Bombay High Court का ऐतिहासिक फैसला: जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी पर पोती का भी अधिकार, पोती-पोते में भेदभाव असंवैधानिक; Western Coalfields Limited को पुनर्विचार का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर खंडपीठ ने महिला अधिकारों और समानता के सिद्धांत को मजबूत करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के बदले मिलने वाली नौकरी के मामलों में पोते और पोती के बीच भेदभाव करना पूरी तरह से अनुचित और असंवैधानिक है.

यह मामला वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) और विदर्भ के  पताका खेड़ी के व्यंकटराव जीवतोडे तथा उनके परिवार से जुड़ा है. वेकोलि ने लिंग के आधार पर भेदभाव करते हुए परिवार की पोती, रूपाली जीवतोडे को नौकरी देने से साफ इनकार कर दिया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.

कोर्ट ने क्या कहा

न्यायालय ने वेकोलि के तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केवल लिंग के आधार पर नौकरी न देना समानता के अधिकार का उल्लंघन है. कोर्ट ने आदेश दिया कि ‘परिवार’ की संकल्पना को व्यापक अर्थ में समझा जाना चाहिए, जिसमें पोती भी पोते के समान ही परिवार की सदस्य है.

नियुक्त पर सकारात्म विचार किया जाए

अदालत ने वेकोलि द्वारा जारी ‘इन्कार पत्र’ को रद्द करते हुए निर्देश दिया है कि रूपाली जीवतोडे की नियुक्ति पर सकारात्मक विचार किया जाए. साथ ही, कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को आठ सप्ताह के भीतर पूरा करने का सख्त आदेश दिया है. यह फैसला विस्थापित परिवारों और समाज में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है.

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