
तो क्या ब्रिक्स की ईंटों से फिर ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का महल बनाने की तैयारी है…
भारत की राजधानी दिल्ली में चल रही चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का व्यवहार नेहरू-माओत्से तुंग के जमाने की यादें ताजा कर रहा है। तब पहल भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की तरफ से हुई थी और अब लग रहा है पहल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग कर रहे हैं। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” 1950 के दशक में भारत और चीन के बीच दोस्ती और आपसी सहयोग का एक प्रसिद्ध नारा था। 1954 में भारत और चीन के बीच ‘पंचशील समझौता’ हुआ था, जिसके बाद यह नारा बहुत लोकप्रिय हुआ। इसका मकसद दोनों एशियाई देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना था। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस नारे और कूटनीति को एक नई पहचान दी थी। यह नारा 1962 के भारत-चीन युद्ध के साथ पूरी तरह समाप्त हो गया, जब चीन ने भारत की सीमाओं पर अचानक आक्रमण कर दिया। इस ऐतिहासिक धोखे के बाद से कूटनीतिक संबंधों में अविश्वास की भावना बनी हुई है, जो समय-समय पर सीमा विवादों जैसे गलवान घाटी की घटना के कारण चर्चा में आती है। और अब एक बार फिर 72 साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया में बराबरी की जोरदार वकालत की। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 5 नई पहल का प्रस्ताव रखा है, जिसे पंचशील समझौते की तर्ज पर समझा जा सकता है।
इन पहलों को एक नजर में देखते हैं। पहली पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के खुले और सभी के लिए उपलब्ध ढांचे की है। चीन ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा समूह बनाने, बड़े भाषा मॉडल पर सहयोग बढ़ाने, ट्रेनिंग और एक्सपर्ट बैठकों का आयोजन करने को तैयार है। दूसरी पहल व्यापार और निवेश को आसान बनाने की है। चीन ने ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत देश आपस में नीतियों का तालमेल बढ़ा सकेंगे। चीन अगले साल सेवाओं के व्यापार पर ब्रिक्स मंच भी आयोजित करेगा। तीसरी पहल डिजिटल उद्योगों में सहयोग की है, जिसके लिए एक साझा क्लाउड मंच बनाने का प्रस्ताव है। चौथी पहल मशीनों और कारखानों से जुड़ी है। चीन ब्रिक्स देशों को आधुनिक कारखाने बनाने और साझा मानक तैयार करने में मदद देगा। पांचवीं पहल विज्ञान और तकनीक से जुड़े हुनरमंद लोगों को तैयार करने की है। इसके लिए ब्रिक्स इंजीनियरों का साझा समूह बनाने और युवाओं के लिए विज्ञान-तकनीक नवाचार कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
ब्रिक्स के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे। उन्होंने उद्योग और सामान पहुंचाने की चेन को मजबूत रखने की जरूरत है। यानि कि शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन के लिए सोची-समझी रणनीति का खाका तैयार करने में पिछले कई महीनों से जुटे हैं। और लगता यही है कि इस महत्वपूर्ण मसौदे को पेश करते हुए उनकी तबीयत भी साथ नहीं दे रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया में बराबरी की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि बिना नियमों वाली दुनिया उस चौराहे जैसी है, जहां यातायात संकेत नहीं हों। ऐसी जगह अराजकता होना तय है। और भारत यह अच्छी तरह से समझ रहा है कि शी जिनपिंग के मुताबिक, नियमों वाली दुनिया बनाकर भारत के लिए अराजकता होना तय है। चीन लाख कोशिश कर ले तब भी भारत का भरोसा जीतने का दावा कभी नहीं कर सकता है। ब्रिक्स की ईंटों से फिर ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का महल बनाने की तैयारी करते इस बार शी जिनपिंग नजर आ रहे हैं। और शी जिनपिंग का ग्रेटर बिक्स का शिगूफा भी कमजोर चीन को ताकतवर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम महसूस हो रहा है…हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शी जिनपिंग के प्रति अपनापन और भ्रातृत्व भाव दिखाने में पं. नेहरू से चार कदम आगे खड़े नजर आ रहे हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।