमलावरों का संबंध मिलने के बाद हमें भी सोचना होगा कि कैसे इस तरह की सोच हमारे आसपास भी हो सकती है।’

भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है।
भारत को इस तरह के हमलों से बचने के लिए इंटेलिजेंस नेटवर्क को अलर्ट पर रखना होगा। लाल किले पर हुए ब्लास्ट में हमने वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल देखा। कैसे पढ़े-लिखे डॉक्टर्स ने हमारे बीच रहते हुए बम ब्लास्ट की साजिश रची।’

हमलावर से बंदूक छीनने वाले अहमद से मिले प्रधानमंत्री
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज बॉन्डी बीच पर हुए हमले के दौरान साजिद से बंदूक छीनने वाले अहमद अल अहमद से मिलने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।

साथ ही लिखा कि अहमद, आप ऑस्ट्रेलिया के हीरो हैं। आपने दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को खतरे में डाला। सबसे बुरे वक्त में हमें ऑस्ट्रेलियाइयों का सबसे बेहतरीन रूप देखने को मिलता है और रविवार रात हमने वही देखा। हर ऑस्ट्रेलियाई की ओर से मैं आपको धन्यवाद कहता हूं
