मोदी की मंशा और मोहन के हिस्से में यश… मध्यप्रदेश में 19 जुलाई जगदीशपुर और यूसीसी के नाम… कौशल किशोर चतुर्वेदी

मोदी की मंशा और मोहन के हिस्से में यश… मध्यप्रदेश में 19 जुलाई जगदीशपुर और यूसीसी के नाम…
मोहन सरकार के काल की उपलब्धियां कितनी भी हों लेकिन यूसीसी की मंजूरी की बराबरी पर अन्य कोई उपलब्धि नहीं आ पाएगी। समान नागरिक संहिता के मध्यप्रदेश में मंजूर होने का दिन, तारीख और स्थान इतिहास में दर्ज हो गई है। मोदी की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में लागू होने जा रही यूसीसी, यानी समान नागरिक संहिता wके मंजूर होने की तारीख 19 जुलाई 2026, दिन रविवार और स्थान जगदीशपुर मध्यप्रदेश के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप आगे बढ़े यह कदम स्वतः ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हिस्से में यश लाने वाले बन गए हैं। मध्य प्रदेश का मुस्लिम संप्रदाय भले ही मोहन सरकार के इस फैसले से पूर्णता या आंशिक रूप से असंतुष्ट हो, लेकिन इस वर्ग की भी आधी आबादी कहीं न कहीं सरकार के इस फैसले से सहमति जताती नजर आएगी। ठीक उसी तरह जैसे कि आज तीन तलाक अधिनियम लागू होने के बाद मुस्लिम महिलाएं कहीं न कहीं राहत की सांस लेती नजर आ रही हैं, ठीक उसी तरह समान नागरिक संहिता मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग को संतुष्टि प्रदान करती नजर आने वाली है और मुस्लिम वर्ग की आधी आबादी इसकी समर्थक बनकर खुशी मनाएगी।
पहले जगदीशपुर की बात करते हैं।
जगदीशपुर भोपाल जिले में स्थित एक ग्राम पंचायत है। गोंडो ने इस स्थान को बसाया था तो नवाब दोस्त मोहम्मद खान ने 18वीं सदी में इसका नाम बदलकर इस्लाम नगर कर दिया था। और फरवरी 2023 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने एक बार फिर इसे पुराना नाम जगदीशपुर देकर गोंडों की उस विरासत को बहाल किया था। और 19 जुलाई 2026 को जगदीशपुर समान नागरिक संहिता का साक्षी बनकर एक बार फिर देश-दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। पूर्व में जगदीशपुर उर्फ इस्लामनगर भोपाल रियासत की राजधानी हुआ करती थी। जहां भोपाल शहर की पुनःस्थापना करने वाले नवाब दोस्त मोहम्मद खान द्वारा निर्मित महलों के खंडहर और राजगोंडो द्वारा निर्मित करवाए गए गोंड महल आज भी मौजूद हैं। जिसे भूपाल सिंह सल्लाम के वंशजों द्वारा निर्मित करवाया गया था। स्थानीय राजगोंड क्षत्रियों ने जगदीशपुर को स्थापित किया था तो 18 वीं सदी में यहां दोस्त मोहम्मद खान जो कि भोपाल रियासत के संस्थापक थे, उन्होंने तब इसे इस्लाम का शहर अर्थात् इस्लाम नगर का नाम दिया था। इस्लाम नगर दोस्त मोहम्मद खान के राज्य की राजधानी थी। वर्ष 1923 में दोस्त मोहम्मद खान को एक छोटी सी घेराबंदी के बाद इस्लाम नगर का किला निजाम-उल-मुल्क को देना पड़ा, हालांकि बाद में संधि शर्तों के बिना पर उन्हें पदावनत कर किलेदार नियुक्त किया गया। बाद में इस्लामनगर को सन 1806 से 1817 तक सिंधिया घराने ने भोपाल के बहाल होने के बाद एक संधि के अंतर्गत अपने नियंत्रण में रखा।
तो मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदे को जगदीशपुर में मंजूरी दे दी गई है। रिटायर्ड न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार मसौदे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए समान कानूनी प्रावधान किए हैं। हालांकि, गोंड सहित अनुसूचित जनजाति समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को इस कानून के अंतर्गत रखा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366(25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों, संरक्षित पारंपरिक समुदायों तथा घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों पर यह कानून लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पद्धतियों और रीति-रिवाजों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा तथा सभी धर्मों को अपने धार्मिक आचरण की स्वतंत्रता पहले की तरह मिलती रहेगी। पर मसौदे के अनुसार सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह वैध होगा। पुरुषों की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। प्रतिबंधित रिश्तों में विवाह और अवैध सहमति से किए गए विवाह स्वीकार नहीं होंगे। मौखिक तलाक या किसी अनौपचारिक पंचायत के फैसले को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। तलाक केवल कानून में निर्धारित आधारों पर ही संभव होगा।प्रस्तावित संहिता में तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए ‘निकाह हलाला’ जैसी किसी भी अपमानजनक या बाध्यकारी शर्त को मानने, करवाने या बढ़ावा देने को आपराधिक माना गया है। साथ ही यदि पति ने विवाह के समय किसी अन्य महिला को गर्भवती किया हो तो पत्नी विवाह निरस्त कराने की मांग कर सकेगी। यूसीसी के तहत विवाह और तलाक दोनों का पंजीयन अनिवार्य होगा। शहरी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया एमपी ई-नगरपालिका पोर्टल के माध्यम से और ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगर निकाय या पंचायत के जरिए पूरी होगी। हालांकि रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह स्वतः अमान्य नहीं होगा।
मसौदे में ‘अवैध संतान’ की अवधारणा समाप्त कर दी गई है। विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार मिलेंगे। बच्चों की अभिरक्षा तय करते समय अदालत उनके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देगी। यूसीसी मसौदे में बेटा और बेटी दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। माता और पिता दोनों को भी प्रथम श्रेणी का उत्तराधिकारी माना गया है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति उत्तराधिकार का अधिकार खो देगा। यदि कोई कानूनी वारिस नहीं होगा तो संपत्ति राज्य के पास जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के समक्ष घोषणा दर्ज करानी होगी। दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक होगा और वे पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए। यदि किसी पार्टनर की आयु 21 वर्ष से कम है तो इसकी सूचना उसके अभिभावकों को भी दी जाएगी। लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें उत्तराधिकार का पूरा अधिकार मिलेगा। यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ देता है तो महिला अदालत से भरण-पोषण की मांग कर सकेगी। नियमों के उल्लंघन पर जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। एक महीने से अधिक समय तक बिना पंजीयन लिव-इन में रहने पर तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर तीन महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना तथा नोटिस के बावजूद जानकारी न देने पर छह महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
तो बात बस इतनी सी है कि यूसीसी मध्य प्रदेश में मंजूरी पा चुका है और आज यानि 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले मानसून सत्र में यह बिल पास हो ही जाएगा। और तब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हिस्से में आने वाला उपलब्धि का यह सूरज पूरे मध्य प्रदेश में रोशनी बिखरेगा। और जब तक मध्य प्रदेश रहेगा तब तक समान नागरिक संहिता लागू करने की मोदी की मंशा पर खरे उतरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यश मिलता रहेगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं