ईरान युद्ध अंतहीन नहीं… पर इसका अंत बहुत करीब भी नहीं… कौशल किशोर चतुर्वेदी

ईरान युद्ध अंतहीन नहीं… पर इसका अंत बहुत करीब भी नहीं…
ईरान पर हमला करने के बाद अमेरिका ने यह सोचा भी नहीं होगा कि सैन्य बल के भरोसे मनमानी करने की उसकी इच्छा उसके त्रास का बड़ा कारण भी बन सकती है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान में अमेरिका-इजरायल के हमलों के एक लंबे क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील होने की बढ़ती चिंताओं पर जवाब देते हुए कहा कि यह ईराक नहीं है और यह यानी ईरान युद्ध अंतहीन नहीं है। हेगसेथ ने वायुसेना के जनरल एवं ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ’ के अध्यक्ष डैन केन के साथ हमलों के बाद से ट्रंप प्रशासन की पहली प्रेसवार्ता में यह बात कही थी। पीट हेगसेथ ने कहा था कि ”हम जीतने के लिए लड़ते हैं और हम समय या जीवन बर्बाद नहीं करते।” उन्होंने कहा, ”यह तथाकथित सत्ता परिवर्तन का युद्ध नहीं है लेकिन सत्ता परिवर्तन निश्चित रूप से हुआ है और दुनिया के लिए यह बेहतर स्थिति है।”
इसमें एक बात स्पष्ट है कि अमेरिका दुनिया के लिए ईरान से युद्ध नहीं कर रहा है। अमेरिका सिर्फ अपने स्वार्थों के लिए ईरान, मध्य पूर्व या दुनिया में कहीं भी युद्ध को चुनता है और अपने उद्देश्यों की पूर्ति होने तक युद्ध जारी रखने पर आमादा रहता है। चाहे इराक के साथ युद्ध की बात हो या फिर अब ईरान के साथ युद्ध की शुरुआत हो। अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले- हम जीतने के लिए लड़ते हैं। अमेरिका ने कुवैत में तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है और राष्ट्रपति ट्रंप ने लक्ष्य हासिल होने तक अभियान जारी रखने का संकल्प लिया है। तो यह बात भी साफ है कि अमेरिका के पास अब युद्ध जारी रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। जिस तरह खोमनेई की मौत के बाद भी ईरान ने ताबड़तोड़ हमले जारी रखे हैं, उसके बाद अमेरिका समझ चुका है कि यह युद्ध बहुत आसान नहीं होगा। और अमेरिका को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जिस तरह रूस, यूक्रेन युद्ध उसकी वजह से चार साल बाद भी खत्म नहीं हो पाया है। ठीक इसी तरह का प्रयोग अब रूस और चीन को करने का अवसर मिल चुका है। योजनाबद्ध तरीके से अब ईरान
को बैकअप देने के लिए यह दोनों देश आतुर हैं। और तब इजरायल की तानाशाही फिलिस्तीन और आसपास के देशों की तरह ईरान में चलती नजर नहीं आ पाएगी। और उन स्थितियों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि जिस तरह कई मौकों पर रूस को यूक्रेन के सामने नीचा देखना पड़ा था, ठीक उसी तरह अब अमेरिका और इजरायल भी नीचा देखने को मजबूर हो सकते हैं। और जिस तरह रूस यूक्रेन युद्ध को भी चार दिन का माना जा रहा था और चार साल बाद भी युद्ध जारी है… अब ईरान के साथ रूस और चीन जैसे देशों ने सहयोग करने की ठान ली तो अमेरिका और इज़रायल भी ईरान के साथ युद्ध में चार साल जैसे लंबे संघर्ष में फँसे नजर आ सकते हैं।
ईरान और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों ने इजरायल, अरब देशों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दागी हैं। इस युद्ध में चार अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। ट्रंप ने कहा था कि और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। वहीं, डैन केन ने इसके बाद कहा कि अमेरिका को अतिरिक्त नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने मारे गए सैन्यकर्मियों के परिजनों से कहा, ”हम आपके साथ शोक में शामिल हैं और हम आपको कभी नहीं भूलेंगे।” तो अमेरिका को इस तरह की शोक सहभागिता अभी और लंबे समय तक जारी रखनी पड़ सकती है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चार से पांच सप्ताह तक सैन्य अभियान जारी रह सकता है, लेकिन वह ”इससे ज्यादा समय तक के लिए भी” तैयार हैं। ट्रम्प ऐसी बातें सोच समझकर ही कर रहे हैं। और उन्हें मालूम है कि पुतिन ने अमेरिकी कार्रवाई को पूरी तरह से गलत बताते हुए अपनी ईमानदार प्रतिक्रिया व्यक्त कर दी है। ऐसे में ट्रम्प की लंबे समय तक युद्ध के लिए तैयार रहने की आशंका सही साबित होने की संभावना में बदलती नजर आ रही है।

ईरान पर इजराइल और अमेरिका के ताजा हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध ने व्यापक रूप ले लिया है। इसके बाद, ईरान और उसके सहयोगी देशों ने इजराइल, खाड़ी देशों और तेल-गैस उत्पादन वाले स्थानों पर हमला किया। हमले बढ़ना, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का मारा जाना, और किसी भी स्पष्ट योजना का न होना इस बात का संकेत है कि यह लड़ाई लंबे समय तक जारी रह सकती है और इसके व्यापक परिणाम हो सकते हैं। और व्यापक परिणामों में ही तीसरे विश्व युद्ध की आशंका भी छिपी हुई है। और अंततः इसके लिए ट्रम्प का पागलपन ही जिम्मेदार माना जाएगा। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि ‘ईरान युद्ध अंतहीन नहीं’… पर इसका अंत बहुत करीब भी नजर नहीं आ रहा है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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