
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने एक ऐतिहासिक आदेश में 1994 से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए दंपती को तलाक (Talak) की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने देशभर की विभिन्न अदालतों में लंबित 61 मुकदमों को एक साथ खत्म कर दिया।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने अनुच्छेद 142 के विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया। मामला अवमानना याचिका के रूप में शीर्ष अदालत पहुंचा था, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे स्थायी समाधान तक पहुंचाने का फैसला किया।
आपसी सहमति से हुआ निपटारा
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित किया। इसके बाद आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया तय की गई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि एलिमनी पर सहमति बन चुकी है और पति पत्नी को एकमुश्त 1 करोड़ रुपये देगा। इसके साथ ही लोनावला स्थित संपत्ति में पत्नी को हिस्सा देने पर भी सहमति बनी।
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खाते में संपत्ति हिस्सेदारी के रूप में 90 लाख रुपये जमा किए जाएं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद समाप्त माने जाएंगे।
61 केस एक साथ खत्म
शीर्ष अदालत ने विभिन्न अदालतों—ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—में चल रहे कुल 61 मामलों को रद्द कर दिया। इनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अन्य आपराधिक व दीवानी मुकदमे शामिल थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इसी विवाद से जुड़े किसी भी नए मामले की सुनवाई नहीं होगी।

अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश देने का अधिकार है। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए अदालत ने कहा कि इस लंबे विवाद का स्थायी समाधान जरूरी है और अब किसी भी तरह की कानूनी बाधा नहीं रहनी चाहिए।
दोनों पक्षों ने लिखित रूप में अदालत के फैसले को स्वीकार किया और आगे कोई मुकदमा न लड़ने पर सहमति जताई। अदालत ने इस मामले में पहले से जारी विभिन्न न्यायिक आदेशों को भी निरस्त कर दिया, जिससे 32 साल पुराना विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया।