इंदौर जुआकांड: IAS फार्महाउस रेड में नाम हटाने के दबाव के आरोप, जुआ पकड़ने वाले टीआई के सस्पेंशन पर हाईकोर्ट के सख्त सवाल; फैसला सुरक्षित

इंदौर के चर्चित जुआकांड में सस्पेंड टीआई के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान जहां पुलिस की कार्रवाई पर सख्त सवाल उठे, वहीं टीआई ने आरोप लगाया कि जुआ पकड़ने के बाद उन पर महिला आईएएस अधिकारी का नाम एफआईआर से हटाने का दबाव बनाया गया

पुलिस ने IAS अफसर के फॉर्म हाउस पर 18 लोगों को जुआ खेलते पकड़ा था।

कोर्ट ने पूछा- जब कार्रवाई हुई तो आईएएस के बयान क्यों नहीं लिए गए और फार्महाउस पर CCTV क्यों नहीं थे? साथ ही टिप्पणी की कि अगर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी को ही सस्पेंड किया जाएगा, तो कोई निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा। सोमवार को करीब दो घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

IAS अफसर के फॉर्म हाउस पर जुआ खेलते हुए लोगों को पकड़ा गया था।

IAS फार्महाउस पर पकड़ा गया जुआ 10-11 मार्च की रात इंदौर में मप्र वित्त निगम की एमडी और 2009 बैच की आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर जुआ खेलते लोगों को पकड़ा गया था। इसके बाद मानपुर टीआई लोकेन्द्र सिंह हिहोरे, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को सस्पेंड कर दिया गया। कुछ दिन बाद एसआई और एएसआई बहाल हो गए, लेकिन टीआई पर कार्रवाई जारी रही और उन्हें बुरहानपुर अटैच कर दिया गया।

टीआई बोले- याचिका लगाने पर प्रताड़ित किया टीआई हिहोरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन पर आईएएस का नाम एफआईआर में न जोड़ने और घटनास्थल बदलने का दबाव बनाया गया। इनकार करने पर उसी दिन सस्पेंड कर दिया गया। याचिका लगाने के बाद ट्रांसफर कर प्रताड़ित किया गया।

दो याचिकाएं, सुनवाई जारी

टीआई ने यह भी कहा कि 15 मार्च को सिमरोल में बड़ा जुआ पकड़ा गया, लेकिन वहां के टीआई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर भी कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। टीआई ने सस्पेंशन और चार्जशीट को चुनौती देते हुए दो याचिकाएं दायर की हैं। सस्पेंशन पर फैसला सुरक्षित है, जबकि चार्जशीट पर सुनवाई बाकी है।

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