शहर के कई प्रोजेक्ट सिर्फ कागजों में बंद होकर रह गए हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधि तय नहीं कर पा रहे कि ये प्रोजेक्ट कैसे आगे बढ़ें। इंदौर बायपास की 30 किलोमीटर सर्विस रोड को फोर लेन करने का प्रस्ताव पांच साल पहले मंजूर हुआ था।

डीपीआर भी बनी और नए कंट्रोल एरिया का नोटिफिकेशन भी हो गया, लेकिन अब तक तय नहीं हो पाया कि इसे बनाएगा कौन? छावनी अनाज मंडी की शिफ्टिंग का मामला मालिकाना हक में उलझ गया है तो नेहरू स्टेडियम के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भी सुझाव और डीपीआर तक ही सीमित रह गया।
बायपास : 2021 में बना था प्रस्ताव
बायपास पर सर्विस रोड को फोर लेन करने का प्रस्ताव 2021 में बना था। 408 करोड़ की डीपीआर भी बनी और नए कंट्रोल एरिया का नोटिफिकेशन भी हो गया। मामला इस बात पर अटका है कि बनाने का पैसा कौन दे और बनाए कौन सी एजेंसी?
देरी का असर : हजारों वाहन चालक, स्कूल-कॉलेज के बच्चे जाम और गड्ढों के बीच से गुजर रहे हैं। बारिश में यहां और परेशानी बढ़ेगी। इंदौर-भोपाल, देवास रूट की बसें भी यहां हर दिन रेंगते हुए निकलती है और यात्रियों को परेशानी होती है।
छावनी मंडी : मालिकाना हक पर पेंच
छावनी अनाज मंडी को मोरोद शिफ्ट करने की 15 साल पुरानी योजना है। आईडीए को नोडल एजेंसी बनाकर प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने के लिए कहा। 10 लाख खर्च कर प्रोजेक्ट बना भी, लेकिन जिस जमीन पर इसे शिफ्ट करना था, वहां वन विभाग ने एनओसी देने में आपत्ति ले ली। देरी का असर : शिफ्टिंग में देरी का सीधा असर किसानों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। शहर के बीच ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। नो-एंट्री नियमों के कारण किसानों को रात में अपनी उपज मंडी में लानी पड़ती है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
नेहरू स्टेडियम : 500 करोड़ दांव पर
नेहरू स्टेडियम के कायाकल्प के लिए नगर निगम ने 500 करोड़ से ज्यादा का प्रोजेक्ट बनाया था। स्मार्ट सिटी कंपनी ने पीपीपी मॉडल पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की योजना तैयार की, लेकिन रेसीडेंसी क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण पर आपत्तियों के कारण इसका मामला अटका हुआ है। देरी का असर : शहर में एक बड़े स्टेडियम का सही फायदा खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा है, जबकि शहर में भी अब खेल मैदानों की संख्या न के बराबर है। निजी टर्फ और इंडोर स्टेडियम के शुल्क ज्यादा हैं।
सर्विस रोड की फंडिंग को लेकर चर्चा जारी
बायपास की सर्विस रोड पर राज्य शासन के स्तर पर फंडिंग और एजेंसी तय करने को लेकर चर्चा चल रही है। जल्द ही इस पर निर्णय होगा। मंडी में जमीन की स्थिति स्पष्ट होते ही आगे काम शुरू करेंगे। मंडी से जमीन की डिटेल निकालने के लिए कहा है। वन विभाग की जमीन लेंगे तो दूसरी जमीन देंगे। स्टेडियम का प्रोजेक्ट फाइनल है, निगम स्तर पर उसमें निर्णय होना है। – शिवम वर्मा, कलेक्टर