मध्यप्रदेश में भी इस्तीफों वाला मानसून आने को है… कौशल किशोर चतुर्वेदी


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मध्यप्रदेश में भी इस्तीफों वाला मानसून आने को है…
छत्तीसगढ़ की राजनीति में हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट फेरबदल और मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 18 जून 2026 की देर रात मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण आपात बैठक बुलाई गई। बैठक आपात थी इसलिए कयास भी उसके अनुरूप ही लगाए गए। पूरे छत्तीसगढ़ में इस तरह का माहौल बना कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व गुजरात की तर्ज पर एक बार में सभी पुराने चेहरों को बदलकर नया मंत्रिमंडल गठित करना चाहता है। और इसीलिए आपात बैठक बुलाकर सभी मंत्रियों के इस्तीफे लिखवा लिए गए हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से साफ किया गया कि सभी कैबिनेट मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की गई है। सभी मंत्रियों को देर रात मुख्यमंत्री निवास उनके कामकाज की समीक्षा के लिए तलब किया गया था। लगभग तीन घंटे चली इस बैठक में मंत्रियों से उनके ढाई साल के कार्यकाल का ब्यौरा और विभागों की समीक्षा रिपोर्ट ली गई। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इन इस्तीफों की खबरों को खारिज करते हुए इसे केवल एक रूटीन प्रक्रिया और कामकाज की समीक्षा बताया। तो कांग्रेस ने इस आपात बैठक की आड़ में सरकार पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए दावा किया है कि सरकार में आंतरिक असंतोष और भ्रष्टाचार के मुद्दों के कारण नेतृत्व या मंत्रियों के विभागों में बड़े फेरबदल हो सकते हैं। कांग्रेस ने तो यहां तक आरोप लगा दिया कि मंत्रियों ने भी मुख्यमंत्री के कामकाज की समीक्षा किए जाने की मांग उठाई। इसी मुद्दे पर बैठक में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और घमासान की स्थिति बनी। कांग्रेस ने आरोप मढ़ा कि सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और अंदरूनी असंतोष लगातार बढ़ रहा है। खैर यह बात तो हुई छत्तीसगढ़ की, लेकिन देखा जाए तो मध्यप्रदेश में भी लगातार मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा चल रही है। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा, यह किसी को भी भनक नहीं है। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच गुजरात मॉडल पर विस्तार की चर्चा भी लगातार होती रहती है। दरअसल ‘मंत्रिमंडल विस्तार का गुजरात मॉडल’ के मुताबिक, मंत्रिमंडल के सभी चेहरों को एक साथ बदलकर सभी नए चेहरे मंत्री के रूप में शपथ लेते हैं। गुजरात में विधानसभा चुनावों के पहले अक्सर इस तरह का प्रयोग होता रहा है। लेकिन गुजरात के अलावा अन्य किसी प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा कुछ करने की हिम्मत अभी तक नहीं जुटा पाई है। पर जिस तरह से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मुख्यमंत्री बनाने में भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने नया प्रयोग कर एकदम नए चेहरों को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया है। इससे अब मंत्रिमंडल विस्तार में भी ऐसे नए प्रयोग की संभावनाएं लगातार जताई जा रही हैं। और भले ही इन राज्यों में सौ फीसदी चेहरे न बदले जाएं, तब भी यह माना जा रहा है कि जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा, तब 60 से 90 फीसदी तक चेहरे बदलकर भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इन राज्यों के मतदाताओं को नए प्रयोग से रूबरू करा सकता है।
मध्य प्रदेश में विस्तार को लेकर माहौल कई बार बन चुका है। कभी विस्तार के जरिए दिग्गजों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाने की चर्चाएं चलती हैं तो कभी आरोपों से घिरे मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाकर विस्तार के आकार लेने का कुहासा कई दिनों तक छाया रहता है। पर वक्त के साथ-साथ कयासों के बादल एकदम साफ हो जाते हैं और दिन-रात पहले की तरह सामान्य नजर आने लगते हैं। पर अब इस बात पर तीनों राज्यों में मुहर लगाई जा सकती है कि मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पारी शुरू करने वाले तीनों राज्यों के सीएम अब पूरी तरह से कॉन्फिडेंट हैं। ऐसे मुख्यमंत्रियों को कमजोर समझने वाले इन तीनों राज्यों के दिग्गज अब शायद खुद को लाचार और कमजोर समझने को मजबूर हैं। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार के गुजरात मॉडल की बात करें तो एक बार में सारे इस्तीफे लेकर सभी नए चेहरों को मंत्रिमंडल में लाने का फैसला पूरी तरह से केन्द्रीय नेतृत्व ही करता है। ऐसे में इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस अति आत्मविश्वास में नहीं रह सकते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी राय को कोई खास तवज्जो मिलने वाली है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भी इस बात का अहसास सभी को हो चुका है। तो कार्यकर्ता आधारित भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री से लेकर आम कार्यकर्ता तक सभी कार्यकर्ता ही हैं, यह धारणा स्थायी है। इसलिये कब कौन कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री बन जाए या मुख्यमंत्री, कार्यकर्ता बन जाए… इसका अंदाजा भी कोई नहीं लगा सकता। खासतौर से 2014 के बाद पार्टी के सभी दिग्गजों को जब ‘मार्गदर्शक मंडल मॉडल’ पर कार्यकर्ता के रूप में स्थापित किया गया, उसके बाद भाजपा में शायद ही किसी के मन में ऐसी गलतफहमी रह गई हो कि पार्टी में उसका कद कार्यकर्ता से बहुत बड़ा है। यदि किसी के मन में ऐसी गलतफहमी अब भी है, तो उन्हें आईना दिखाने के लिए वक्त तैयार खड़ा है। ऐसी गलतफहमी रखने वाले भाजपा कार्यकर्ता के विरोधी यह बात भलीभांति जानते हैं।
मध्यप्रदेश में तो भाजपा वैसे भी, नए-नए प्रयोग करने में कोई संकोच नहीं करती। संगठन महामंत्री के बिना भी भाजपा अपने कदमों को पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ा सकती है, मध्यप्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता फिलहाल इस अनुभव को भलीभांति महसूस कर चुके हैं। एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री वाला कॉन्सेप्ट भी भाजपा मॉडल के रूप में अपना रही है। फिलहाल मध्यप्रदेश में मानसून के साथ-साथ यूसीसी यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड यानि समान नागरिक संहिता की धूम मची हुई है। तो यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या मध्यप्रदेश में भी इस्तीफों वाला मानसून आने वाला है… हालांकि मौसम की भविष्यवाणी करने वाले डाप्लर राडार की तरह, राजनीति में ऐसा कोई पैमाना नहीं है, जिसके आधार पर इस्तीफों वाले मानसून की भविष्यवाणी की जा सके। हाँ पर यह बात सही है कि मध्यप्रदेश में इस्तीफों वाला मानसून आने को है और यह कभी भी आ सकता है…20 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक प्रस्तावित मानसून सत्र के पहले या फिर उसके बाद कभी भी।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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