
संजय की बात में दम है…
अगर किसी बात की चर्चा हो रही है तो वह यूपीआई पेमेंट है। डिजिटल पेमेंट मोड पर अब पूरा देश है। और अधिकतर लोगों की सुबह की शुरुआत यूपीआई के साथ होती है। दूध-सब्जी से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग का साथी अब यूपीआई है। ऐसे में जब यूपीआई पर चार्ज लगने की खबर आती है, तो आम आदमी सबसे पहले यही जानना चाहता है कि उसपर इसका क्या असर पड़ेगा। सरकार ने 15 अक्टूबर से यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का फैसला किया है। एमडीआर पर आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि ये चार्ज दुकानदार से वसूला जाएगा लेकिन व्यापारी रिश्तेदार तो नहीं होता है। व्यापारी आम आदमी से ही वसूलेगा। 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगेगा। ये चार्ज ग्राहकों से नहीं बल्कि व्यापारियों से वसूला जाएगा। इस पर आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘फूफा’ बहुत नाराज हैं। उन्होंने कहा कि नाराज ‘फूफा’ ने लोगों की जेब पर बड़ा हमला किया है।
नए यूपीआई नियमों को लेकर भी आम लोगों के मन में यही डर है कि क्या अब डिजिटल पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा पैसे कटेंगे? नए नियम के मुताबिक गूगल पे, फोन पे, पेटीएम जैसे पेमेंट ऐप्स को सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि वे यूजर्स से किसी भी तरह की प्लेटफॉर्म फीस या हिडन चार्ज नहीं वसूल सकते।
नए यूपीआई नियमों को लेकर आम लोगों के मन में यही डर है कि क्या अब डिजिटल पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा पैसे कटेंगे? दरअसल, भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने यूपीआई पेमेंट्स को लेकर एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट फ्रेमवर्क जारी कर दिया है, जो देश में 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रहा है।
सफाई के तौर पर देखें तो सरकार का मत है कि अगर आप रोजमर्रा के सामान, दूध, सब्जी, राशन, ऑटो-कैब या ऑनलाइन शॉपिंग के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए सबसे बड़ी और राहत की खबर यह है कि यूपीआई आपके लिए पहले की तरह 100% मुफ्त रहेगा।
आप अपने किसी परिचित, दोस्त या परिजन को कितने भी पैसे भेजें, चाहे 100 रुपये हों या 1 लाख रुपये, नए नियम के मुताबिक उसपर 1 रुपया भी चार्ज नहीं लगेगा। यानी पर्सन टू पर्सन ट्रांसफर पूरी तरह से फ्री है। जब आप किसी दुकान या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सामान खरीदकर क्यूआर कोड स्कैन करते हैं या यूपीआई आईडी से पेमेंट करते हैं, तो ग्राहक के तौर आपसे से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा।
नए नियम के मुताबिक गूगल पे, फोन पे, पेटीएम या भीम जैसे पेमेंट ऐप्स को सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि वे यूजर्स से किसी भी तरह की प्लेटफॉर्म फीस या हिडन चार्ज नहीं वसूल सकते।
एमडीआर ( मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह कमीशन या फीस होती है, जो कोई मर्चेंट यानी व्यापारी अपने ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों (जैसे फोन पे, पेटीएम, गूगल पे) को देता है। जनवरी 2020 से डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई पर एमडीआर को पूरी तरह ज़ीरो कर दिया गया था। अब नए नियमों के तहत एमडीआर को दोबारा लागू किया जा रहा है।
किसी भी दुकान या मर्चेंट पर 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर जीरो एमडीआर लागू होगा। यानी 2000 रुपये तक के भुगतान पर न तो ग्राहक से कुछ लिया जाएगा और न ही दुकानदार से। अगर आप किसी बड़े स्टोर या मॉल में 2000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट यूपीआई से करते हैं, तो मर्चेंट पर 0.4% का एमडीआर लगेगा। उदाहरण के लिए अगर 3,000 रुपये का ट्रांजेक्शन होता है, तो दुकानदार को करीब 12 रुपये का चार्ज देना होगा। 5 हजार रुपये के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट को 20 रुपये का चार्ज लगेगा। बड़े कारोबारियों को राहत देने के लिए 75,000 या उससे अधिक के भारी-भरकम पेमेंट्स पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। चाहे लेन-देन 1 लाख रुपये का हो या 5 लाख रुपये का, चार्ज 300 रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता। सब्जी बेचने वाले, चाय दुकान वाले, छोटे किराना दुकानदार और ऑटो ड्राइवर बड़े पैमाने पर क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है।
वहीं आम उपभोक्ता से आम उपभोक्ता को दिया जा रहा यूपीआई पेमेंट अभी भी फ्री है।
लेकिन सबसे बड़ी बात यही है कि संजय सिंह ने कहा, “अब ये कहना है कि हम टैक्स तो व्यापारियों से ले रहे हैं, इससे आपका क्या लेना देना, ये बहुत हास्यास्पद है… आप जो टैक्स लगाओगे वो वसूला तो उपभोक्ता से ही जाएगा। व्यापारी रिश्तेदार तो नहीं लगता है। जितना टैक्स आप लगाएंगे आम आदमी से ही वसूला जाएगा”।
संजय सिंह ने ये भी कहा कि सरकार ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का अच्छा सिस्टम चलाया है। इसमें आपको (सरकार) 1800 करोड़ रुपये का मुनाफा हो रहा है। बाबजूद इसके आप कह रहे हैं कि हम सुविधा देंगे तो आपसे और टैक्स लेंगे। यह बात लोकतांत्रिक नजर नहीं आती है… और आज नहीं तो कल यह पता लगने वाला ही है कि संजय की बात में दम था, दम है और दम रहेगा।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।