800 करोड़ की गौशाला योजना में विवाद: निवेशकों का आरोप- डिप्टी डायरेक्टर प्रवीण शिंदे ने दी धमकी, बोले- ‘मंत्री कितने दिन रहेंगे, हमारे हिसाब से नहीं चलोगे तो टेंडर निरस्त कर देंगे’; मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश सरकार बेसहारा गौवंश की समस्याओं का समाधान करने के लिए गौशालाएं बना रही है। दूसरी तरफ, सरकारी अफसर इन गौशालाओं में 50 करोड़ से लेकर 500 करोड़ रुपए तक निवेश करने वाले लोगों के साथ अभद्रता कर रहे हैं।

गौसंवर्धन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर प्रवीण शिंदे पर 27 मई 2026 को हुई बैठक में निवेशकों को धमकाने के आरोप लगे हैं।

स्वावलंबी गौशाला योजना के निवेशकों और सामाजिक संगठनों ने गौसंवर्धन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर प्रवीण शिंदे पर ये आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 27 मई 2026 को हुई बैठक में डॉ. शिंदे बोले- प्रमुख सचिव दो महीने के मेहमान हैं। मंत्री का कुछ पता नहीं कि कितने दिन रहेंगे और सीएम के जाने का भी चल ही रहा है। विभाग में काम करना है तो मेरे हिसाब से करना पड़ेगा, नहीं तो टेंडर कभी भी निरस्त कर देंगे।

मामले में ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित ने मुख्यमंत्री, पशुपालन मंत्री और मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन ने ही भोपाल में गौशाला संचालन का टेंडर लिया है।

भोपाल में गौशाला संचालन का टेंडर लेने वाली संस्था के अध्यक्ष ने ये शिकायत की है।

कहा- कभी भी टेंडर निरस्त कर देंगे

शिकायत के अनुसार, 27 मई 2026 को वल्लभ भवन के कमरा नंबर ई-205 में स्वावलंबी गौशाला योजना के क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी। इसमें पशुपालन मंत्री लखन पटेल और विभाग के प्रमुख सचिव के साथ वे निवेशक शामिल हुए थे, जिन्हें शासन द्वारा एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किया जा चुका है।

इसके बाद डॉ. शिंदे की अध्यक्षता में एक और बैठक रखी गई। इसमें निवेशकों ने टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी विभागीय स्तर पर हो रही देरी का मुद्दा उठाया। इस पर डॉ. शिंदे आक्रोशित हो गए। उन्होंने निवेशकों से कहा- यदि विभाग में काम करना है तो मेरे हिसाब से करना पड़ेगा। हमें तो विभाग में 9 साल रहना है, ये लोग तो कुछ ही समय के मेहमान हैं। हमारे हिसाब से नहीं चलोगे तो हम कभी भी टेंडर निरस्त कर देंगे।

800 करोड़ रुपए का निवेश दांव पर

शिकायतकर्ता राजकुमार दीक्षित ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए राज्य में लगभग करीब 800 करोड़ रुपए का निवेश आने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस योजना से प्रदेश को आवारा पशुओं की समस्या से भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

दीक्षित ने कहा- सामाजिक संस्थाएं और निवेशक बिना किसी लाभ की भावना के केवल गौसेवा और गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से इस योजना से जुड़े हैं। ऐसे में एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा इस तरह का कदाचरण देश भर में सराही जा रही योजना को विफल करने का प्रयास है।

डिप्टी डायरेक्टर बोले- आरोप निराधार

आरोपों पर गौसंवर्धन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर प्रवीण शिंदे ने सफाई दी है। उन्होंने कहा- ऐसी किसी से कोई बात ही नहीं हुई। ये सारे आरोप निराधार हैं। वहीं, विभाग के डायरेक्टर पीएस पटेल ने मामला दिखाने की बात कही है।

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