भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई की। इसके बाद सरकार मास्टर प्लान के ड्राफ्ट जारी करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, प्लान में लैंडयूज का प्रस्ताव आया तो भी सीलिंग नहीं हटेंगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में साफ किया है।
बता दें कि भोपाल में सीलिंग से राहत के लिए व्यापारियों की उम्मीद नए मास्टर प्लान पर टिकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के आदेश के बाद यह साफ है कि नए प्लान के ड्राफ्ट में किसी आवासीय क्षेत्र का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव आ भी जाए, तो वहां चल रही दुकान तत्काल वैध नहीं होगी। प्रस्तावित बदलाव लागू होगा या नहीं, यह नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मिलने वाली अनुमति पर निर्भर करेगा।
22 को सुनवाई, आदेश सार्वजनिक हुआ जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का 22 सितंबर का आदेश शुक्रवार को सार्वजनिक हुआ। आदेश के पैरा 17 से 26 में भोपाल का जिक्र है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है। सरकार ने इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे और आपत्तियां लेने की अनुमति मांगी।
साथ ही भरोसा दिया कि कोर्ट की अनुमति के बिना नए प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। मामले की सुनवाई में मौजूद अधिवक्ता सौरभ मिश्रा के अनुसार इसका मतलब है कि ड्राफ्ट में भूमि उपयोग बदलने का प्रस्ताव सीलिंग से तत्काल राहत का आधार नहीं बन सकता।

मुकदमा लंबित होने से कार्रवाई नहीं रुकेगी आदेश के मुताबिक, किसी जमीन या भवन के स्वामित्व या अन्य विवाद का अदालत में लंबित होना सीलिंग में बाधा नहीं बनेगा। यदि उसका उपयोग आवंटन के उद्देश्य या मंजूर नक्शे के विपरीत है, तो अधिकारी कार्रवाई कर सकेंगे। पूरी तरह बिना मंजूरी बने निर्माण पर कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी होगी।
ड्राफ्ट प्रकाशन की अनुमति, अंतिम राहत नहीं कोर्ट ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट प्रकाशित करने की मंजूरी दी है, लेकिन स्पष्ट किया कि अभी किसी निर्माण की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान व बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर ही जांची जाएगी। जहां लैंडयूज स्पष्ट परिभाषित नहीं, वहां मिश्रित उपयोग पर विचार संभव है।
सिर्फ आवासीय में कारोबार तो सीलिंग तय कोर्ट ने अफसरों को सुनिश्चित करने को कहा कि जो क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित हैं, वहां व्यावसायिक गतिविधियां न चलें। ऐसे क्षेत्र में कारोबार मिलता है तो परिसर को पहले सील किया जाएगा। नया ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद भी इन क्षेत्रों में कार्रवाई मौजूदा नियमों के आधार पर होगी।
हालांकि, कोर्ट ने उन क्षेत्रों को अलग माना है जहां जमीन का उपयोग आवासीय या व्यावसायिक के रूप में स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं है। वहां मिश्रित उपयोग के सवाल पर विचार हो सकता है। फिलहाल ऐसे क्षेत्रों में यथास्थिति बनी रहेगी, जबकि कागजी और प्रशासनिक कार्यवाही जारी रह सकती है।
कोर्ट ने कहा- चुनिंदा कार्रवाई नहीं चलेगी सुनवाई में एमिकस क्यूरी ने भोपाल का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ परिसरों को सील करने के कुछ घंटे या दिन बाद ही फिर खोल दिया जाता है। इस बीच न कारण बताओ नोटिस का जवाब आता है, न अधिकारी का कोई औपचारिक निर्णय। कोर्ट ने अधिकारियों को बिना भेदभाव कार्रवाई करने को कहा है। चुनिंदा कार्रवाई सामने आने पर उसने सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी है।

भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप जारी किया गया है। पहले योजना 2005 का निवेश क्षेत्र 601.06 वर्ग किमी था, अब नया निवेश क्षेत्र 1016.90 वर्ग किमी किया गया है, जिसमें 254 गांव शामिल हैं। यह योजना 45 लाख आबादी के लिए तैयार की गई है, जिसमें विकास योग्य क्षेत्र 61017.02 हेक्टेयर प्रस्तावित है।

योजना को 4 स्तंभों पर आधारित किया गया है – प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, आधुनिक एवं नागरिक हितैषी नियोजन, सुधारोन्मुख नियोजन और आत्मनिर्भर एवं अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला विकास।

प्रमुख विशेषताएं –
– भोजताल, पहाड़ियों, वन क्षेत्रों के संरक्षण के साथ लगभग 3000 हेक्टेयर ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित।
– 51 किमी लंबा ग्रोथ कॉरिडोर EKAI (Education Knowledge Artificial Intelligence) सिटी, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक हब को जोड़ेगा, इसमें असीमित FAR।
– हरित क्षेत्र 2005 में 16% था, अब बढ़ाकर 27% किया गया, जो URDPFI मानक से अधिक है।

– अफोर्डेबल हाउसिंग, रेंटल हाउसिंग और चैरिटेबल गतिविधियों को FAR क्रय से मुक्त रखा गया है।
– भूमि उपयोग में 43.85% आवासीय, 27.01% ग्रीन क्षेत्र, 9.53% परिवहन प्रस्तावित है।