मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन के लिए NEET की परीक्षा हाल ही हुई। उसमें जिस तरीके से अपने ही बच्चों को बेइज्जत किया गया, वह शर्मनाक है।

विद्यार्थियों को टेररिस्ट मानना बंद करो।
NEET के परीक्षार्थियों को पहले ही लंबी सी लिस्ट दे दी जाती है- ये करो, ये मत करो !परीक्षार्थियों से कहा जाता है कि वे परीक्षा शुरू होने के समय से कम से कम एक घंटा पहले परीक्षा स्थल पर पहुंचें। बाकायदा ड्रेस कोड भी है : हल्के रंग के कपड़े पहनकार आना, साधारण पैंट हो, पाँव में स्लीपर या सेंडल हो, पूरी बांह की शर्ट / कुर्ता वर्जित है। लड़कियों के लिए हैवी एंब्रॉयडरी वालेकपड़ों की मनाही है। बड़े-बड़े बटन कीकुर्ती / जैकेट, टोपी, चश्मा, स्कार्फ आदि नहीं पहनें! जिन कपड़ों में, जैसे जींस में मेटल के बटन होते हैं, जिप्पर होते हैं, वह ना पहन कर आएं। कोई भी जूलरी न पहनें, इयररिंग, नेकलेस, चूड़ी यहां तक की नाक में कांटा भी ना पहने ! चाभी भी नहीं रख सकते। चिल्लर भी। लेकिन पगड़ी, हिजाब, कंठीमाला की अनुमति है! शार्पनर, पेन, पेंसिल, इरेज़र, स्केल, ज्योमेट्री बॉक्स आदि भी नहीं लेकर जा सकते ! कोई भी मैटेलिक आइटम, चाहे वह घड़ी हो, लेकर नहीं जा सकते।
परीक्षार्थी अपने साथ ट्रांसपेरेंट वाटर बोतल लेकर जा सकते हैं या छोटा सी ट्रांसपेरेंट सैनिटाइजर बोतल भी इस्तेमाल के लिए ले जा सकते हैं ! अगर डायबिटिक हैं तो कुछकोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं ले जा सकते – मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, फिटनेस बैंड, इयरफोन, केल्सी, पेन ड्राइव आदि कुछ भी। वहां सामान रखने की कोई व्यवस्था आम तौर पर नहीं होती। बेचारे अभिभावक बच्चों को साथ लेकर जाते और आते हैं।
कई परीक्षा केन्द्रों पर विद्यार्थियों से बेइज्जती की खबरें दुःखी कर देती हैं। एक लड़की को, जो अपनी नाक में कांटा पहने हुए थी, जद्दोजहद करनी पड़ी। कांटा निकल नहीं रहा था तो उसे निकालने के लिए लेज़र की मदद लेने के लिए भागना पड़ा। कुछ अति उत्साही चेकिंग स्टाफ बेइज्जती करने में अपनी शान समझता है।
कई लड़कियों को केवल इसीलिए बेइज्जत किया गया कि उन्होंने जो ब्रा पहना था, उसमें मैटल के हुक लगे थे। एक लड़की से तो ब्रा उतारने के लिए भी कहा गया? कहाँ उतारती? ब्राह्मण छात्रों से जनेऊ उतारने के लिए कहा गया !
चीटिंग रोको, चीटिंग मत होने दो, पर उसके नाम पर ऐसी सख्त व्यवस्था? हमारे ही बच्चे हैं! देश छोड़कर भाग नहीं रहे हैं ! आगे जाकर डॉक्टर बनेंगे ! उन्हें ऐरा गेरा मत समझो। उन्हें क्या, किसी को भी ऐवें मत समझो !दुनिया के कई देशों में ऐसी कठिन परीक्षाएं होती हैं! वहां इनविजिलेशन बहुत सख़्त रहता है, लेकिन विद्यार्थियों की गरिमा का
दुनिया के कई देशों में ऐसी कठिन परीक्षाएं होती हैं! वहां इनविजिलेशन बहुत सख़्त रहता है, लेकिन विद्यार्थियों की गरिमा का ध्यान रखा जाता है। इलेक्ट्रॉनिक जैमर होते हैं, हॉल में कैमरों का फोकस रहता है। भारत में यह सब क्यों नहीं हो सकता?क्या हम अपने ही देश में, अपने बच्चों के साथ गरिमामय व्यवहार की अपेक्षा भी नहीं कर सकते?