पश्चिम बंगाल में ‘ऑपरेशन ममता’ एक्सटेंशन… कौशल किशोर चतुर्वेदी

पश्चिम बंगाल में ‘ऑपरेशन ममता’ एक्सटेंशन…
पश्चिम बंगाल में इस बार चल रहे ‘ऑपरेशन ममता’ का एक्सटेंशन करते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने दो चरणों में चुनाव की घोषणा के बाद कदम आगे बढ़ा दिए हैं। भाजपा शासित राज्यों में जहां चुनाव को ग्राउंड बनाते हुए मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिलता है, वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को टेंशन देते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव को हटाकर ममता को टेंशन में डाल दिया है। इस फैसले के बाद क्रूरता भी ममता का मजाक उड़ा रही प्रतीत होती है। पश्चिम बंगाल में हालात तैसे बन गए हैं कि ममता के लिए एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई नजर आ रही है। ममता अगर चुनाव जीत भी जाती हैं तब भी पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति चुनाव जैसा विकल्प भी खुला हुआ है। ईडी के खिलाफ ममता का नायक वाला चेहरा पश्चिम बंगाल में जीत के बाद भी उनके लिए खलनायक साबित होने वाला है। कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि ममता के अच्छे दिन अब उनसे रूठ चुके हैं। और पश्चिम बंगाल में चल रहा मोदी-शाह का ‘ऑपरेशन ममता’ अब ममता बनर्जी को चारों खाने चित करके ही रहेगा। पश्चिम बंगाल में अभी मुख्य सचिव को हटाया गया है। हो सकता है बहुत जल्दी ही और भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, पुलिसिया सर्जरी तो पश्चिम बंगाल में पहले ही हो चुकी है। नए राज्यपाल की नियुक्ति होने पर ममता ने जो कयास लगाए थे, कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में क्या राष्ट्रपति शासन लगाने जा रही है? इसका जवाब भी निकट भविष्य में मिलकर ही रहेगा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को हटा दिया है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटा दिया है। नंदिनी चक्रवर्ती की जगह दुष्यंत नारियाला को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि संगमित्रा घोष को नए गृह सचिव के रूप में तैनात किया गया है। साथ ही, आयोग ने सीधे तौर पर सात एईआरओ अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया। भारत निर्वाचन आयोग ने एक पत्र में कहा कि 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संगमित्रा घोष को पश्चिम बंगाल के गृह और पहाड़ी मामले के प्रधान सचिव के रूप में तैनात किया गया है। निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि यह आदेश तुरंत लागू किए जाएं और इन अधिकारियों के शामिल होने की रिपोर्ट 16 मार्च को दोपहर 3 बजे तक भेजी जाए। आयोग ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया है, उन्हें चुनाव से जुड़े किसी भी पद पर तब तक तैनात नहीं किया जाएगा जब तक चुनाव पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाते।
ईसीआई ने राज्य में एसआईआर के दौरान कई मामलों को चिन्हित किया, जिनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती द्वारा पिछले कुछ महीनों में गैर-अनुपालन के मामले शामिल थे। इसमें चार चुनाव अधिकारियों दो ईआरओ और दो एईआरओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज न कराने की कार्रवाई शामिल थी। इसके अलावा बसीरहाट बीडीओ की सुनवाई में अनियमितताएं, राज्य प्रशासन द्वारा देरी और तीन आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण भी शामिल था। नंदिनी चक्रवर्ती को फरवरी में ईसीआई द्वारा समन भी जारी किया गया था। 15 मार्च 2026 को ईसीआई ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे। इन नए नियुक्तियों के पीछे ईसीआई द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा का असर है।
कुल मिलाकर आचार संहिता लगने के बाद भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका संबंधित राज्य में सर्वोपरि होती है। अब ममता का प्रभाव खत्म हो चुका है। भारत निर्वाचन आयोग ने कमान संभाल ली है। ममता की नजर में निर्वाचन आयोग की अहमियत क्या है,
इससे अब कोई फर्क नहीं पड़ता है। भारत निर्वाचन आयोग की नजर में ममता की अहमियत कुछ भी नहीं है, यह बात पूरी तरह से सच से भरी है। अब शेरनी को गुर्राने की भी इजाजत नहीं है और शिकार करने की पूरी मनाही है। बस यही सच है कि पश्चिम बंगाल में ‘ऑपरेशन ममता’ का एक्सटेंशन हो चुका है और इस बार, पश्चिम बंगाल में ‘नो ममता सरकार’ के अलावा कुछ भी विकल्प नहीं है। लोकतंत्र ने फैसला करने का मन बना लिया है। 4 मई को फैसला हो जाएगा और यदि कुछ कसर रही, तो मई के महीने में ही उसकी भी भरपाई होना तय है। ‘ऑपरेशन ममता’ एक्सटेंशन’… का बस यही सार है कि ममता को टेंशन
जोन में प्रवेश करना ही पड़ेगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *