बंगाल की जीत के बड़े मायने हैं… कौशल किशोर चतुर्वेदी

बंगाल की जीत के बड़े मायने हैं…

चार मई 2026 की तारीख भारत और पश्चिम बंगाल के इतिहास में दर्ज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की उपलब्धि हासिल कर ली है। कांग्रेस, कम्युनिस्ट और तृणमूल कांग्रेस के बाद अब भाजपा पश्चिम बंगाल में राज करेगी। इसके साथ ही पिछले 8 दशक से संरक्षित वर्ग विशेष के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है। तुष्टिकरण का एक अध्याय बंद होने वाला है और अभी तक सत्ता के संरक्षण से वंचित वर्ग के लिए आने वाले दिन अच्छे साबित होंगे।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और सपा में से तृणमूल कांग्रेस और डीएमके को इन पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद सत्ता से बाहर होना पड़ रहा है। यह आधी आबादी की तीखी प्रतिक्रिया है या मोदी-शाह की सुनियोजित रणनीति का सुनिश्चित परिणाम, इसका विश्लेषण अलग-अलग नजरिए से होना तय है। लेकिन अब इस सच्चाई से भी अलग नहीं हुआ जा सकता है कि पश्चिम बंगाल में पहली बार, पुडुचेरी में लगातार दूसरी बार और असम में तीसरी बार भाजपा नीत सरकार बनने जा रही है। तो तमिलनाडु में डीएमके सत्ता से बाहर हो गई है। विजय स्टार साबित हुए हैं और टीवीके युग की शुरुआत हो रही है। केरलम में भी यूडीएफ सत्ता में आ रही है जो कहीं न कहीं कांग्रेस को चुनाव परिणामों पर सवालिया निशान लगाने से रोकने को मजबूर करेगी। बात फिर आधी आबादी की करें तो भाजपा ने अब इस मंत्र पर आगे भी सत्ता की सिद्धि पाने का घोषित ऐलान कर दिया है। बंगाल के बाद अगला लक्ष्य पंजाब भी घोषित हो चुका है। और उत्तर प्रदेश में सपा की बदहाली को भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध से जोड़ दिया है।
तो अब गंगोत्री से गंगा सागर तक का पूरे कॉरिडोर में भगवा लहरा रहा है। 20 से ज्यादा राज्यों में भाजपा और एनडीए गठबंधन के मुख्यमंत्री
अब कांग्रेस मुक्त भारत की तस्वीर पेश कर रहे हैं। वहीं नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2029 में केंद्र में एनडीए सरकार को लगातार बनाए रखने का पुख्ता भरोसा जता रहा है। मोदी-शाह ने यह साबित कर दिया है कि भारत में कथित तौर पर मुस्लिम तुष्टीकरण
का पूरी तरह से खात्मा होने जा रहा है। जहाँ केरलम में अभी यूडीएफ है तो अगले चुनाव में वहां पर भी भाजपा सरकार बनाने की भविष्यवाणी की जा चुकी है। वजह भी बताई है कि यहां कांग्रेस मुस्लिम लीग के साथ सरकार चलाएगी, जो केरलम में भी कमल खिलने की पृष्ठभूमि तैयार करेंगे।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के मायने यह भी हैं कि अब पश्चिम बंगाल यूसीसी के दायरे में होगा। पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे लोगों की खैर नहीं है। इन 5 साल में पश्चिम बंगाल में नौकरशाही का भाजपा सरकार के मुताबिक बदलाव होगा। और जिस तरह से उत्तर प्रदेश में योगी राज में संगठित अपराधियों का खात्मा हुआ है वह पैटर्न पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिल सकता है।
और एसआईआर के बाद अब परिसीमन का नया दौर भारत में विपक्ष और पश्चिम बंगाल में ममता के गले की हड्डी साबित होने वाला है। जिस तरह कभी उत्तर प्रदेश से मिली लोकसभा की बंपर सीटें एनडीए को समृद्ध बनाती थी वही भूमिका अब पश्चिम बंगाल भी निभा सकता है। और नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम में छिपे जिन खतरों का डर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को सता रहा था, अब उनका सामना करने के लिए विपक्षी दलों को मजबूर होना पड़ेगा।
तो पश्चिम बंगाल जीत के मायने यह भी हैं कि अगर विपक्ष द्वारा भाजपा की इस जीत को ईवीएम कृपा से जोड़कर देखा जा रहा है तो यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि एनडीए सरकार के इस खेला में घुसपैठ करने की कोई भी गुंजाइश विपक्ष के पास नहीं है। भाजपा जैसी विचारधारा पर भी कांग्रेस और विपक्षी दल अमल नहीं कर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस मुक्त भारत की तरफ देश बढ़ रहा है और खानापूर्ति के नाम पर विपक्ष वेंटीलेटर पर सांसें गिनने को मजबूर होने की स्थिति में पहुँचे बिना नहीं रह सकता। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के मायने यही हैं कि विकसित भारत बनने तक भाजपा सत्ता में रहने की हर संभव कोशिश करेगी… और एक राष्ट्र-एक चुनाव के तहत पूरे राष्ट्र में एक साथ होने वाले चुनाव परिणाम विपक्ष को लगातार जमींदोज और भाजपा को लगातार मजबूत करते रहेंगे।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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