शहर की प्रसिद्ध सराफा चौपाटी में दुकान आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। कई व्यापारियों ने सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता पर आवंटन प्रक्रिया में पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया है। व्यापारियों का आरोप है कि वर्षों से व्यवसाय कर रहे पात्र लोगों की अनदेखी कर कुछ अन्य लोगों को लाभ पहुंचाया गया।

पीड़ित व्यापारियों के अनुसार नगर निगम को सौंपी गई पात्रता सूची में कई पुराने और वास्तविक व्यापारियों के नाम शामिल नहीं किए गए, जबकि उनके स्थान पर अन्य लोगों के नाम जोड़ दिए गए। व्यापारियों का दावा है कि सराफा चौपाटी में 20 से 40 वर्षों से व्यवसाय कर रहे कई परिवारों के पास नगर निगम के पुराने लाइसेंस और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें आवंटन प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
व्यापारियों का आरोप है कि दुकान आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और सूची में शामिल नामों में बाद में बदलाव किए गए। उनका कहना है कि प्रारंभिक सूची में शामिल कुछ नाम अंतिम सूची से हटा दिए गए, जिससे व्यापारियों में असंतोष बढ़ गया

आठ व्यापारियों ने दायर की याचिका
मामले में आठ व्यापारियों ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सराफा चौपाटी एसोसिएशन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पात्र व्यापारियों को न्याय दिलाने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने के लिए उन्होंने कोर्ट की शरण ली है।
व्यापारियों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने मेयर, मंत्री, नगर निगम कमिश्रर, कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार ज्ञापन देकर अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
एक मामले का उल्लेख करते हुए व्यापारियों ने बताया कि कुछ लोगों के नाम प्रारंभिक सूची में दर्ज होने के बावजूद अंतिम सूची से हटा दिए गए। वहीं लंबे समय से सराफा क्षेत्र में आजीविका चला रहे कुछ लोगों को व्यापारी की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया, जिससे नाराजगी और बढ़ी है।
पीड़ित व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि स्वतंत्र जांच कराई जाए तो आवंटन प्रक्रिया से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। व्यापारियों की मांग है कि पूरी सूची की पुनः समीक्षा कर वास्तविक और वर्षों से व्यवसाय कर रहे पात्र व्यापारियों को प्राथमिकता के आधार पर दुकानें आवंटित की जाएं।