
इंदौर ने स्वच्छतम शहर की पहचान कायम रखी, पुष्यमित्र के चार साल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है…
इंदौर, मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा शहर होने के साथ-साथ पूरे देश और दुनिया में स्वच्छतम शहर के रूप में पहचाना जाता है। इंदौर की बात आज इसलिए क्योंकि पुष्यमित्र भार्गव के महापौर कार्यकाल की चार वर्ष की उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है। और खास बात यह भी है कि पुष्यमित्र भार्गव को इंदौर के स्वच्छतम शहर की उपलब्धि विरासत में मिली थी। तो पुष्यमित्र भार्गव की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने इंदौर की इस पहचान को न केवल कायम रखा, बल्कि इसमें नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उपलब्धियाँ हैं तो निश्चित तौर पर कमियों की तरफ भी लोग नजरें इनायत करेंगे। ऐसे में सबसे बड़ी भागीरथपुरा त्रासदी एक दाग के रूप में पुष्यमित्र के कार्यकाल की उपलब्धियों को आईना दिखाती रहेगी, लेकिन तब भी पुष्यमित्र भार्गव की चार साल की उपलब्धियों को कम करके नहीं आंका जा सकता। क्योंकि खुद इंदौर, इसकी गवाही दे रहा है।
वैसे भी इंदौर ने हमेशा ही मध्यप्रदेश को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान के रूप में स्थापित किया है। जब स्वच्छता की बात नहीं होती थी तब भी इंदौर आर्थिक राजधानी के रूप में मध्यप्रदेश को अलग पहचान देता था। और अब इसके साथ ही स्वच्छतम शहर के रूप में पूरी दुनिया इंदौर से प्रेरणा ले रही है।
पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में देश का पहला म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड जारी कर इंदौर नगर निगम ने वित्तीय नवाचार किया, जिससे जुटाई गई राशि से जलूद में 60 मेगावाट सोलर प्लांट स्थापित किया गया। सोलर प्लांट के माध्यम से नगर निगम के बिजली व्यय में उल्लेखनीय कमी आई। तो यह सोलर प्लांट अब प्रेरणा का मॉडल बन गया है। यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि और मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है। इंदौर नगर निगम सीमा में पिछले वर्ष 51 लाख तथा वर्तमान वर्ष 21 लाख पौधों के रोपण का अभियान भी सभी को प्रेरित करने वाला है। वहीं इस कार्यकाल में विकसित ग्लोबल गार्डन एवं यूरेशिया गार्डन जैसे आधुनिक उद्यान भी इंदौर की पहचान बन गए हैं। तालाबों का गहरीकरण, कुएं-बावड़ियों का जीर्णोद्धार तथा बड़े पैमाने पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रिचार्ज सिस्टम विकसित किए गए जो पूरे प्रदेश और देश के लिए अनुकरणीय हैं।
भारत सरकार के डिजीपिन से जुड़ने वाला देश का पहला शहर बनने का गौरव इंदौर को हासिल हुआ है। 10 वार्डों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पते जारी किए गए हैं तो शेष वार्डों में कार्य जारी है। इस उपलब्धि ने भी इंदौर को दुनिया के नक्शे पर अलग स्थान दिया है और मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया है। 1,000 वर्गफीट तक के भवन नक्शे 24 घंटे में स्वीकृत करने की व्यवस्था लागू कर इंदौर ने नगर निगम की कार्यप्रणाली सुधारने की दिशा में सभी नगर निगमों को
अच्छी राह दिखाई है।
तो हुकमचंद मिल मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने में महापौर पुष्पमित्र भार्गव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं वक्फ बोर्ड से धोबी घाट की भूमि निगम को हस्तांतरित कर लगभग 90 बीघा लैंड बैंक तैयार किया गया है। हातोद स्थित निगम गौशाला का जीर्णोद्धार तो महू में आधुनिक गौशाला का निर्माण कराया है। वहीं बायोगैस प्लांट की क्षमता 500 से बढ़ाकर 800 टीपीडी करने की प्रक्रिया भी बेहतर कदम है।
कुल मिलाकर चार साल की उपलब्धियों का सार यही है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में वित्तीय सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, हरित ऊर्जा, जल प्रबंधन, स्वच्छता, सड़क एवं आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार जैसे लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कार्य किए गए। इन पहलों ने इंदौर को स्मार्ट, हरित, आत्मनिर्भर और नागरिक-केंद्रित शहर के रूप में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मानें तो नगर निगम का लक्ष्य केवल वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के इंदौर की मजबूत नींव तैयार करना है। इसी सोच के साथ विकास, पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक तकनीक, वित्तीय नवाचार और नागरिक सहभागिता को समान प्राथमिकता दी गई।
वैसे भी इंदौर हमेशा ही उपलब्धियों के मामले में पूरे मध्यप्रदेश को प्रेरित करता रहा है। और इंदौर के इस गौरव में वहाँ के नागरिक बराबर के सहभागी रहे हैं। अपेक्षा यही है कि इस कड़ी में पुष्यमित्र भार्गव ने इंदौर के साथ विकास की यात्रा में जो सहभागिता की है, वह जारी रहे। और पुष्यमित्र भार्गव का पांच साल का कार्यकाल भागीरथपुरा, त्रासदी जैसे दागों को भी पूरी तरह साफ करने में सफल रहे…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।