एमपी के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात: 46% तक कम बारिश से फसलें संकट में, जबलपुर में धान के खेतों में दरारें, उज्जैन संभाग में सोयाबीन पर इल्ली का हमला

मध्य प्रदेश के 55 में से 48 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। यहां मानसून में अब तक औसत से 46% तक कम बारिश हुई है। ऐसे में न सिर्फ डैम-तालाब खाली हैं बल्कि फसलों पर भी असर पड़ रहा है। जबलपुर में धान के खेतों में दरारें पड़ गई हैं तो उज्जैन संभाग में सोयाबीन की फसल में इल्ली का असर है। हालांकि, अगले 3 दिन प्रदेश के कुछ जिलों में तेज बारिश होने का अनुमान है।

कम बारिश होने से डैम-तालाब खाली हैं। फसलें भी सूख रही हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 1% से 46% तक कम बारिश हुई है।

वहीं, पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल संभाग में 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से कम पानी गिरा है।

धान, सोयाबीन-मक्का की फसलों पर असर

जिन जिलों में कम बारिश हुई है, वहां सोयाबीन, धान और मक्का की फसलें ली जाती हैं। सब्जियों की पैदावार भी होती है लेकिन औसत से भी आधी बारिश होने से किसानों के लिए दिक्कतें बढ़ गई हैं।

जबलपुर के पाटन में धान के खेत सूखे पड़े हैं। यहां औसत बारिश की बात करें तो अब तक 16.3 इंच पानी ही गिरा है जबकि 23.6 इंच बारिश होनी थी। महिला किसान संगीता ने बताया कि कर्ज लेकर धान की फसल लगाई थी। बारिश की कमी की वजह से यह बर्बाद हो रही है।

देखिए, तीन तस्वीरें…

शाजापुर में बारिश कम होने से सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है।

जबलपुर के पाटन में धान के खेतों में दरारें पड़ गई हैं।

सागर में बारिश नहीं होने की वजह से फसलें खराब हो रही हैं।

शाजापुर में इल्ली का असर बढ़ा

शाजापुर के किसान मुकेश ठाकुर ने बताया कि बारिश कम होने से सोयाबीन की फसल में नुकसान हो रहा है। इल्लियों का असर भी है। इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। नमी की कमी के कारण 35 से 40 दिन की सोयाबीन फसल में यलो मोजेक वायरस के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। कई खेतों में पत्तियां पीली पड़ रही हैं जबकि कुछ जगहों पर जड़ सड़न की समस्या भी सामने आई है।

किसान रूपेश सिंह ठाकुर ने बताया कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान होगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यलो मोजेक वायरस सफेद मक्खी से फैलता है। गंभीर स्थिति में 85 प्रतिशत तक उपज घट सकती है।

किसानों ने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे, विशेषज्ञों की टीम भेजने, समय पर दवा देने और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके और फसल को बचाया जा सके।

इन 7 जिलों में आंकड़ा औसत से ज्यादा

मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी हिस्से के बड़वानी, ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश करीब 39 इंच तक है।

सीधी में पुल डूबा, पहाड़ी खिसक रही

सीधी जिले के भंवरसेन घाट पर शुक्रवार सुबह हुई तेज बारिश के कारण सोन नदी का पुल पानी में डूब गया। करीब 40 गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। इसके अलावा भंवरसेन पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर खिसककर सड़क पर आ रहे हैं। इससे हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।

भंवरसेन पहाड़ी की मिट्टी खिसककर सड़क पर आ रही है।

3 दिन तेज बारिश, उत्तरी हिस्सा भीगेगा

मौसम विभाग ने अगले 3 दिन प्रदेश के उत्तरी हिस्से के कुछ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर और सागर में भारी बारिश हो सकती है।

वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, और निवाड़ी में हल्की बारिश होगी।

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प्रदेश में कोटे की आधी बारिश भी नहीं

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसत 16.3 इंच (419.5 मिमी) बारिश हुई है जबकि 20.5 इंच (519.8 मिमी) पानी गिर जाना था। इस तरह 4.2 इंच यानी 19 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस सीजन में अब तक हुई बारिश कोटे की आधी भी नहीं है।

दरअसल, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह आंकड़ा बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। इसके बावजूद 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

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भोपाल में अगस्त 2006 में 35 इंच बारिश हुई

भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है।

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