बड़वानी जिला मुख्यालय में आवारा कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि अब मासूमों के बाद बड़ों की जान पर बन आई है। 12 जून (शुक्रवार) को कबाड़ और लकड़ी बीनकर अपने परिवार का पेट पालने वाली 35 वर्षीय लीला बाई बकावले को आवारा कुत्तों के एक झुंड ने नोच-नोचकर मार डाला। डॉक्टरों का कहना है कि महिला के नाक, कान समेत हाथ-पैर पर गहरे जख्म थे।
शनिवार को पोस्टमॉर्टम के बाद महिला का अंतिम संस्कार किया गया। घटना के दूसरे दिन दैनिक भास्कर ने पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर, चश्मदीद और मृतका के पिता से बात की। साथ ही डॉग बाइट्स के आंकड़े खंगाले तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पता चला कि जिला मुख्यालय की 60 हजार आबादी में 1 जनवरी से 12 जून तक 800 डॉग बाइट्स के मामले सामने आ चुके हैं, यानी रोजाना करीब 4 से 5 लोग आवारा कुत्तों के शिकार हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अलावा यह संख्या एक हजार से ज्यादा हो सकती है।

हादसे के अगले दिन भी वहीं घूम रहे थे खूंखार कुत्ते
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के अगले दिन (शनिवार) भी ईंट-भट्ठे पर नजारा आम दिनों जैसा था। मजदूर काम कर रहे थे। पास ही उन्हीं कुत्तों का झुंड बेखौफ घूम रहा था, जिन्होंने लीला बाई पर हमला किया था। नगर पालिका की तरफ से कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची थी।

डॉक्टर बोले- गले का मांस नोचा, ज्यादा खून बहने से हुई मौत
लीला बाई का पोस्टमॉर्टम करने वाले जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. अनिल सिंह जामोद ने बताया- यह इस साल कुत्तों के हमले से मौत का पहला केस है। महिला के शरीर पर 6 से ज्यादा बड़े और गहरे जख्म थे। कुत्तों ने नाक, कान, गला, हाथ-पैर, मुंह और सिर तक को बुरी तरह काटा था। ऐसा लगता है कि जब महिला जमीन पर गिरी तो कुत्तों ने उसकी गर्दन पर दांत गड़ाकर मांस नोच लिया। अत्यधिक खून बह जाने के कारण मौके पर ही मौत हो गई।

पिता बूढ़े, पति बीमार और बेटा बोल नहीं सकता
लीला बाई अपने घर की इकलौती कमाने वाली सदस्य थीं। उसके जाने से परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है। रोते हुए बुजुर्ग पिता नारायण निरगुड़े ने बताया- पति दिलीप लंबे समय से बीमार है। 12 साल का बेटा बोल नहीं पाता है।
लीला रोज घर का काम निपटाकर कबाड़ और लकड़ी बीनने जाती थी, जिससे घर का चूल्हा जलता था। पिता ने रोते हुए पूछा- मैं तो बूढ़ा हूं, कितने दिन जीऊंगा पता नहीं, लेकिन मेरी बेटी के बाद अब इस मूक-बधिर बच्चे का क्या होगा?
पूर्व पार्षद राकेश मकवाने ने प्रशासन से इस बेसहारा परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
उसके शरीर पर बहुत जख्म थे
पिता ने बताया कि रोजाना की तरह लीला शुक्रवार को भी बेटे को मेरे पास छोड़कर गई थी। शाम को उसकी राह देख रहा था। वो रोज अंधेरा होने से पहले आ जाती थी। कल थोड़ी देरी हुई, तो मैं घर से निकल बाहर आकर बैठकर इंतजार करने लगा। इतने में कुछ लोग आए। बोले- लीला को भट्ठे के पास कुत्तों ने काट लिया है। मैं उनके साथ वहां पहुंचा। वहां पहुंचकर देखा कि लीला तो मरी पड़ी थी। किसी ने उसके ऊपर कपड़ा डाल दिया था।
वहां कई लोग इकट्ठा थे। पुलिस भी मौजूद थी। उसके चेहरे से कपड़ा हटाया। शरीर के हर हिस्से पर गहरे जख्म थे। कुत्तों ने उसके सिर के बाल तक नोच खाए थे। वो हमारे लिए खाना बनाने का सामान लेकर वापस आ रही थी। उसकी लाश के पास ही सामान का थैला और लकड़ियों का गट्ठा पड़ा था।

चश्मदीदों ने कहा- चीख सुनकर दौड़े, पर तब तक देर हो चुकी थी
भट्ठा संचालक गोलू गोले, अरुण और विशाल ने बताया कि उन्होंने शाम को कुत्तों के भौंकने और महिला के चिल्लाने की आवाज सुनी थी। जब वे दौड़कर मौके पर पहुंचे तो 5-6 कुत्ते लीला बाई को घेरकर नोच रहे थे। महिला बचाओ-बचाओ चिल्ला रही थी। हमने पत्थर मारकर कुत्तों को भगाया, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से घायल हो चुकी थी।
परिवार को सहायता देने की मांग
बीजेपी के पूर्व पार्षद राकेश मकवाने ने बताया कि लीला बकावले रोजाना लकड़ी और भंगार बीनकर परिवार का जीवन यापन करती थी। उसने जाने के बाद परिवार को भोजन तक की परेशानी हो गई है। प्रशासन को मदद करनी चाहिए।
राकेश कहते हैं कि इस चूना-भट्ठी इलाके में डॉग बाइट के सबसे ज्यादा मामले हैं। कुत्ते के हमले से एक बच्चे की मौत का मामला भी सामने आया था। (हालांकि, राकेश के इस दावे की प्रशासन ने पुष्टि नहीं की है।)
सीएमओ ने भविष्य की प्लानिंग गिना दीं
जब इस लापरवाही को लेकर नगर पालिका सीएमओ सोनाली शर्मा से बात की गई तो धरातल पर कार्रवाई के बजाय उन्होंने कागजी योजनाएं गिना दीं। उनका कहना था कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण और ART (एनिमल रेस्क्यू एंड ट्रीटमेंट) सेंटर के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन किसी एजेंसी ने दिलचस्पी नहीं ली। अब दोबारा टेंडर निकाले जाएंगे।
ART सेंटर के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है। सीएमओ ने कहा कि रैबीज के खतरे को कम करने के लिए कुत्तों के वैक्सीनेशन की योजना बनाई जा रही है और स्थायी समाधान के प्रयास जारी हैं।