राजनीति काजल की कोठरी है दिव्या… कामना यही कि तुम्हारी दिव्यता बनी रहे… कौशल किशोर चतुर्वेदी

राजनीति काजल की कोठरी है दिव्या… कामना यही कि तुम्हारी दिव्यता बनी रहे…
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, बल्कि बार बार होता रहा है। अरविंद केजरीवाल ने भी धरती पर रामराज्य लाने का सपना सच करने के लिए आम आदमी पार्टी का गठन किया था। जब पूरे देश में मोदी का जादू चल रहा था तब दिल्ली में जनता केजरीवाल का नाम जप रही थी। मफलर गले में डालकर आम आदमी की तरह खांसने वाले केजरीवाल आखिरकार खुद को शीश महल में कैद करने के लिए उतावले हो गए थे। उनके शरीर से मफलर और खाँसी पूरी तरह से छूमंतर हो गई थी। ऐसा नहीं कि उन्होंने अपने सपनों को सच करने की कोशिश ना की हो लेकिन लगता यही है कि सत्ता ही बड़ी ठगनी होती है। सत्ता के महल में कितने भी सफेद कपड़े पहनकर कोई प्रवेश करे लेकिन अंततः कपड़ों के साथ शरीर पर भी कालिख पुती नजर आती है। उत्तर प्रदेश जिस राज्य में आपने एक नौकरशाह के रूप में सत्ता को बहुत करीब से देखा है, वहाँ मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का नाम हर कोई सम्मान से ले रहा है। इसके बावजूद, आपकी आंखों ने बहुत कुछ ऐसा देखा होगा जब आपको देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा आईएएस से इस्तीफा देने का विकल्प ज्यादा बेहतर लगा। जब योगी के राज्य में भी जनतंत्र कहीं नजर नहीं आया,तब क्या आपको ऐसा लगता है कि जन के नाम पर एक दल बनाकर आप राजनीति का कायाकल्प कर देंगी। ऐसे समय में यह बेहतर था कि आप कॉकरोच जनता पार्टी की तरह अपना प्लेटफॉर्म बनाकर सामने दिख रही विसंगतियों के खिलाफ क्रांतिकारी कदम उठाकर ज्यादा बेहतर की तलाश में जुट सकतीं। देश के युवाओं को दीपके की सोच में दाग दिख सकता है, लेकिन यदि आप युवाओं से सच्चे मन से कुछ अपील करतीं तो शायद बेहतर परिणाम सामने आ सकते थे। वैसे आप चाहते तो कॉकरोच जनता पार्टी भी आपको शीर्ष स्थान प्रदान कर सकती थी। यह तो आम आदमी की सोच में उस दिन ही आ गया था जब आपने नौकरशाही को त्यागा था कि अब आपका अगला पड़ाव राजनीति ही होगा। और आप सभी की उम्मीदों पर खरा उतरीं। आपने राजनीति के रण में उतरकर राज करने की नीति को जन पर केन्द्रित करने का संकल्प लेकर एक मायने में खुद को तर्क की कसौटी पर एकदम खरा साबित करने की सफल कोशिश की है। पर यह तो केवल पहला पड़ाव है मंजिल आने तक कोसों का सफर बाकी है। और जैसा आप सोच रहे हैं, वह मुकाम पाना नामुमकिन नहीं तो बहुत मुमकिन भी नहीं है।
मूल खबर यही है कि उत्तर प्रदेश में आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया है। दिव्या मित्तल ने अपनी नई पार्टी का नाम ‘जन नीति भारत’ रखा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आगामी यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। दिव्या ने एक्स हैंडल पर विस्तार से बताया है कि उन्होंने पार्टी बनाने का फैसला क्यों किया है? उन्होंने जनता से उनके साथ जुड़ने की अपील की है। ‘जन नीति भारत’ के संगठनात्मक ढांचे, संभावित गठबंधन की रणनीतियों और उत्तर प्रदेश के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। एक्स हैंडल पर जारी एक वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी नीति-निर्माण में आम लोगों को केंद्र में रखेगी। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगी कि सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान केवल चुनाव के दिन ही नहीं, बल्कि हमेशा जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहे। उन्होंने पार्टी के नाम और अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में उतरने के फैसले की घोषणा करते हुए कहा, “अभी राजनीति आप पर शासन करती है। लेकिन ‘जन नीति’ में आप ही शासन करेंगे।”
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु की पूर्व छात्रा रहीं दिव्या मित्तल ने 13 साल के करियर के बाद 30 अगस्त को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने 29 सितंबर को राजनीति में आने की घोषणा की थी। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने राज्य में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया है, जिसमें संत कबीर नगर, देवरिया और मिर्जापुर में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में उनका कार्यकाल शामिल है।
दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीर नगर में अपने कार्यकाल के दौरान शासन से जुड़ी पहलों और जन शिकायतों के निवारण तंत्र की देखरेख की। जिला मजिस्ट्रेट के रूप में मिर्जापुर के साथ उनका पुराना जुड़ाव ही उनके इस फैसले का मुख्य आधार माना जा रहा है। दिव्या मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। उन्होंने नवरात्रि के दौरान विंध्यावासिनी देवी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की थी।
तो यही कहा जा सकता है कि दिव्या मित्तल को फिलहाल नौकरशाही के खोखलेपन की बात समझ में आ गई है। और मोहभंग ने उन्हें राजनीति की तरफ धकेल दिया है। पार्टी बनाने का मतलब यह कतई नहीं है कि लाखों में से सफलता पाने वाले किसी एक किरदार की तरह, उन्हें भी सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने में सफलता हासिल हो जाए। और यह भी बहुत आसान नहीं है कि वह खुद भी चुनाव जीतेंगी अथवा जनता उन्हें भी नकार देगी। कामना यही है कि वह भी जीतें और सत्ता के शीर्ष पर भी पहुंचें। पर हकीकत कामना से मेल खाए यह जरूरी नहीं है। खैर, हो सकता है कि दिव्या को आज नौकरशाही के खोखलेपन की जानकारी हुई है तो कल राजनीति के खोखलेपन की जानकारी उनकी बेचैनी को और ज्यादा बढ़ाए। हालांकि असंभव कुछ भी नहीं है। भागीरथ गंगा को जमीन पर ला सकते हैं तो दिव्या के प्रयास राजनीति को जन की तरफ मोड़ने में भी सफल हो सकते हैं। पर फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि राजनीति काजल की कोठरी है दिव्या… कामना यही कि तुम्हारी दिव्यता बनी रहे…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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