एमपी में ऐसे खड़ा हुआ लॉरेंस गैंग का नेटवर्क: खरगोन फायरिंग केस में 10 करोड़ फिरौती, सोशल मीडिया से भर्ती और लोकल शूटरों के जरिए दहशत का खेल

खरगोन जिले में 16 मार्च की रात जैविक कॉटन कारोबारी दिलीपसिंह राठौर के घर पर फायरिंग हुई। पुलिस जांच में पता चला कि फायरिंग लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों ने की थी। मध्य प्रदेश में धमकी के बाद फायरिंग का यह लॉरेंस गैंग से जुड़ा पहला केस था।जांच में ये भी पता चला कि एमपी में इस गैंग को लॉरेंस का गुर्गा राजपाल सिंह चंद्रावत ऑपरेट कर रहा था। कारोबारी से 10 करोड़ की फिरौती मांगने वाले राजपाल ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। वहीं 15 अन्य लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

राजपाल का लॉरेंस गैंग और खरगोन केस से कनेक्शन

पुलिस जांच में पता चला कि राजपाल 10 साल से लॉरेंस गैंग से जुड़ा था। वह एमपी में गैंग का ऑपरेशन संभालने वाला प्रमुख किरदार था। सिग्नल एप के जरिए गैंग के संपर्क में रहता था। ये एप आसानी से डिटेक्ट नहीं होता। उसने नागदा से शुरुआत की और धीरे-धीरे इंदौर, देवास, खरगोन, रतलाम में भी एक्टिव हो गया।

मई 2022 में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद फरवरी 2023 में एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) राजपाल से भी पूछताछ कर चुकी है। तब पहली बार राजपाल का नाम लॉरेंस के साथ जुड़ा था।खरगोन के केस में उसी ने व्यापारी के घर फायरिंग करवाने की जिम्मेदारी ली। अपने लोगों से रेकी करवाई। शूटर उपलब्ध कराए। फिर फायरिंग का वीडियो भी बनवाया। बाद में यही वीडियो भेजकर 10 करोड़ की फिरौती मांगी गई।

FB, इंस्टा और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए युवाओं को जोड़ा

मध्यप्रदेश में गैंग का नेटवर्क खड़ा करने के लिए सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार बना। जांच में सामने आया कि गैंग से जुड़े लोकल हैंडलर फेसबुक, इंस्टाग्राम और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए ऐसे युवाओं की तलाश करते थे, जो पहले से आपराधिक प्रवृत्ति के हों या सिस्टम से नाराज हों।उन्हें ‘न्याय दिलाने’ और ‘अत्याचार के खिलाफ लड़ाई’ का नैरेटिव दिया जाता था। राजपाल खुद को समाज के पीड़ितों का सहारा बताकर युवाओं को प्रभावित करता था।

हमले के लिए लोकल लेवल पर ही शूटर तैयार किए जाते थे

गैंग सीधे अपने सदस्यों को सामने लाने से बचती थी। हमले और फायरिंग जैसे कामों के लिए लोकल लेवल पर ही शूटर तैयार किए जाते थे। इसके लिए छोटे अपराधियों, बदमाशों और ऐसे युवाओं को टारगेट किया जाता था, जिन्हें पैसों या गैंग में शामिल होने का लालच दिया जा सके।कई मामलों में पहली बार अपराध करने वाले युवाओं को भी इस्तेमाल किया गया, ताकि पुलिस की नजर सीधे गैंग के कोर नेटवर्क तक न पहुंच सके। इस रणनीति से गैंग के असली सदस्य पर्दे के पीछे सुरक्षित रहते थे और वारदात को अंजाम देने वाले चेहरे बार-बार बदलते रहते थे।

खरगोन में गैंग ने इस तरह कारोबारी के घर पर फायरिंग की थी।

गैंग का पूरा ऑपरेशन बेहद संगठित तरीके से चलता था

पुलिस जांच में पता चला कि गैंग का पूरा ऑपरेशन बेहद संगठित तरीके से चलता था। सबसे पहले टारगेट तय किया जाता था। आमतौर पर बड़े व्यापारी, रियल एस्टेट कारोबारी या जमीन विवाद से जुड़े लोग ही टारगेट होते थे।

इसके बाद उनकी पूरी प्रोफाइल तैयार की जाती थी। परिवार के सदस्यों से लेकर उनके रोजमर्रा के मूवमेंट तक की जानकारी जुटाई जाती थी। फिर इंटरनेशनल नंबर से कॉल कर 5 से 10 करोड़ रुपए तक की फिरौती मांगी जाती थी। मना करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी।जब टारगेट झुकता नहीं था, तब शूटर को एक्टिव किया जाता था। उसे साफ निर्देश होता था- हत्या नहीं करनी, बल्कि फायरिंग कर डर का माहौल बनाना है। इसके बाद फिरौती का दबाव और बढ़ा दिया जाता था।

गैंग से जुड़े लोग खुद को बड़े गैंगस्टर की तरह पेश करते थे

गैंग सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं रहती थी, बल्कि उसे सुनियोजित तरीके से प्रचारित भी करती थी। फायरिंग जैसी घटनाओं के वीडियो बनवाए जाते और उन्हें आगे इस्तेमाल किया जाता था।

सोशल मीडिया पर गैंग से जुड़े लोग खुद को बड़े गैंगस्टर की तरह पेश करते थे। राजपाल और उसके साथियों ने आनंदपाल सिंह और लॉरेंस बिश्नोई जैसे गैंगस्टर्स का लुक और स्टाइल कॉपी किया।इसका मकसद साफ था कि इलाके में ऐसा माहौल बने जिससे नाम सुनते ही डर पैदा हो जाए और बिना वारदात के ही फिरौती मिल जाए।

राजपाल का साथी योगेश भाटी लॉरेंज जैसी हूडी पहनकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था।

अमेरिका से कॉल कराए जाते थे ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो

पूरे नेटवर्क में धमकी भरे कॉल सबसे अहम कड़ी थे। ये कॉल आमतौर पर विदेश से, खासकर अमेरिका से कराए जाते थे, ताकि नंबर इंटरनेशनल दिखे और उसे ट्रेस करना मुश्किल हो।कॉल करने वाले के पास टारगेट की पूरी जानकारी होती थी। जैसे- परिवार, कारोबार और दिनचर्या तक। इससे पीड़ित को लगता था कि गैंग उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रही है। यही डर कई मामलों में इतना प्रभावी होता था कि पीड़ित पुलिस तक पहुंचने से बचता था और सीधे फिरौती देने को मजबूर हो जाता था।

गैंग के पास से कई फोन भी बरामद हुए हैं।

सरेंडर से पहले राजपाल बोला- पुलिस परिवार को प्रताड़ित कर रही

मैं निजी स्कूल चलाता था, लेकिन कुछ लोगों ने उसे बंद करा दिया। इसके बाद लॉरेंस गैंग से जुड़ गया। हमारा मकसद समाज में हो रहे गलत कामों के खिलाफ कार्रवाई करना है।पुलिस से बचकर हम कभी भी बाहर आ सकते हैं। नागदा के कुछ उद्योगपति भी हमारे निशाने पर हैं। पुलिस परिवार को प्रताड़ित कर रही है, इसलिए सरेंडर कर रहा हूं। सोशल मीडिया के जरिए प्रताड़ित लोग हमसे जुड़ते हैं और हम उनकी मदद करते हैं।लॉरेंस से सीधे मुलाकात नहीं हुई, लेकिन गैंग चलाने वालों से संपर्क है। उसे बड़ा भाई मानते हैं। हमारा साथी योगेश भाटी पुलिस की गिरफ्त में है।

राजपाल ने सरेंडर से पहले वीडियो जारी कर मीडिया को अपने बारे में बताया।

पुलिस कार्रवाई जारी, सोशल मीडिया पर भी नजर

खरगोन एसपी रवींद्र वर्मा ने बताया कि खरगोन प्रकरण में 16 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कुछ की तलाश में छापेमारी की जा रही है। योगेश भाटी हमारी गिरफ्त में नहीं है। राजपाल झूठ बोल रहा है। वह फिलहाल फरार है। राजपाल से पूछताछ में लारेंस गैंग की भूमिका सामने आई है। उससे मिले हर छोटे-बड़े क्लू पर कार्रवाई की जा रही है।इधर, उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा, राजपाल पर पुराने प्रकरण भी थे। सोशल मीडिया पर अभी कोई ऐसी गैंग एक्टिव नहीं है। फिर भी हमारी साइबर टीमें लगातार नजर रखे हुए हैं। कोई अपराधी किसी को सोशल मीडिया पर धमकाने का प्रयास करता है तो पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है।

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