
इतिहास यही सीख देता है कि भारत और चीन में नहीं है साझा विकास की गुंजाइश…
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा सकारात्मक भाव से ही सोचने को प्राथमिकता देनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी लाइन पर विदेश नीति आगे बढ़ा रहे हैं। और मोदी इसी भाव के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से गले मिलने में भी कोई कंजूसी नहीं बरत रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में जिनपिंग ने साफ शब्दों में कहा भी है, यह हम एक दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं। दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए जिनपिंग ने यह भी कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीखकर साझा विकास की ओर बढ़ सकते हैं। चीनी राष्ट्रपति चिनपिंग सात साल बाद 12 सितंबर 2026 को भारत आए हैं।चिनपिंग ने पीएम मोदी से सीमा संबंधी मुद्दों, व्यापार और निवेश पर बातचीत की।
पीएम मोदी ने कहा, “आपका हार्दिक स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आपकी सकारात्मक टिप्पणियों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से प्राप्त समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। एक बार फिर, भारत में आपका हार्दिक स्वागत है।” जिनपिंग ने भी कहा कि वह पीएम मोदी से 21 बार मिल चुके हैं और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर पहुंचे हैं, जिन्होंने चीन-भारत संबंधों को निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर किया है।
जिनपिंग के मुताबिक चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा और विकसित किया है। हालांकि, हमारे दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां भिन्न हैं, फिर भी हम एक-दूसरे की खूबियों से पूर्णतः सीख सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, साथ मिलकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को ‘ग्रेटर ब्रिक्स सहयोग’ के तहत उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए। भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स समिट की बैठक में शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग समेत ब्रिक्स समूह देशों के नेताओं का नई दिल्ली में जमावड़ा है। इस बीच 12 सितंबर को पीएम मोदी ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
गौरतलब है कि 15 जून 2020 की रात को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा ( एलएसी) पर भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक टकराव हुआ था। गलवान संघर्ष के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए हैं। लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद वे भारत आए हैं। और जिस तरह से वह मीठी भाषा में बात कर रहे हैं, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उनके फैसलों में भी भारत के प्रति ऐसी मिठास कायम रहेगी। भारत-चीन युद्ध सहित आजादी के बाद किसी भी अवसर पर चीन, भारत के हितों को लेकर सफलता की कसौटी पर खरा नहीं उतरा है। और चीन की जो प्रकृति है उसके मुताबिक आगे भी भारत के साथ चीन की दोस्ती बेहतर मुकाम पाने की गुंजाइश नहीं रखती है। और लगता यही है कि गले मिलते समय भी मोदी और जिनपिंग दोनों के मन इसको लेकर कोई संशय नहीं होगा।
चीन कभी भी नहीं चाहेगा कि उसका पड़ोसी देश भारत उसकी बराबरी पर खड़ा हो। और भारत भी यह समझता है कि दुनिया में उसे सबसे ज्यादा खतरा चीन से ही है। और गले मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि भारत और चीन के दिल मिल चुके हैं। इतिहास यही सीख देता है कि भारत और चीन में साझा विकास की गुंजाइश नहीं है… और मोदी भी यह जानते हैं और जिनपिंग भी इसे भली भाँति जानते हैं। हालांकि फिर भी गले तो मिलना ही पड़ेगा क्योंकि यह मेजबानी का धर्म भी है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।