आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी AI अगले 10 साल में इंसानी सभ्यता को खत्म कर सकती है। नोबेल प्राइज विनर और AI को विकसित करने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल जेफ्री हिंटन ने यह चेतावनी दी है। हालांकि, वे इसकी 10% आशंका जताते हैं।एआई के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन। हिंटन ने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा- AI के इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान होने की स्थिति पहली बार सामने आ रही है, इसलिए खतरे का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।

दरअसल, हालिया टेस्ट में कुछ AI मॉडल्स ने बिना इंसानी मदद के सुरक्षा घेरा तोड़कर सर्वर तक पहुंच बनाई। वहीं, एक टेस्ट में AI ने खुद को बंद होने से बचाने के लिए अधिकारी के निजी अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी भी दी।
पहले 30-50 साल दूर लगता था खतरा, अब समय 10 साल तक सिमटा
हिंटन की चिंता नई नहीं है, लेकिन समय-सीमा को लेकर उनका अनुमान बदलता रहा है। दिसंबर 2024 में हिंटन ने कहा था कि अगले 30 साल में AI के कारण इंसानी सभ्यता खत्म होने की 10% से 20% आशंका हो सकती है। अब उनके ताजा बयान में सवाल अगले 10 साल का है।यानी उनकी चिंता सिर्फ यह नहीं है कि AI कभी खतरनाक हो सकती है, बल्कि यह भी है कि यह स्थिति पहले सोचे गए समय से काफी जल्दी आ सकती है।
AI को लेकर हिंटन की 3 अहम बातें…
AI ज्यादा बुद्धिमान हुआ तो खतरा बढ़ेगा: आज AI कई काम इंसानों से तेज कर सकता है। वह लिख सकता है, कोड बना सकता है, तस्वीर-वीडियो बना सकता है और बहुत सारी जानकारी समझ सकता है। अगर भविष्य में ऐसा AI बन गया जो लगभग हर दिमागी काम में इंसानों से बेहतर हो, तो हालात बदल सकते हैं और समस्याएं बढ़ सकती हैं।
AI खुद को बेहतर बनाने लगे तो खतरा बढ़ेगा: अभी AI को बेहतर बनाने का काम इंसान करते हैं। लेकिन अगर भविष्य में AI खुद अपनी कमियां दूर करने, अपनी क्षमता बढ़ाने और बेहतर AI बनाने लगे, तो उसे काबू करना मुश्किल हो जाएगा।AI को रोकने के बजाय सुरक्षा नियम बने: AI को रोकने के बजाय दुनिया के देशों और कंपनियों को मिलकर इसकी सुरक्षा पर काम करना चाहिए। यानी AI जितना ताकतवर बने, उसे काबू में रखने के तरीके भी उतने ही मजबूत होने चाहिए।
AI की दुनिया में क्या चल रहा है और इसका हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, 4 सवालों के जरिए समझिए …
सवाल-1: ‘2030 तक AI हम सबको मार सकता है’, इस दावे का मतलब क्या है?
जवाब: 1 नवंबर 2023 को भारत समेत 28 देशों और यूरोपीय संघ ने भी AI से जुड़े साइबर हमले, गलत सूचना और नियंत्रण खोने जैसे गंभीर खतरों को माना था। संघ ने कहा था कि खतरा तब होगा, जब भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI इंसानों के कंट्रोल से बाहर होकर इतना बड़ा नुकसान करे कि मानव सभ्यता के अस्तित्व पर ही संकट आ जाए।
माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने 2023 में लिखा था, ‘AI इंसानों को कंट्रोल कर सकता है। अगर उसे लगा कि इंसान उसके लिए खतरा है, तो वो हमारी बात सुनना बंद कर देगा।’
सवाल-2: AI की दुनिया में ऐसा क्या चल रहा, जिससे सभी डरे हुए हैं?
जवाबः ऐसी आशंकाओं के पीछे दो बड़े आधार हैं…
1. AI अब सुपरइंटेलिजेंट बन रहा है
AI को इंसानों ने बनाया और वही इसे सुधारते रहे हैं। लेकिन अब AI खुद को लगातार बेहतर बनाने में जुट गया है। वो अपनी कमियां पकड़ता है और उन्हें सुधारता है। यानी इंसानों की जरूरत घटती जा रही है।नए AI मॉडल अपनी सोच और तर्क को छिपाने में बेहतर हो रहे हैं। इससे उन पर नजर रखना मुश्किल होता जा रहा है।
पहले AI से सवाल पूछो और वो जवाब देता था। लेकिन अब AI एजेंट से कहा जा सकता है कि इस समस्या को हल करो। वो खुद इंटरनेट और कंप्यूटर टूल्स का इस्तेमाल करता है, फैसले लेता है और समस्या को सुलझाता है। चाहे घंटों लग जाएं। हाल ही में 10,000 AI एजेंट्स ने 90 साल पुरानी Navier-Stokes गणित समस्या को सिर्फ 88 घंटे में सुलझा दिया।
2. इंसानों को चकमा देने लगा है AI
ओपन AI के मुताबिक, जुलाई 2026 में टेस्ट के दौरान उसके दो AI मॉडल जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के।
एंथ्रोपिक के टेस्ट में मॉडल क्लॉड ओपस 4 ने खुद को बंद होने से बचाने के लिए एक अधिकारी के निजी अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी दी।यह टेस्ट OpenAI, Google, Meta समेत 16 बड़े मॉडल्स पर दोहराया गया और ज्यादातर मॉडल्स ने मौका मिलने पर ऐसा ही बर्ताव किया।
सवाल-3: तो क्या AI को कंट्रोल नहीं किया जा सकता?कोशिशें हो रही हैं, लेकिन अभी इन्हें पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता।कंपनियां खुद सुरक्षा नियम बना रही हैं: एंथ्रोपिक और OpenAI ने खतरनाक AI क्षमताओं के लिए अपने-अपने सुरक्षा नियम बनाए हैं। लेकिन इन नियमों को कंपनियां खुद तय और बदल सकती हैं। यही सबसे बड़ी चिंता है।सरकारें भी नियम बनाने लगी हैं: अमेरिका और भारत में AI को लेकर नए नियम और गाइडलाइंस पर काम हो रहा है। लेकिन अभी दुनिया भर में AI के लिए एक जैसे सख्त नियम नहीं हैं।
सवाल-4: AI अगले कुछ सालों में हमारी जिंदगी कैसे बदल सकता है?
जवाब: डारियो अमोदेई का दावा है कि अगले 1 से 5 साल में AI की वजह से एंट्री लेवल की आधी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। अगले 5 सालों में दुनिया में बेरोजगारी दर 20% तक पहुंच जाएगी। हालांकि, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग का कहना है कि AI से नए तरह के काम और नौकरियां भी पैदा होंगी। वहीं, भारत में हुए AI समिट के दौरान डारियो अमोदेई ने दावा किया था, ‘जिन बीमारियों का इलाज सालों से नहीं मिला, AI उसका इलाज ढूंढने में काबिल है।