महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश ने भी एनालॉग पनीर पर बैन लगा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के कुछ ही घंटों में इंदौर के पालदा इलाके की एक फैक्ट्री से 450 किलो एनालॉग पनीर जब्त भी कर लिया गया।
दिलचस्प बात यह है कि यह बैन अचानक नहीं आया। तीन पड़ोसी राज्यों ने जैसे ही अपने यहां एनालॉग पनीर पर रोक लगाई, उनका बचा हुआ माल गुजरात के दाहोद से आलीराजपुर, महाराष्ट्र के नागपुर से छिंदवाड़ा, सिवनी और छत्तीसगढ़ से सिंगरौली, मंडला के रास्ते मध्य प्रदेश में खपने लगा, यानी मध्य प्रदेश तीन राज्यों का डंपिंग ग्राउंड बनने लगा था।
सवाल-1: एनालॉग पनीर क्या है, यह असली पनीर से कैसे अलग है?
जवाब- इसे आसान भाषा में समझिए…
- असली, यानी डेरी पनीर दूध से बनता है। दूध को गर्म कर उसमें एसिड डाला जाता है, जिससे दूध फटता है और उसका ठोस हिस्सा अलग हो जाता है। इसी से पनीर बनता है। इसमें दूध से मिलने वाला प्रोटीन, कैल्शियम और फैट होता है।
- एनालॉग पनीर की तस्वीर थोड़ी अलग है। इसमें दूध के साथ या उसकी जगह पाम ऑयल जैसे वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर और स्टार्च जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, यानी यह पूरी तरह पारंपरिक दूध से बना पनीर नहीं होता।
- न्यूट्रिशनिस्ट अमिता के मुताबिक, कुछ एनालॉग पनीर में डेरी से मिलने वाली सामग्री भी हो सकती है, लेकिन उसमें वनस्पति फैट और दूसरी सामग्री की मात्रा इतनी होती है कि वह पारंपरिक डेरी पनीर से अलग उत्पाद बन जाता है। देखने और खाने में दोनों एक जैसे लग सकते हैं, इसलिए ग्राहक के लिए सिर्फ देखकर फर्क करना मुश्किल होता है।
- कीमत में भी बड़ा अंतर दिखता है। डेरी पनीर आमतौर पर महंगा होता है, जबकि एनालॉग पनीर कम लागत में तैयार हो सकता है। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर खाना बनाने वाले होटल, रेस्टॉरेंट और कैटरिंग कारोबार में इसका इस्तेमाल होता है।
सवाल-2: यह सेहत के लिए कितना और कैसे खतरनाक है?
जवाब: सबसे पहले एक बात समझिए- सिर्फ एनालॉग पनीर होना ही खतरनाक नहीं है।
- खतरा तब होता है, जब इसे बनाने में घटिया तेल, जरूरत से ज्यादा वनस्पति घी (हाइड्रोजनेटेड ऑयल) या तय मानकों से कम गुणवत्ता वाला कच्चा माल इस्तेमाल किया जाए। ऐसा पनीर अगर लंबे समय तक खाया जाए तो सबसे पहले इसका असर दिल, पेट और शरीर को मिलने वाले पोषण पर पड़ता है।
- डाइटीशियन नेहा शर्मा के मुताबिक, इसमें इस्तेमाल होने वाला घटिया या ज्यादा प्रोसेस्ड तेल शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है। इससे दिल की नसों में रुकावट आने और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ सकता है, अगर लंबे समय तक ऐसा खाना खाते रहें तो लिवर और किडनी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
- सबसे जल्दी असर पाचन तंत्र पर दिखता है। असली पनीर आसानी से पच जाता है, लेकिन एनालॉग पनीर में मिला स्टार्च और दूसरे पदार्थ कई लोगों में गैस, पेट फूलना, एसिडिटी या दस्त जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं।
- सबसे बड़ा नुकसान यह है कि लोग इसे प्रोटीन के लिए खाते हैं, लेकिन अगर इसमें दूध की मात्रा कम और दूसरे पदार्थ ज्यादा हैं तो शरीर को उतना प्रोटीन, कैल्शियम और दूसरे जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते, जितने असली पनीर से मिलने चाहिए।

सवाल-3: अगर यह इतना खतरनाक है तो अब तक बैन क्यों नहीं था?
जवाब: पहला हिस्सा एक कानूनी फर्क में छिपा है, दूसरा हिस्सा पड़ोसी राज्यों के फैसले में।
- मिलावटी पनीर और एनालॉग पनीर दो अलग चीजें हैं। मिलावटी पनीर में डिटर्जेंट, यूरिया, कास्टिक जैसी खतरनाक चीजें मिलाकर उसे धोखे से असली पनीर बताकर बेचा जाता है, जो पूरी तरह गैर-कानूनी और गैर-जमानती अपराध है।
- एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाला पाम ऑयल, कॉर्न स्टार्च और स्किम्ड मिल्क पाउडर, ये सब FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यानी देश की खाद्य नियामक संस्था) की मंजूरी वाली खाद्य सामग्री की श्रेणी में ही आते हैं, वही सामग्री बिस्किट, नमकीन, चॉकलेट में भी इस्तेमाल होती है।
- FSSAI इसे मिलावट नहीं, बल्कि डेरी एनालॉग नाम की एक अलग वैध फूड कैटेगरी मानता रहा है, ठीक वैसे ही जैसे चीनी की जगह शुगर-फ्री या मक्खन की जगह मार्जरीन बिकता है। FSSAI ने इस पर बैन के बजाय अब तक सिर्फ सख्त लेबलिंग की शर्त रखी थी- पैकेट और मेन्यू कार्ड पर साफ लिखा हो कि यह दूध से बना पनीर नहीं है।
- लेकिन जमीन पर यह पारदर्शिता निभाई ही नहीं जाती, इसलिए महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ ने केंद्रीय बैन का इंतजार किए बिना अपने स्तर पर पूर्ण प्रतिबंध का रास्ता चुन लिया और यहीं से मध्य प्रदेश के लिए नई मुसीबत शुरू हुई। जैसे ही इन तीन राज्यों में एनालॉग पनीर पर रोक लगी, वहां बना और स्टोर किया गया माल मध्य प्रदेश में खपने लगा।

राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी माना कि पड़ोसी राज्यों का माल यहां खपने की आशंका बढ़ गई थी, इसलिए लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए प्रदेश में भी इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया। एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी इस मसले पर मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है। कहा है कि सिर्फ लेबल लगाने से एनालॉग पनीर का खतरा खत्म नहीं होता।
सवाल- 4: बाजार से पनीर खरीदते या खाते वक्त असली-नकली की पहचान कैसे करें?
जवाब: चार तरीकों से आसानी से जांच की जा सकती है…
1. छूकर और गर्म कर परखें: असली पनीर मुंह में रखने पर घुल जाता है। गर्म करने पर सिकुड़ जाता है, जबकि एनालॉग पनीर गर्म होने पर भी लगभग वैसा ही बना रहता है। चमड़े जैसा खिंचता है।
2. पैकेट पर सामग्री सूची पढ़ें: पैक्ड पनीर खरीदते वक्त FSSAI के निशान के साथ सामग्री की सूची जरूर देखें, अगर उसमें ‘Analogue’, ‘Imitation’ या ‘Vegetable Fat’ लिखा हो तो यह डेरी पनीर नहीं है। कानूनन कंपनी सिर्फ ‘पनीर’ नहीं लिख सकती, पैकेट पर ‘गैर-डेरी उत्पाद’ या ‘एनालॉग’ साफ दर्ज होना जरूरी है।
3. कीमत पर ध्यान दें: अगर पनीर बाजार भाव (350-450 रुपए किलो) से काफी कम, जैसे 150-250 रुपए किलो में मिल रहा है तो सतर्क हो जाएं।
4. होटल-रेस्टॉरेंट में मेन्यू कार्ड चेक करें: नियमानुसार अगर कोई होटल या रेस्टॉरेंट पनीर टिक्का, कड़ाही पनीर जैसी डिश में एनालॉग पनीर इस्तेमाल कर रहा है तो मेन्यू कार्ड पर इसकी स्पष्ट घोषणा करना अनिवार्य है। खुला बिकने वाला एनालॉग पनीर भी डेरी पनीर से अलग डिस्प्ले होना चाहिए, अगर ऐसी कोई सूचना नहीं मिलती और शक हो तो यह पूछने में झिझक न करें कि पनीर किस चीज से बना है।

सवाल-5: बैन का ऐलान तो हो गया, क्या यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा?
जवाब: शुरुआत तो असर दिखाने वाली ही रही है।
- मुख्यमंत्री के निर्देश के कुछ ही घंटों में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इंदौर की उमापति इंडस्ट्रीज फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां ड्रेनेज व्यवस्था खराब मिली, कच्चा माल तय तरीके से नहीं रखा गया था और न्यूट्रिशनल व पानी की जांच रिपोर्ट तक मौके पर मौजूद नहीं थी। नतीजतन 450 किलो पनीर (करीब 1.17 लाख रुपए कीमत) जब्त कर उत्पादन तुरंत बंद करा दिया गया।
- FDA यानी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की जॉइंट कंट्रोलर टीना यादव के मुताबिक सभी जिलों को कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। तीन दिन जांच अभियान चलेगा, जिसकी रिपोर्ट एक हफ्ते में मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।
- विभाग के पास फिलहाल प्रदेश में एनालॉग पनीर की कुल खपत का पक्का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी अभी जुटाई जा रही है। यही आगे की असली चुनौती भी है- जो चीज सामान्य जांच में पकड़ में ही नहीं आती और जो तीन तरफ से सीमा पार कर राज्य में घुस रही है, उसका पूरा सप्लाई चेन ट्रैक करना आसान नहीं होगा।
- त्योहारी सीजन सामने है, जब पनीर की मांग सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार के लिए असली इम्तिहान अब शुरू होता है- सिर्फ पहली छापेमारी तक नहीं, बल्कि सीमावर्ती जिलों में चेकिंग और टेस्टिंग तंत्र को इतना मजबूत बनाने तक कि यह बैन सच में जमीन पर उतर सके।