शिलॉन्ग हनीमून मर्डर केस में बड़ा मोड़: गिरफ्तारी में खामियां और लंबी हिरासत के बीच 320 दिन बाद सोनम रघुवंशी को जमानत, कोर्ट की शर्त—इंदौर नहीं लौटेंगी, ट्रायल तक शिलॉन्ग में रहना होगा


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इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा मोड़ आया है। मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में हनीमून के दौरान पति राजा के मर्डर की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के करीब 320 दिन बाद जमानत मिल गई है।

सोनम को मंगलवार देर शाम जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया।

हालांकि, अदालत ने शर्त रखी है कि ट्रायल के दौरान सोनम को शिलॉन्ग में ही रहना होगा। शिलॉन्ग कोर्ट ने सोमवार को उसकी जमानत मंजूर कर ली। मंगलवार को सोनम के पिता देवी सिंह खुद शिलॉन्ग पहुंचे और जमानत भर दी।इसके बाद मंगलवार शाम को सोनम जेल से रिहा हो गई। रिहाई के बाद मीडियाकर्मियों ने सवाल किए तो पिता और बेटी बिना कुछ कहे ही वहां से निकल गए। बता दें कि कोर्ट ने चौथी सुनवाई के बाद सोनम को राहत दी है।

कोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए

सोनम की जमानत की मुख्य वजह गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां रहीं। उसके वकील ने दलील दी कि 7 जून 2025 को गाजीपुर में गिरफ्तारी के समय कारण स्पष्ट नहीं बताया गया था। अदालत ने जांच में दस्तावेजों में गंभीर त्रुटियां पाईं।कोर्ट ने अनुच्छेद 22(1) का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत कारण बताना अनिवार्य है। ऐसा न करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

पुलिस की 4 गलतियां, जो सोनम के पक्ष में गईं

  • अधूरा अरेस्ट फॉर्म: गिरफ्तारी के समय फॉर्म में चेक बॉक्स खाली थे। यह स्पष्ट नहीं था कि सोनम को किन धाराओं में हिरासत में लिया गया?
  • धाराओं का घालमेल: केस डायरी और गिरफ्तारी के कागजों में अंतर मिला। मामला धारा 103(1) का था, लेकिन कई दस्तावेजों में 403(1) दर्ज था।
  • वकील की अनुपस्थिति: रिकॉर्ड में प्रमाण नहीं मिला कि गाजीपुर में पहली पेशी के दौरान उसके पास कानूनी सलाह के लिए वकील था।
  • बचाव के अधिकार का हनन: कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी को सही आरोप पता नहीं होंगे, तो वह शुरुआती चरण में प्रभावी बचाव कैसे कर पाएगी?

10 जून 2025 को सोनम समेत पांचों आरोपियों को लेकर मेघालय पुलिस शिलॉन्ग पहुंची थी।

लंबी न्यायिक हिरासत भी अहम वजह बनी

सोनम के वकील ने दलील दी कि वह 9 जून 2025 से जेल में बंद है और 10 महीने से ज्यादा न्यायिक हिरासत में बिता चुकी है। इस दौरान केस की प्रगति धीमी रही है।

उन्होंने बताया कि 5 सितंबर 2025 को केस की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हुई थी। 28 अक्टूबर 2025 को आरोप तय हुए। लेकिन अब तक 90 गवाहों में से केवल 4 की ही गवाही हो सकी है। आखिरी गवाह 3 फरवरी 2026 को पेश हुआ था।

बचाव पक्ष की तरफ से कोर्ट में दी गई दलील।

प्रोफाइल और परिस्थितियों का भी लाभ मिला

मेघालय पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित कर सकती है। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे दोष साबित हो। चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हैं और सबूत कोर्ट की निगरानी में हैं, इसलिए छेड़छाड़ की आशंका निराधार है।

वकील ने तर्क दिया कि सोनम इंदौर की स्थायी निवासी है और बड़े कारोबारी परिवार से आती है, जिसका व्यापार कई राज्यों में फैला है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए फरार होने की संभावना नहीं है। 25 वर्षीय महिला होने के कारण जमानत में नरमी के सिद्धांत का भी हवाला दिया गया।

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