दरअसल, प्रदीप पटेल 3 जनवरी को जमीन विवाद के एक घटनाक्रम के बाद अपने क्षेत्र से गायब हो गए थे। कई दिनों तक अंडरग्राउंड रहने के बाद उन्होंने अपने पोते अर्जुन को कॉल किया था जिसमें उन्होंने घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी थी और मूसा गैंग से खुद को जान का खतरा बताया था।
कई दिनों तक भोपाल रहे विधायक 26 फरवरी को अपने क्षेत्र वापस लौटे। रास्ते भर उनका भव्य स्वागत हुआ। अब जिस मूसा गैंग के खौफ के चलते विधायक अपने क्षेत्र से करीब 55 दिन गायब रहे वो गैंग आखिर है क्या? इसके सदस्य कौन हैं?
क्या यह वाकई इतना खतरनाक है कि एक विधायक को अपने क्षेत्र को छोड़कर जाना पड़े? क्या केवल बीजेपी विधायक को ही इससे खतरा है या बाकी के नेता भी खौफ में हैं? पुलिस इस पर क्या कार्रवाई कर रही है?

पकौड़े खाता मिला मूसा गैंग का सदस्य विधायक के मऊगंज पहुंचने से दो दिन पहले यानी 23 फरवरी को की टीम मऊगंज पहुंची थी। यहां पहुंचने पर माहौल सामान्य नजर आया। सड़कें आम दिनों की तरह व्यस्त थीं, लोग अपने काम में बिजी थे। मऊगंज कलेक्ट्रेट के बाहर एक चाय की दुकान पर रूककर भास्कर रिपोर्टर ने मूसा गैंग को लेकर स्थानीय लोगों की नब्ज टटोलने का फैसला किया।
दुकान पर कुछ लोग पहले से मौजूद थे। उनसे रिपोर्टर ने ‘मूसा गैंग’ के बारे में पूछा। वहीं पर पकौड़ी खा रहे एक शख्स ने हंसते हुआ कहा ‘भैया, विधायक जी जिसे गैंग बता रहे हैं, मैं भी उसी ‘मूसा गैंग’ का सदस्य हूं।’ जिस शख्स ने ये बोला उनका नाम संतोष तिवारी था। ये चौंकाने वाली बात थी कि जिस गैंग के खौफ से विधायक 55 दिन गायब रहे, उस गैंग का सदस्य सामने बैठा था।
संतोष तिवारी ने बात आगे बढ़ाई, ‘यहां कोई मूसा गैंग नहीं है। यह सब हमारे विधायक जी के दिमाग की उपज है। मैं संघ परिवार से जुड़ा व्यक्ति हूं और स्वाभाविक रूप से बीजेपी का समर्थन करता हूं। तीन जनवरी की घटना से पहले तक, चुनाव के समय से लेकर अब तक, विधायक प्रदीप पटेल के साथ मेरा चोली-दामन का साथ रहा है।

एमएलए बोले- अब बयान वापस लूंगा तो किरकिरी होगी संतोष ने बताया, ‘इस घटना के बाद भी मेरी उनसे फोन पर बात हुई। मैंने पूछा कि आप ये उल-जलूल बातें क्यों कर रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि मैं आपके बारे में नहीं कह रहा, बस मुंह से निकल गया। अब वापस लूंगा तो किरकिरी होगी।” संतोष तिवारी के मुताबिक, पूरे विवाद की जड़ एक जमीन का टुकड़ा है।
वह कहते हैं, ‘सच तो यह है कि 3 जनवरी को मऊगंज बाईपास से लगी एक जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद था। मामला अदालत में विचाराधीन है। विधायक प्रदीप पटेल एक पक्ष की तरफ से आकर वहां धरने पर बैठ गए। यही विवाद की असली वजह थी। मैं तो उस दिन शहर में था भी नहीं। जब लौटा तो मुझे यह सब पता चला।

3 जनवरी की रात और 6 करोड़ की जमीन संतोष तिवारी के दावों की पड़ताल करने के लिए हम उस घटना की तह तक पहुंचे, जिसे इस पूरे विवाद का केंद्र बताया जा रहा है। मऊगंज बाईपास हाईवे से सटी लगभग 30 डिसमिल जमीन, जिसकी कीमत करीब 6 करोड़ रुपये बताई जाती है, को लेकर मऊगंज के ही विनोद मिश्रा और अनिल पांडे के बीच पुराना विवाद है।
3 जनवरी की शाम, विधायक प्रदीप पटेल इसी जमीन पर अपना टेंट लगाकर विनोद मिश्रा के पक्ष में धरने पर बैठ गए। रात करीब 8 बजे तक माहौल गरमा गया और विवाद बढ़ गया। इस मामले में एक पक्ष, विनोद मिश्रा, बताते हैं, ‘वह जमीन मेरी है। अनिल पांडे की जमीन उसके पीछे है, लेकिन वह जबरदस्ती मेरी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं।
हमारा पहले समझौता भी हो चुका था, लेकिन वह उसे दरकिनार कर फिर से कब्जा करने लगे। तब मैंने विधायक जी से मदद मांगी। उन्होंने मेरे कागज देखे और मेरी मदद के लिए वहां आ गए।’ विनोद मिश्रा आरोप लगाते हैं, कि विधायक आए तो अनिल पांडे और उसके साथी उग्र हो गए। उन्होंने विधायक के ऊपर पेट्रोल डाल दिया और उन्हें मारने के लिए आगे बढ़े।
हम लोगों ने किसी तरह उन्हें वहां से बाहर निकाला, लेकिन भीड़ ने उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया, जिससे गाड़ी का कांच भी टूट गया।

जमीन पर 2008 से कोर्ट का स्टे ऑर्डर वहीं, दूसरे पक्ष अनिल पांडे की कहानी बिल्कुल अलग है। वह कहते हैं, ‘उस दिन विनोद मिश्रा और स्थानीय विधायक मेरी जमीन पर अतिक्रमण कर रहे थे, जबकि मेरे पास उस जमीन पर हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर है। विधायक आए और विनोद के साथ मिलकर हमारी जमीन पर मिट्टी डलवाने लगे।
जब मैंने विरोध किया और कहा कि आप मेरी भी बात सुनिए, मेरे पास स्टे ऑर्डर है, तो उन्होंने पुलिस को बुलवाकर मुझे ही जेल भिजवा दिया। जब यह बात मेरे घरवालों और गांव वालों को पता चली, तो वे इकट्ठा हो गए। इसके बाद पुलिस किसी तरह विधायक को वहां से लेकर गई।

पुलिस ने ही पैदा किया ‘मूसा गैंग’ मूसा गैंग के सदस्य बाहर खुलेआम घूम रहे हैं, पकौड़ी खा रहे हैं, रोजमर्रा के काम कर रहे हैं। गैंग के डर की वजह से विधायक को अपने क्षेत्र से 55 दिन गायब रहना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मूसा गैंग का नाम आया कैसे ? की पड़ताल में पता चला कि मूसा गैंग को अस्तित्व में लाने वाली भी पुलिस ही है।
29 जनवरी 2025 को एक रोजनामचा रिपोर्ट का पता चला। उस समय के मऊगंज थाना प्रभारी सनत द्विवेदी ने इस रोजनामचे में पहली बार मूसा गैंग का जिक्र किया था। उन्होंने ये रोजनामचा रात 1 बजे लिखा था। इसके मुताबिक रात करीब 10.30 बजे विपिन त्रिपाठी, आशुतोष तिवारी, संतोष तिवारी, लल्लू पाण्डेय, अशोक चौरसिया और करीब 40-50 अन्य लोग टीआई के चेंबर में घुसे।
उन्होंने टीआई से ऊंची आवाज में थाना से हटवाने, भ्रष्ट तथा पैसा लेकर दूसरे पक्ष की तरफ से कार्रवाई करने बाबत अश्लील एवं अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। टीआई ने लिखा कि विपिन त्रिपाठी के सहयोगी अशोक चौरसिया और अन्य लोग गंभीर अपराधों के अपराधी हैं। बस्ती में ऐसी चर्चा है की इनकी गैंग को मूसा गैंग कहा जाता है।

मामले की जांच में पाया- ऐसा कोई गैंग नहीं सनत द्विवेदी ने इसी रोजनामचे में आगे लिखा कि मैं अकेला परिवार सहित रहता हूं, इनके द्वारा कभी भी मेरे साथ कोई दुर्घटना या हत्या करायी जा सकती है। भविष्य में मेरे साथ कोई घटना होती है तो इसमें विपिन त्रिपाठी, अशोक चौरसिया एवं इनके साथी ही जिम्मेदार होंगे। थाना स्टाफ इनसे डरा हुआ है।
जब एक टीआई को इस तरह की धमकी मिली तो पुलिस महमके की किरकिरी हुई। आला अधिकारियों ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। जांच का जिम्मा तत्कालीन एएसपी अनुराग पांडे को सौंपा गया। एएसपी ने अपनी जांच के दौरान उन सभी लोगों के कथन लिए जिनसे टीआई ने जान का खतरा बताया था। जांच के बाद एएसपी ने रिपोर्ट में लिखा मूसा गैंग जैसी कोई गैंग नहीं है।

जिसका नाम मूसा उसकी ऑटो पार्ट्स की दुकान भास्कर की टीम ने मूसा नाम के शख्स को भी ढूंढ निकाला जो इस गैंग का नाम सामने आने के बाद अक्सर पुलिस के टारगेट पर रहता है। ये है मऊगंज बाजार में ‘अयान ऑटो पार्ट्स एवं रिपेयरिंग सेंटर’ चलाने वाला अयान। हम जब उसकी दुकान पर पहुंचे तो वह मोटरसाइकिल सुधारने में व्यस्त था।
अयान बताता है, कि दोस्त मुझे पहले कभी-कभी मूसा कहकर बुलाते थे। मेरा कोई गैंग नहीं है। मैं एक साधारण लड़का हूं जो अपनी दुकान चलाता है। जब से यह ‘मूसा गैंग’ की बात चली है, मैं बदनाम हो गया हूं।’ उसने दर्द बयां करते हुए कहा, ‘पुलिस मुझे उठाकर ले गई थी और पूछताछ कर रही थी।

मां बोली- मेरे बेटे की बदनामी हो रही अयान की मां का दर्द भी छलक पड़ा। वह कहती हैं, ‘मेरे बेटे का नाम अयान है। दोस्त उसे मूसा कहते होंगे, लेकिन हम इस बात से बहुत परेशान हैं। जब से यह घटना हुई है, पुलिस कभी भी आ जाती है। दो-चार घंटे जब तक मन करता है, उसे बिठाकर रखती है। इससे हमारे धंधे का भी नुकसान होता है और आस-पड़ोस के लोग भी बातें करते हैं, जो अच्छा नहीं लगता।
हमारा छोटा सा परिवार है, यही दुकान, यही घर। हम छोटा-मोटा काम करते हैं, लेकिन इससे हमारी बदनामी हो रही है। मुझे तो बस यही चाहिए कि यह सब बंद हो और मेरे बेटे को परेशान न किया जाए।

कांग्रेस बोली- विधायक की सोची समझी साजिश इस मामले पर राजनीतिक दलों की राय भी बंटी हुई है। मऊगंज के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता सुखेंद्र सिंह बन्ना इसे एक सोची-समझी साजिश बताते हैं। वह कहते हैं, ‘यहां कोई मूसा गैंग नहीं है। यह यहां के युवकों को बदनाम करने की एक बहुत बड़ी साजिश है। विधायक को क्षेत्र में न जाना पड़े, लोगों की समस्याएं न सुननी पड़ें और उनका काम ऐसे ही चलता रहे, बस यही उनकी प्लानिंग है।
आप यहां घूमेंगे तो आपको पता चलेगा कि यहां कोई मूसा गैंग नहीं है। अब वह किसी की जमीन आधी रात को हड़पने पहुंचेंगे और कोई सवाल-जवाब करेगा तो उसे ‘मूसा गैंग’ का नाम दे देंगे। और जिन्हें वह गैंग बता रहे हैं, उनमें तो उन्हीं के पुराने साथी शामिल हैं।’
बीजेपी नेताओं ने भी विधायक के दावों को खारिज किया वहीं, मऊगंज के भाजपा जिला अध्यक्ष राजेंद्र मिश्र इस मामले को तूल देने से बचते हैं। वह कहते हैं, ‘यहां कोई मूसा गैंग नहीं है और मुझे कोई खतरा भी नहीं है। मैं आराम से अपने जिले में घूमता हूं। विधायक जी भी अपने क्षेत्र में वापस आएंगे। अभी वह कुछ निजी कामों से और भोपाल में विधानसभा सत्र चलने के कारण बाहर हैं।
क्षेत्र में किसी प्रकार का कोई डर नहीं है, न ही किसी गैंग की कोई उपस्थिति है। सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है और शासन-प्रशासन अपनी भूमिका निभा रहा है।’

एसपी ने कहा- न कोई गैंग और न ही किसी को खतरा इस पूरे मामले पर अंतिम और आधिकारिक मुहर मऊगंज जिला एसपी दिलीप कुमार सोनी ने लगाई। उन्होंने भास्कर से बातचीत में स्पष्ट किया कि 3 जनवरी को एक जमीनी विवाद की घटना हुई थी, जिसमें विधायक जी की रिपोर्ट पर हमने मुकदमा कायम किया था। इन्वेस्टिगेशन में जिन लोगों के नाम सामने आए, हमने उन्हें गिरफ्तार किया था।
कुछ दिन बाद मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि विधायक जी ने आरोप लगाया है कि उन्हें किसी ‘मूसा गैंग’ से धमकी मिली है। इस संबंध में हमें कोई लिखित शिकायत नहीं मिली, लेकिन फिर भी हमने इसकी तस्दीक की। हमारी जांच में ऐसा कोई गैंग यहां पर एक्टिव नहीं पाया गया।’
थाना प्रभारी की रोजनामचा रिपोर्ट पर एसपी ने कहा, ‘एक रोजनामचा रिपोर्ट का जिक्र जरूर उन्होंने किया था, जिसमें कुछ लोगों के नाम थे और उन्हें तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा ‘मूसा गैंग’ से संबोधित किया गया था। उस संबंध में एडिशनल एसपी ने जांच की थी और जांच में पाया था कि इस तरह का कोई गैंग एक्टिव नहीं है। इसी आधार पर मैंने भी कहा था कि यहां ऐसा कोई गैंग नहीं है।
