
‘भक्त भीड़’ को ‘अंधभक्त’ की परिभाषा बताई राहुल ने…
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के सिस्टम पर छह लोग बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सिस्टम में अलग- अलग लेयर हैं और यही देश चलाते हैं। राहुल गांधी ने दावा किया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिस्टम चलाते हैं। अमित शाह स्टूडेंट्स पर बल प्रयोग कराते हैं। मोहन भागवत विचारधारा की बात करते हैं, उन्हें हज़ारों करोड़ रुपये स्कूल कॉलेज चलाने के लिए दिए जाते हैं।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ‘सिस्टम में बैठे लोग विपक्षी नेताओं की जासूसी कराते हैं और उद्योगपति सरकार को मार्केटिंग के लिए पैसे देते हैं।’ उन्होंने दावा किया कि निचले स्तर पर हर जगह सिस्टम ने अपना एक आदमी बैठा रखा है। उन्होंने इस मामले में क्रिकेट का ज़िक्र भी किया और कहा कि सचिन तेंदुलकर, कपिल देव के होते हुए भी वहां अमित शाह के बेटे को बैठा दिया गया।
राहुल गांधी ने कहा, “स्डूडेंट्स यही सवाल करते हैं कि ऐसा कैसे हुआ। संस्थाएं अपना काम क्यों नहीं करतीं. सिस्टम स्टूडेंट्स नहीं चाहते, सिस्टम ‘अंधभक्त’ चाहते हैं। वो नफ़रत फैलाते हैं और नफ़रत से बात करते हैं।” राहुल गांधी ने अंधभक्त को परिभाषित करते हुए साफ किया, “अंधभक्त अहंकार से भरा होता है। स्टूडेंट डरता नहीं है, लेकिन अंधभक्त डरता है। वह महिलाओं पर आक्रमण करता है, उनका अपमान करता है। वह बेईमान और झूठा होता है। इसलिए सिस्टम अंधभक्त तैयार करता है और उन्हें पूरे देश में फ़ैलाता है।”
इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को इस मायने में सफल माना जा सकता है कि वहां इकट्ठी हुई भीड़ मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेतृत्व की सफलता को प्रदर्शित कर रही थी। हालांकि जिस तरह का वार्तालाप लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किया, उसमें यह बात ही पूरी तरह से साबित हुई कि एकत्रित भीड़ कांग्रेस समर्थित थी। इसे एनएसयूआई की सफलता माना जा सकता है। और यहां मंच पर आने वाले युवा छात्रो को भविष्य के कांग्रेस नेता के रूप में देखने की संभावना जताई जा सकती है। यह भीड़ एक विचारधारा को गाली देने वाली दूसरी विचारधारा की समर्थन ही नजर आ रही थी। लेकिन जिस तरह सत्ता परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है, उसके लिए शायद राहुल गांधी को
जेन-ज़ी जैसी भीड़ की जरूरत है जो उनके कार्यक्रमों में स्वतः आए भी और खुद के आने का एहसास भी कराए।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा की शिकायत कुछ ठीक लग रही है। खेड़ा ने एक्स पर टिप्पणी की और कहा, “जैसे-जैसे ‘छात्रों की गूंज’ एक शहर से दूसरे शहर जा रहा है, वैसे-वैसे इसे रोकने के लिए बीजेपी सरकार के बहाने, धमकियां और घटिया हथकंडे भी सामने आ रहे हैं। अब मध्य प्रदेश सरकार की बारी है।” उन्होंने लिखा, “श्री राजीव गांधी की हत्या का हवाला देने से लेकर कोचिंग सेंटरों पर इस तरह के शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाने तक कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स की सुरक्षा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।”
“बीजेपी इस संभावना से साफ तौर पर घबराई हुई है कि छात्र एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठाएंगे। लेकिन डराने-धमकाने से उनकी आवाज नहीं दबेगी। बीजेपी का खेल खत्म हो गया है। उसके दिन गिने-चुने रह गए हैं।”
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार के दौर में शिक्षा बजट में बड़ी कटौती कर दी। साल 2004 में शिक्षा के लिए बजट में 2.6% रकम दी जाती थी, जिसे 2014 तक बढ़ाकर 4.6% किया गया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले दस साल में यह बजट काटते-काटते 2.6% कर दिया गया और शिक्षा पर 7.7 लाख करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई। राहुल गांधी ने कहा, “निजीकरण की बात करें तो एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देशभर में एक लाख स्कूल बंद हुए, लेकिन इनमें से 55 फीसदी स्कूल अकेले मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बंद हुए।” फिर हॉस्टल का मुद्दा है। हर 100 छात्रों में से केवल 14 छात्रों को ही हॉस्टल में जगह मिल पाती है। यहां भी उन्होंने उदाहरण दिए, लेकिन मुख्य मुद्दा निजीकरण और खर्च में कटौती का है, जो ‘सबका साथ, मेरा विकास’ के नारे के विपरीत है। जब सरकार शिक्षा में कम निवेश करती है, तो छात्र को जोखिम में डाल दिया जाता है।”
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस पर पलटवार किया कि मध्यप्रदेश में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन शिक्षा और विकास के लिए उनका बजट सभी के सामने है। आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हमारी शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य पर सवाल उठा रहे हैं। हमारी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है। साथ ही, हमने 4.38 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया है, जबकि कांग्रेस के 55 साल के शासनकाल में प्रदेश का कुल बजट लगभग 22 हजार करोड़ रुपए था।आज युवा सवाल पूछ रहे हैं। नारी वंदन अधिनियम के विरोध और महिला प्रतिनिधित्व पर कांग्रेस क्या जवाब देगी? कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन एक भी महिला मंत्री नहीं है। जनता सब देख रही है और समय आने पर सवालों का जवाब भी देगी।
खैर, राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। छात्रों की गूंज कार्यक्रम से जिस संदेश की उम्मीद की जा रही थी, वह देने में कांग्रेस पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई है। जेन-ज़ी जैसे आयोजन किए बिना कांग्रेस परिवर्तन या बदलाव के ठोस दावे नहीं कर सकती है… इंदौर के छात्रों की गूंज आयोजन से यह साफ संदेश मिल रहा है। क्योंकि यहां राहुल गांधी ने वास्तव में ‘भक्त भीड़’ को ‘अंधभक्त’ की परिभाषा बताई है… इससे ज्यादा कुछ भी नहीं।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।