उज्जैन में संन्यास को लेकर उठे विवाद के बीच स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर संतों के आरोपों का जवाब दिया है।
उन्होंने कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से अपमान सहती आई हैं और अब मानसिक रूप से मजबूत हो चुकी हैं। उन्होंने इसे अपनी आस्था और कर्म का मार्ग बताते हुए कहा कि “अगर राम ने मेरी किस्मत में संन्यास लिखा है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता।
बता दें कि महाकुंभ 2024 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया ने हाल ही में सन्यास लिया है वह अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। वे आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं।
उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। हालांकि, उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज जताया था।
मीरा, जीसस और बुद्ध ने भी झेला अपमान
वीडियो में हर्षा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी ने सत्य और अपने कर्म का मार्ग चुना, उसे विरोध और अपमान का सामना करना पड़ा। उन्होंने मीरा, जीसस, गौतम बुद्ध, भगवान राम और सीता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में सत्य के मार्ग पर चलने वालों को परीक्षा देनी पड़ी है, और नारी को तो विशेष रूप से अपमान सहना पड़ा है।
डेढ़ साल से दे रही हूं अग्नि परीक्षा
उन्होंने कहा कि उनके संन्यास पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन वह लंबे समय से मानसिक और सामाजिक परीक्षा से गुजर रही हैं। “मैं पिछले डेढ़ साल से यही अपमान के घूंट पी रही थी, अब मैं मजबूत हो गई हूं।

परिवर्तन कभी भी संभव, वाल्मीकि इसका उदाहरण
हर्षा ने संतों के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि संन्यास बचपन से ही धारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में ही महर्षि वाल्मीकि जैसे उदाहरण हैं, जहां व्यक्ति जीवन में कभी भी परिवर्तन कर सकता है। यदि परिवर्तन संभव नहीं, तो फिर ऐसे उदाहरण क्यों बताए जाते हैं।
मुझे जानबूझकर निशाना बनाया गया
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ प्रचार और प्रसिद्धि के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। आपको एक मुद्दा चाहिए था वायरल होने का, और आपने मुझे अपना शिकार बना लिया।
हर्षा ने संतों की भाषा पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एक महिला के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना संतों की मर्यादा के विपरीत है। क्या यही संस्कार हैं, जिनकी बात की जाती है।
युवाओं को धर्म से जोड़ने की अपील
वीडियो में उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे युवाओं को धर्म से जोड़ें, न कि उन्हें दूर करें। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवाद और बयान युवाओं को धर्म से विमुख कर सकते हैं।
हर्षा ने कहा कि उनका मार्ग ईश्वर द्वारा निर्धारित है और उन्हें किसी के आदेश की जरूरत नहीं है। होइहि सोइ जो राम रचि राखा… मेरा ईश्वर सब देख रहा है, कहते हुए वीडियो में अपनी बात खत्म की।
