ओंकारेश्वर में भगवान ज्योतिर्लिंग के दर्शन को लेकर प्रोटोकॉल व्यवस्था एक बार फिर विवादों में है। प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर 11 श्रद्धालुओं से ₹13,200 की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है, लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने मंगलवार को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले में मंदिर के एक सुरक्षा गार्ड और एक स्थानीय फोटोग्राफर को जेल भेज दिया गया है।
पुलिस विभाग ने भी ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर दो पुलिसकर्मियों, अमन और धर्मेंद्र, को लाइन अटैच किया है। इसके अतिरिक्त, मंदिर में तैनात सभी सुरक्षा कर्मियों का चरित्र सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। वर्मा ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं के साथ किसी भी प्रकार की ठगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

इस मामले में कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। शिकायत के अनुसार, श्रद्धालुओं से प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर राशि वसूली गई थी। हालांकि, बाद में कुछ श्रद्धालुओं ने ओंकारेश्वर से बाहर जाकर ठगी से इनकार कर दिया। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि यदि ठगी नहीं हुई थी तो शिकायत क्यों की गई, और यदि शिकायत सही थी तो बाद में बयान क्यों बदला गया?
प्रशासन का कहना है कि प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा आम श्रद्धालुओं के लिए नहीं होती है। संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुशंसा पर ही अधिकृत सूची प्रोटोकॉल ग्रुप में भेजी जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आम लोगों तक प्रोटोकॉल की जानकारी या लिंक कैसे पहुंची। इस पूरे मामले में किस स्तर तक मिलीभगत रही, इसकी जांच भी आवश्यक है।

यह उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी कई जनप्रतिनिधि प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को समाप्त करने या इसे अधिक पारदर्शी बनाने की मांग कर चुके हैं। यह घटना केवल ₹13,200 की वसूली का मामला नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल उठाती है जिस पर हर दिन हजारों श्रद्धालुओं का विश्वास टिका हुआ है।एसडीम ने कार्रवाई करते हुए मंगलवार को जानकारी दी एवं दो दिवस में सभी सुरक्षाकर्मियों को चरित्र सत्यापन कर जमा करने के निर्देश दिए।