
तटीय क्षेत्र से दूर छत्तीसगढ़ के कोपाबेड़ा में भी हो रही नारियल की खेती… और मन मोह लेता है चित्रकोट जलप्रपात…
छत्तीसगढ
पीआईबी का यह प्रेस टूर वास्तव में
हमारे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ को हमारे मन में बसा देगा, यह हमने सोचा भी नहीं था। दूसरे दिन जब हम रायपुर से जगदलपुर की तरफ बढ़े तब भी हमने यह कल्पना नहीं की थी कि हमारे पड़ोसी राज्य में जो भी है वह अद्वितीय, अकल्पनीय और अतिमनभावन है। अच्छी सड़कें, मन को लुभाते जंगल, रोमांचित करती घाटियां और खूबसूरत प्राकृतिक छटा कहीं न कहीं मन को अंदर तक छू लेती है। कोंडागांव जिले के कोपाबेड़ा में स्थित नारियल विकास बोर्ड का प्रदर्शन-सह-बीज उत्पादन प्रक्षेत्र को देखकर हमें आश्चर्य हुआ कि अब तक यह केवल मिथक था कि नारियल की खेती तटीय क्षेत्रों में ही हो सकती है। यहाँ आकर देखा जा सकता है कि केरल की तरह ही छत्तीसगढ़ में न केवल नारियल का उत्पादन हो रहा है बल्कि इस प्रयास में भी सफलता मिल रही है कि स्थानीय कृषक नारियल की खेती को बढ़ावा देकर आय के बड़े स्रोत के द्वार खोलकर खेती को लाभ का धंधा बनाएं। और इसके बाद जब हम बस्तर जिले के चित्रकोट जल प्रपात पहुँचे तो यही महसूस हुआ कि क्यों न थोड़ी देर और यहाँ ठहरकर प्रकृति की अनुपम छटा से सराबोर हुआ जाए। देखकर ही यह महसूस हुआ कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहरें कितनी समृद्ध हैं। पीआईबी के इस प्रेस टूर के पहले दिन हम रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय को देखकर संतुष्टि के भाव से भरे थे तो दूसरे दिन संतुष्टि के भाव में और भी कई गुना बढ़ोत्तरी हो गई।
छत्तीसगढ़ में नारियल विकास बोर्ड का प्रदर्शन-सह-बीज उत्पादन प्रक्षेत्र कोंडागांव जिले के कोपाबेड़ा में स्थित है। यह केंद्र नारियल की खेती को बढ़ावा देने, उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करने और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए कार्य करता है। नारियल के उन्नत हाइब्रिड पौधे तैयार करना, उनका वितरण करना और किसानों को नारियल की आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। यह केंद्र भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत देश के 11 नारियल विकास बोर्ड में से एक है। केरा का मतलब नारियल होता है। यहां पदस्थ फील्ड ऑफिसर संकेत कुमार पंडा ने बताया कि कोंडागांव स्थित इस केरा भवन में नारियल के 6000 पेड़ हैं। बिजली गिरने की वजह से 2000 पेड़ों ने फल नहीं दिया। 4000 नारियल पेड़ों ने प्रति फल पेड़ 75 फल दिए। इस तरह 40 हेक्टेयर यानी 100 एकड़ में स्थित नारियल विकास बोर्ड की एक साल की कमाई 80 लाख हुई, इसमें से 25-26 लाख खर्च अनुमानित है। इस तरह केंद्र सरकार के इस प्रकल्प ने यह साबित कर दिया है कि जहाँ चाह है, वहाँ राह है। केंद्र सरकार ने कोपाबेड़ा में इसकी स्थापना वर्ष 1987 में की थी। इस तरह यहाँ किसानों को नारियल की खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अब हम बात करें चित्रकोट जलप्रपात की। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित है। इसे अपनी घोड़े की नाल जैसी आकृति के कारण “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है। यह भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात है।
यह जलप्रपात जगदलपुर शहर से लगभग 38-40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग 29 मीटर (95 फीट) है, लेकिन अपनी अत्यधिक चौड़ाई के कारण यह बेहद भव्य दिखता है। यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय जुलाई से अक्टूबर (मानसून के बाद का समय) माना जाता है। बरसात के दिनों में इसका जलप्रवाह अपने पूरे उफान पर होता है। लेकिन मार्च के महीने में भी इसका आकर्षण कम नहीं होता है। तलहटी में पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। जलप्रपात के आसपास घने जंगल हैं और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। रात के समय यहाँ प्रकाश व्यवस्था भी की जाती है, जो इसके सौंदर्य को बढ़ा देती है। रायपुर से 273 कि.मी. की दूरी पर स्थित चित्रकोट जलप्रपात जब हम पहुँचे तो दिनभर की थकान कोसों दूर चली गई। और यहाँ वोटिंग के जरिए जलप्रपात की तीन धाराओं के नीचे पहुंचकर मन आनंद से भर गया। अलग-अलग अवसरों पर इस जलप्रपात से कम से कम तीन और अधिकतम सात धाराएँ गिरती हैं।
कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ आकर मन को यह अनुभूति होती है कि जंगल और आदिवासियों की यह धरती वास्तव में बहुत समृद्ध है। प्रकृति ने छत्तीसगढ़ को जो भी दिया है वह भरपूर है। तटीय क्षेत्र से दूर छत्तीसगढ़ के कोपाबेड़ा में भी नारियल की खेती हो रही है… तो प्रकृति का अनुपम उपहार चित्रकोट जलप्रपात मन मोह लेता है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं