हाई कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस के निलंबन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल कोई आपराधिक मामला दर्ज होने या उसके लंबित रहने के आधार पर किसी व्यक्ति का शस्त्र लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने आदेश दिया कि आयुध अधिनियम की धारा 17 के तहत लाइसेंस निलंबित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को अपनी स्वतंत्र, तर्कसंगत और संतोषजनक संतुष्टि दर्ज करना अनिवार्य है। मामला मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में पदस्थ एक सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी से जुड़ा है। कलेक्टर ने 19 दिसंबर 2024 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता का शस्त्र लाइसेंस अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया था, जबकि हथियार के दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं था।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा- शस्त्र लाइसेंस राज्य द्वारा दिया गया एक विशेषाधिकार है, जिसे अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता। हालांकि, निलंबन की शक्ति का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे नहीं किया जा सकता