इजराइल में नेतन्याहू की सत्ता पर संकट, गादी आइजनकोट को सरकार बनाने का न्योता; 67 सांसदों का समर्थन, अरब पार्टियों और गठबंधन की शर्तों से फंसा पेंच

गादी आइजनकोट इजराइल के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने उन्हें अगली सरकार बनाने के लिए चुना है।

 

आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए 6 हफ्ते का समय मिलेगा। इस दौरान उन्हें दूसरी पार्टियों से बातचीत करके गठबंधन बनाना होगा और संसद में बहुमत साबित करना होगा।

सरकार बनाने के लिए 61 सासंदों का समर्थन चाहिए। गादी आइजनकोट के गठबंधन को 6 पार्टियों के 67 सांसदों ने समर्थन दिया है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास मात्र 46 सांसदों का समर्थन है। जो बहुमत के आंकड़े से बहुत दूर है। इस कारण राष्ट्रपति ने उन्हें सरकार बनाने का पहला मौका नहीं दिया।

गादी आइजनकोट ने सोशल मीडिया पर यह तस्वीर शेयर की है। इसमें उन्होंने लिखा- मैं कोशिश करूंगा कि इस जिम्मेदारी के योग्य साबित हो सकूं।

छह पार्टियों ने आइजनकोट का नाम सुझाया

आइजनकोट को छह पार्टियों के 67 सांसदों का समर्थन मिला है। इनमें चार यहूदी पार्टियां और दो अरब पार्टियां शामिल हैं। चार यहूदी पार्टियों के पास कुल 48 सीटें हैं, जबकि दो अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं।

सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इन छह पार्टियों में से तीन यहूदी पार्टियां अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को तैयार नहीं हैं। आइजनकोट ने भी चुनाव से पहले अरब पार्टियों को सरकार में शामिल करने से इनकार किया था। दूसरी ओर, अरब पार्टियों का कहना है कि वे नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए आइजनकोट का समर्थन कर रही हैं।

 

 

जॉइंट लिस्ट गठबंधन को जानिए

यह इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। इसमें तीन अलग-अलग पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन में अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी हैं।

हदाश: वामपंथी पार्टी है। अरब और यहूदी नागरिकों की समानता, मजदूरों के अधिकारों और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करती है।

ताल: अहमद तिबी की पार्टी है। अरब नागरिकों के समान अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करती है।

बलद: अरब राष्ट्रवादी विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। इजराइल को ऐसा देश बनाने की वकालत करती है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें।

 

अरब पार्टियों के समर्थन की राह में दो बड़ी मुश्किलें

पहली मुश्किल: अरब पार्टियां हमास को आतंकी संगठन नहीं मान रही

  • अरब पार्टियों की 19 सीटें आइजनकोट को संसद में मजबूत बहुमत दिला सकती हैं। लेकिन उन्हें सरकार में शामिल करने से उनके दूसरे सहयोगी नाराज हो सकते हैं।
  • जॉइंट लिस्ट ने साफ कर दिया है कि वह सरकार में शामिल नहीं होगी। हालांकि, वह बाहर से सरकार का समर्थन कर सकती है। इससे कम सीटों वाली सरकार भी चल सकती है।
  • दूसरी अरब पार्टी यूनाइटेड अरब लिस्ट यानी राम ने अभी सरकार में शामिल होने से इनकार नहीं किया है। लेकिन आइजनकोट की शर्त है कि सरकार में शामिल होने वाली हर पार्टी को हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करना होगा।
  • राम के नेता मंसूर अब्बास ने ऐसा करने से इनकार किया है। हालांकि, उन्होंने सभी तरह के आतंकवादी हमलों की निंदा की है। गुरुवार को उन्होंने यह भी कहा कि हमास और दूसरे सभी फिलिस्तीनी संगठनों को हथियार छोड़ देने चाहिए।

दूसरी मुश्किल: अरब पार्टियां मान भी जाएं तो सहयोगी नाराज

  • अगर मंसूर अब्बास आइजनकोट की शर्त मान भी लेते हैं, तब भी सरकार बनाने की राह आसान नहीं होगी।
  • यिसराइल बेतेनु पार्टी के नेता एविगडोर लिबरमैन कई बार साफ कर चुके हैं कि वे ऐसी किसी सरकार में शामिल नहीं होंगे, जिसमें अरब पार्टियां हों। इतना ही नहीं, वे बाहर से भी ऐसी सरकार को समर्थन देने के पक्ष में नहीं हैं।
  • ऐसे में आइजनकोट के पास अति-रूढ़िवादी यहूदी पार्टियों का समर्थन लेने का रास्ता बचता है।

इजराइली नेता एविगडोर लिबरमैन पिछले महीने इजराइल में नोवा म्यूजिक फेस्टिवल स्थल पर बने स्मारक देख रहे थे। यह स्मारक 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में मारे गए लोगों की याद में बनाए गए हैं।

आइजनकोट अल्पमत की सरकार बनाने पर कर रहे विचार

नेतन्याहू के 46 सांसदों के मुकाबले आइजनकोट के पास 48 सांसदों का समर्थन है। उन्होंने कहा कि पहले वे अल्पमत की सरकार बनाने पर काम कर रहे हैं।

आइजनकोट ने यह भी कहा कि वे बिना किसी भेदभाव के हर राजनीतिक पार्टी को अपनी सरकार में शामिल होने का न्योता देंगे। पार्टियां अभी या बाद में भी सरकार में शामिल हो सकती हैं, लेकिन उन्हें उनकी कुछ शर्तें माननी होंगी।

उनकी प्रमुख 4 शर्तें हैं:

  1. इजराइल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में मान्यता देना।
  2. इजराइल की आजादी की घोषणा में बताए गए मूल्यों को स्वीकार करना।
  3. सभी नागरिकों के लिए सैन्य या नागरिक सेवा अनिवार्य करना।
  4. हमास को आतंकवादी संगठन मानना और उसे खत्म करने पर सहमत होना।

हालांकि, यहां भी लिबरमैन रास्ते में आ रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने साफ कर दिया कि वे 61 सांसदों के बहुमत के बिना सरकार बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

लिबरमैन खुद भी प्रधानमंत्री बनने की कोशिश में

यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी की लेक्चरर और विपक्ष की सलाहकार गायिल तालशीर के मुताबिक, यह साफ नहीं है कि लिबरमैन सच में आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं या नहीं।

लिबरमैन का आरोप है कि चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में आइजेनकोट ने सहयोगी दलों के वोट अपनी पार्टी की ओर खींच लिए। इससे उनकी पार्टी यिसराइल बेतेनु और पूरे नेतन्याहू विरोधी गठबंधन को कई सीटों का नुकसान हुआ।

तालशीर के मुताबिक, लिबरमैन को डर है कि अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने पर उनके दक्षिणपंथी वोटर नाराज हो सकते हैं। वे खुद भी प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश कर सकते हैं।

अगर आइजेनकोट सरकार नहीं बना पाए, तो नेतन्याहू को एक और मौका मिलेगा। अगर वे भी नाकाम रहे, तो नए चुनाव से पहले संसद के किसी भी सदस्य को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल सकता है। इसके लिए उसे 60 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में लिबरमैन भी दावेदारी पेश कर सकते हैं।

शुक्रवार को आइजेनकोट ने बिना नाम लिए लिबरमैन पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि निजी फायदे के लिए सरकार बनाने में देरी करने या उसे रोकने वाले नेताओं को इतिहास राष्ट्रीय संकट में देश का साथ न देने वालों के रूप में याद रखेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं ने इजराइल को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने का मौका गंवा दिया और उन्हें इसके लिए माफ नहीं किया जाएगा।

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