
तो ईरान से खुल रहा दुनिया के पाषाण युग में लौटने का रास्ता…
अमेरिका ईरान युद्ध में एक बार फिर यह साबित हो गया है कि युद्ध के जरिए
विनाश किया जा सकता है, लेकिन किसी को जीता नहीं जा सकता। यही वजह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब यह धमकी देना पड़ रही है कि वह ईरान को पाषाण युग में लौटने को मजबूर कर देंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने ट्रंप के बयान पर पलटवार किया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप वाकई ‘घड़ी को पीछे घुमाकर’ उस दौर में लौटना चाहते हैं, ‘जब मध्य पूर्व में तेल या गैस का उत्पादन ही नहीं होता था’। और इससे पलटवार में हकीकत छिपी हुई है कि यदि ईरान पाषाण युग में लौटा तव पूरी दुनिया भी पाषाण युग में लौटने को मजबूर हो जाएगी। और शायद विकास की जगह विनाश का रास्ता इसी तरह
दुनिया में तबाही लाकर पाषाण युग का दरवाजा खोलने को तैयार है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसके नेता युद्ध समाप्त करने के लिए उनकी शर्तों पर सहमत नहीं होते, तो ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले किए जाएंगे। तेहरान के पश्चिम में स्थित करज शहर में निर्माणाधीन एक पुल पर बमबारी कर अमेरिका ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। इसमें आठ लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि, “हमारी सेना, जो दुनिया में कहीं भी सबसे महान और सबसे ताक़तवर है, उसने ईरान में जो कुछ बचा है उसे नष्ट करना अभी शुरू भी नहीं किया है।”
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा, “अधूरे पुलों समेत नागरिक ढांचों पर हमले करने से ईरानी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।” उन्होंने कहा था कि पुल पर किया गया हमला ‘अव्यवस्थित दुश्मन की हार और नैतिक पतन को ही दर्शाता है’। और अमेरिका की वैश्विक साख को हुआ नुकसान ‘कभी भी ठीक नहीं हो पाएगा’।
इस बीच जमीनी हालात और भी गंभीर हो रहे हैं। ईरानी सेना ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने दक्षिण इस्फहान में तीन और अमेरिकी विमानों को नष्ट कर दिया है। इनमें दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल हैं। ईरान के अनुसार ये विमान उस अमेरिकी पायलट को बचाने के मिशन पर थे जिसका एफ-15 जेट शुक्रवार यानी 3 अप्रैल 2026 को गिर गया था।हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका अधिकारी सुरक्षित बचा लिया गया है। पर इसके बाद भी पूरी दुनिया में अमेरिका की किरकिरी हो रही है। उसकी सैन्य क्षमताओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। और यह तय है कि अमेरिका भी बार-बार बैकफुट पर नजर आ रहा है। तबाही के रास्ते सभी को अपने घरों में भी तबाही का मंजर देखने को मजबूर करते हैं।
ट्रंप की इस बात पर सहमत हुआ जा सकता है कि पिछले 47 वर्षों में ईरान या उसके समर्थित समूहों ने कई चरमपंथी हमले और अन्य कार्रवाइयां कीं। ईरान की सत्ता को ‘हत्यारी’ माना जा सकता है। देश में हुए विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई में लोगों के मारे जाने की बात सही है। ईरानी सत्ता द्वारा फैलाई जा रही बर्बरता की बात का समर्थन नहीं किया जा सकता। और ऐसे नेताओं को परमाणु हथियार हासिल न करने देने की बात
भी ठीक मानी जा सकती है। लेकिन अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई ‘एपिक फ़्यूरी’ के नाम पर पूरी दुनिया को तबाही के रास्ते पर ले जाने की बात का समर्थन कतई नहीं किया जा सकता। क्योंकि ऐसे हालात गवाही दे रहे हैं कि ईरान के रास्ते पूरी दुनिया के पाषाण युग में जाने का रास्ता सभी के मन में डर पैदा कर रहा है। यदि अमेरिका ने यूटर्न नहीं लिया तो ईरान से दुनिया के पाषाण युग में लौटने का रास्ता खुल रहा है… इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं